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मूरख पंचायत ,.सच के सपने -५

Posted On: 25 Dec, 2013 Others में

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आदरणीय मित्रों बहनों एवं गुरुजनों ,..सादर प्रणाम
आपके मूरखों के पंचायत फिर जम गयी है ,….आँखों देखे हाल में पुनः आपका हार्दिक स्वागत है
सूत्रधार के खड़े होते ही एक युवा बोला ………..“..सबको राम राम परनाम है !….सवाल है बाबू .. सबको भरपेट पौष्टिक खाना कैसे मिलेगा !…”
सूत्रधार ने मुस्काकर उत्तर दिया ………“..कृषि क्रान्ति से सबको भरपेट पौष्टिक भोजन मिलेगा !….शुद्ध अन्न फल दाल सब्जी से बीमार भारत शक्तिमान बनेगा ,. दूध घी की नदियाँ फिर बहेंगी !….”
एक बुजुर्ग शुरू हुए ………..“..किसानी को सम्मानभरा स्वरोजगार बनाना होगा !…किसानी को लघुतम उद्योग का दर्जा सुविधा सहूलियत मिलना चाहिए ,….किसान सबसे दक्ष श्रमजीवी मनेजर है !…. गर्मी ठंडी बरसात दिनरात काम करता है ,….मौसम फसल नखत महीना सुई धागा नाली पैप तकनीक इंजन फाठा खाद दवा फसल की तरकीबें जानता बनाता है ,…फिरौ बौड़म निरीह मूरख बना है !..”
दूसरे बुजुर्ग भी आगे बढ़े ……… “…बौड़म बना नहीं भैय्या …साजिशन बनाया गया है !….धरती मैय्या की अथाह शक्ति से हम महाशक्ति थे !….हमारी अनमोल उपजाऊ जमीन पर बहुत दिन से विदेशियों की कुटिल दृष्टि जमी है !…”
“..तबहीं दलाल गाँधी लोग देश लूटकर विदेशी निवेश खातिर बेचैन रहते हैं !….हम मूरखों को विकास आमदनी का तीन पंजे तेरह पहाड़ा पढ़ाते रहे !…”……………एक महिला ने तंज किया तो बन्दरटोपी वाला किशोर बोला
“…स्वामीजी कहते हैं ,…लुटेरों का तेरही काफिला निकला है !…अगले बरस जोरदार बरसी मनेगी …इति लूटतंत्राय !..”……… बाल अदा पर पंचायत हँसने लगी ………पीछे से एक मूरख खड़ा हुआ .
………..“..हमारी जमीन जल जंगल सबकुछ विदेशी हवाले करना पुख्ता पिलान है !…भारतीयता माने सात्विक शक्ति है !….ई मिटाकर हमारा सबकुछ खाने खातिर गांधियों के माई बाप कब से जुटे हैं ! ..”
एक युवा गंभीर आवाज में बोला ……….“..साजिश पिलान जुताई वाले शैतान पूरा बर्बाद होंगे !….कुटिल अंग्रेजी लूटतंत्र जड़मूल से मिटेगा…….कर्मयोगी किसान धर्मपालक है ,…..सबके पेट खातिर खून पसीना जलाना महाधर्म है !…किसान के साथ देश का कण कण जागेगा ,..स्वाभिमानी भारत कर्तव्यवान बनेगा ,….हमको हमारा अधिकार मिलेगा ….भारतीय किसानी फिर उठेगी !..”
बुजुर्ग उसी गंभीरता से बोले ……………“..अरे गुजरात मध्यप्रदेश में गिरी किसानी काफी कुछ उठी है ………देश को सही नीयत से सही काम करने वाले सच्चे एकजुट भारतपुत्र पुत्री चाहिए ……. अंग्रेजी जहर से पूरी निजात मिलेगी !…भारत की सनातन शान लौटेगी !.”
एक युवा तनिक जोश में बोला ………..“…….हम बताते हैं !…..स्वामीजी की कृपा से कृषि क्रान्ति के बेजोड़ नमूने विकसित हुए हैं ,..तमाम लोग देखकर अपनाए हैं ,….चौतरफा लाभ देखकर और लोग उनसे सीखते हैं ,… सीखते सिखाते अपनाते जाते हैं ……प्राकृतिक खेती अपनाकर सब सेहत धन धान्य से मालामाल होंगे !…….हमारी धरती बहुतै उपजाऊ है ,..भारत भूमि दुनिया का पोषण कर सकती है !…किसानी गौरव शान से लौटेगा !…”
बगल वाले ने भी सुर मिलाया ………..“..भारतपुत्र कृषि विज्ञानी बहुत सफल प्रयोग किये हैं ,…नई तकनीक के विवेकी सहयोग से हमारी पुरातन खेती महकेगी !….हर किसान मालामाल होगा … भारत में सुख सम्पन्नता छायेगी !….”
बीच से मरी आवाज आई ……… “…लूटतंत्र में बेबस अन्नदाता मौत ढूँढता है !…..लाचार किसानपुत्र बेबसी बेकदरी से जमीनें बेचता है ,….नोटों का दबका दिखा पूंजीपति मंडली हमारी जमीनें कब्ज़ाती है !…सनातन किसानों का देश किसानी छोड़ने में भला सोचता है !…न बड़ी जोत बची न इज्ज़त सम्मान !..”
एक पंच बोले …………“..किसानी छोड़ना बहुतै बुरा है किरसन भैय्या !…….जमीन बेंचकर आजतक कोई सुखी न हुआ !…..शहरी धुंवा बहुत बीमार करता है ,…ललुवा का लड़का बीस साल दिल्ली गाजियाबाद कमाया … पचीस बीमारी लेकर लौटा …तीस बिसुवा जमीन बेंचकर इलाज कराया !…उधारी गिरवी लेकर क्रिया करम निपटाया था !…”
सूखी सांत्वना पर और पीड़ा बही ……….“….हम किसान का करें !…..गाँव खेत में पुरखों से मोहब्बत के सिवा का रखा है !….न पैसा है न शिक्षा बिजली पानी …. न कोई सुविधा सकून सम्मान है … उल्टा सब शहरी बीमारी गाँव पहुँच गयी !…..गुलछर्रे उड़ाने वाली नौजवान पीढ़ी कहाँ खेती करना चाहती है !..”
युवाभारत पर सीधा आरोप सुन एक युवा खड़ा हो गया …….. “..हम दुनिया को कर्मठता सिखाएंगे चाचा …हम सनातन कर्मठ हैं !….सपनही गुल्छर्रों की दुखदायी बीमारी लुटेरे अंग्रेजतंत्र की देन है ….ऊ मिटेगी !… शहरी कारखाने में सोलह अठारह घंटे खटना पड़ता है !…….न सोने की आजादी है .. न शुद्ध सांस लेने की !…हवा पानी इंसान सब मजबूर दूषित जहरीला है !…………किसानी सबसे मस्त मेहनती काम है !. उन्नत किसानी से हर तरह का रोजगार मिलेगा…”
“…खेती में तमाम मेहनत है …. लागत निकालकर कहाँ कुछ बचता है !..बड़े किसान फिरौ खुश हैं ,….हम बच्चों का आधा पेट भरते हैं ,.. आधे फटे कपड़े पहनते हैं !…”…………एक और गहरा जख्म उभरा तो पंच बोले
“…साजिशी लूटतंत्र में कोई खुश नहीं रह सकता …”
दूसरे पंच जोश आवेश में बोले ………….“…दुर्दिनी रात बीती रे भैय्या …जागकर काहे रोते हो !…मेहनत से घबड़ाना भारतपुत्र को शोभा नहीं देता !….अब ऊ दिन आएगा जब गाँव से दिल्ली राजधानी चलेगी !….भारत का हर गाँव भारती गौरव गायेगा ! ……स्वामीजी के महापुरुषार्थ से किसान इंसान सब जाग रहे हैं ….चौतरफा लाभ देखकर सब कुदरती खेती अपनाएंगे ,……..हम शुद्ध अन्न फल दूध घी दाल सब्जी ….और … अनमोल जड़ीबूटियाँ पैदा करेंगे !…हमारी सुन्दर बहुरंगी धरतीमाता बहुतै उपजाऊ हैं ,…….साजिशी लूटतंत्र मिटाकर हम दुनिया भर में अन्न फल जड़ीबूटी का निर्यात करेंगे !……..”
बुजुर्ग ने प्यार से पंच को रोका ………..“..निर्यात को मारो गोली !…..पूरा भारत आयुर्वेद अपनाएगा तो लाखों करोड़ का बजार होगा !….अभी विदेशी दवाई से दस गुना लुटते हैं ,..सौ गुना और बीमार होकर मरते हैं !…..”
पंच फिर बोले ………….“…भारत भूमि पर हर रोग के उपचार खातिर दवा है !…….कश्मीर से कन्याकुमारी गुजरात से सिक्किम अरुणाचल तक गाँव किसान मालामाल होंगे …..मानव हितकारी उद्योग बढ़ेंगे …गाँव नगर क़स्बा शहर सब दमकेंगे …. भारत में असली सुख सम्पन्नता आएगी !…”
“……कैसे भाई !…आज आमदनी से ज्यादा खर्चा है !..लघुतम जोत में का करेंगे !.”………..एक और निराश प्रश्न उठा तो पंच ने ही उत्तर दिया .
“..लघुतम जोत मिलकर बड़ी करेंगे !…..कम जोत वाले चार छह आठ लोग मिलकर बढ़ेंगे ,……राष्ट्रभक्त सत्ता सहकारिता को सच्ची सुविधा सम्मान देगी ,…हम सब उन्नति करेंगे !..गाँधी छाप खाऊ लुटाऊ नरेगा सीधा किसानी से जुडेगा !…बढ़िया मंजूरी सार्थक काम !…”
“…दिखावे खातिर सहकारिता आजौ हैं !…… सब बैंक बंडल दलाल नेता चाटुकार मंडली की जेब में हैं ,…..बेहिसाब चाटते खाते हैं ,.. डकार मारकर हमारा माल पचाते हैं !….”…………एक बुजुर्ग ने फिर निराशा जताई तो सहकारी सहमति मिली
पंचाधीश को क्रोध आया …………..“…अब न पचेगा … पेट फाडकर निकलेगा !………..हमको पूरा बदलाव करना होगा !…….स्वामीजी कहते हैं …खेती में सिद्ध पुरातन तरीका नयी तकनीक के साथ अपनाना होगा !…….खेत के साथ इंसानी तन मन बंजर करने वाली जहरीली अंग्रेजी खाद दवाई हटाना होगा !……….विदेशी खाद दवा बीज से हमको अथाह लूटा गया ,…..दलाल नेताओं भ्रष्टों पूंजीपतियों चाटुकारों की तिजोरियां हमारे खून पसीने से भर गयी !……. हमारी धरती हम और हमारे पशु बीमार कमजोर किये गए ….जहर मिलावटी साजिश से हम बहुत लुटे !……लुटेरों के गुलाम पूंजी दलाल सब सरकारी सहायता सब्सिडी लूटे !….हम किस्मत को कोसते हुए ठप्पा लगाते रह गए ,…. दलाल नेहरू गुलाम मंडली देश को बीमार कर विदेशियों के हवाले करते रहे !….”
……..“.. किस्मत अपने हाथों से बनेगी मैय्या !…….अब लुटेरा जाल का धज्जी उड़ने का वक्त है !…..”…….. दूसरे पंच ने पंचाधीश को संभाला ….एक युवा बोला
“…गाँधी छाप लूटतंत्र की धज्जी धड़ाम से उड़ेगी !……”
साथी ने सच्चे जोश को और ऊँचाई दी ……..“…उड़ेगी का राजेश ….उड़ने लगी है ,….उड़ जानी बाकी है !…..तमाम गाँधी तोप धड़ाम हो चुकी हैं ,….पूरे नंगे और नंगे होंगे …और धमाका होगा !…..जूते मारकर भगाए जायेंगे !……”
सूत्रधार हंसकर बोले ………….“…. हम भागने का मौका न देंगे …. पूरा वसूलकर उचित सजा देंगे !..लेकिन विदेशी बहुतै चालबाज हैं ,…एक तोपखाना गिरते ही दूसरी दलाल मंडली खड़ी करेंगे !..”…………….
सहमति स्वरों के बीच एक युवती बोली ………….“..अब कोई दलाल काम न आएगा !…सब भारत की भगवत्ता देखेंगे !……मानवता को फंसाए भयानक शैतानों का महाजाल तोड़े वाले स्वामीजी हैं ,…..स्वामीजी साक्षात ईश्वर हैं !…भारत को वरदान हैं ,..मानव को वरदान हैं !…”
माता ने बिटिया का साथ दिया ………..“…स्वामीजी हमारी खातिर सब शुभ सोचते हैं !…..मानव जीवन शुभता से भरने खातिर उनके साथ जुटना मानवता का परमधरम है ,…”
“..गुलाम लुटेरे कहते हैं ,..साधू संत बाबा का राजनीति में कोई काम नहीं !…”……….एक और माता का गुस्सा निकला तो सूत्रधार बोले .
“….स्वामीजी राजनीति में शुभ चाहते हैं !…जब जब देश पर संकट अशुभ छाया तब तब सन्यासी फकीर गुरु ज्ञानियों ने दिशा दिखाई है !….”
बुद्धिजीवी टाइप मूरख भी कूड़ा ……….“…शुभता ही ईश्वर है !…… शुभमहल भारत उनकी सनातन कृपा है !…….ऊ शुभ अशुभ सुख दुःख सबसे ऊपर हैं !…ऊ अपनी औलादों खातिर सदा शुभ सोचते हैं ,…स्वामीजी की तरह सब भारतपुत्र जागेंगे ,…स्वामी जी सच के सिपाही सेनापति महारथी हैं !…..हम हिन्दुस्तानी उनके सच्चे सिपाही हैं ,..”
एक और पंच बोले ………….“….सच माने स्वामीजी ..साहस माने स्वामीजी !…..शक्ति माने स्वामीजी ,..सच में स्वामीजी साक्षात भगवान हैं ….”
पंचायत फिर श्रद्धा से झुक गयी … एक मूरख बोला …………“….ऐसे नहीं महालुटेरी क्रूरतम राक्षस सत्ता को सालों से हिलाए हैं !..राक्षस महल अब ढहने वाला है !…….स्वामीजी दान हैं ज्ञान हैं उपकार हैं परमार्थ हैं पुरुषार्थ हैं त्याग हैं !…..स्वामीजी सच्चा भारत हैं !…”…………
“……स्वामीजी ने मानव सेवा खातिर एक पतंजलि कृषि कंपनियो खोली है !..”………….एक महिला बोली तो उत्तर मिला .
“..उनका हर काम हर नाम हरपलछिन भारत खातिर है ,………उनका बनाया हर चीज शुद्धतम सुन्दरतम उच्चतम श्रेष्ठतम है ,…सबसे सस्ते दाम पर मिलता है !…”
एक पंच फिर बोले …………..“…उनको धन व्यापार का लालच शौक नही है !………न एक पाई निजी सुख खातिर खर्चते हैं ,..ई करना होता तो पूरा साजिशी राजतंत्र उनके क़दमों में झुका था ,….झूठ को आशीर्वाद देते तो नोबेल भारतरत्न सब उनके क़दमों में होता !….लेकिन झूठ से लड़ना सच का सनातन धर्म है !…..संपन्न समर्थ सेनानी अपने राष्ट्र को सर्वोत्तम और धरती को सुखशांति से भरना चाहता है !…यही भगवत्ता है ,…स्वामीजी अपनी भगवत्ता दान करना चाहते हैं ……अपना सबकुछ देश को देना चाहते हैं !…”
अबकी मरियल से बाबा बोले ……….“..भारतीय उद्योग व्यापार को सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय सिद्ध करना उनका लक्ष्य है !..महान लक्ष्य सिद्ध हो गया ,….सच खुदै सिद्ध होता जाएगा !.”
“….पतंजलि का सब सामान सब जगह मिल नहीं पाता !…बहुत बनाते हैं ,..फिरौ कम है !…”…………..एक और मूरख बोला तो करीबी बुजुर्ग ने उत्तर दिया .
“..पतंजलि का शुद्ध सही सच्चा उद्योग हर जिला गाँव में लगना चाहिए !…… तमाम करोड़ों लोग सीधा और पूरा भारत जरा घूमफिरकर सुखी संपन्न होगा !…….पतंजलि जैसे बहुउपयोगी जैविक खाद दवा कारखाने हर जिला में लगने चाहिए …पतंजलि ग्रामोद्योग पूरे देश में होना चाहिए !..”
सूत्रधार फिर बोले ………….“..हमारा पूरा भारत खास आर्थिक क्षेत्र है ,……भयानक लूटतंत्री इण्डिया में खास आर्थिक सहूलियत लेने की सही पात्रता केवल पतंजलि के पास है ,….लेकिन लुटेरों की सत्ता उनको मिटाने खातिर हाथ पाँव मारती है ,……मानवता खातिर उद्दम की सार्थकता स्वामीजी ने सिद्ध करी है ,…”
आगे बैठे बुजुर्ग फिर बोले ………..“..झूठे मक्कार कुटिल कपटी शैतान अपना काम ही करेंगे ,…….स्वामीजी का बाल बांका नहीं कर सकते ,….उन्होंने सब सच्चाई सार्थकता सिद्ध करी है ,…..लेकिन करी कैसे ई देखो !…”
बुजुर्गा ने प्रश्न पर नाराजगी जताई …………“..ई का देखो !…..योगबल भक्तिबल ईशबल से ….ऊ ईश्वर हैं !..”
बुजुर्ग फिर पलटे………….“….महर्षि पतंजलि भगवान का रूप थे ,…मानवता को भगवत्ता का महासाधन देना उनकी महानतम महानता है ,…..उनके महान साधक स्वामीजी हैं ,….दयालु भगवन मानवता बचाने फिर आये हैं !….उनके साथ चलकर मानवता को भगवत्ता का अपार सुख शान्ति शक्ति मिलेगी !..”
एक युवा ने समर्थन किया …………“..मिलकर रहेगी बाबा !…….दुनिया जीजान से जुटेगी !…..सच खातिर लड़ना मानव का महानतम धर्म है !…सच ही धर्म है !..धर्म ही शुभ है …..”
……………..क्रमशः !

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