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मूरख पंचायत ,....सच के सपने -२

Posted On: 7 Dec, 2013 Others में

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गतांक से आगे ….

…….“..देश की दलाली करते हैं और का !…….मक्कार लफ्फाजी से भारत हड़पने वाली साजिशें अमल करते हैं ,…. मस्त नाटकी नूराकुश्ती में अंग्रेजी लूटतंत्र का भारत लूटो कार्यक्रम चलता है !……सुन्दर संसदी मर्यादा में भारत का चीरहरण होता है ,…”…………एक मूरख तमका तो दूसरा भी साथ हो लिया

“..और बैंगनों की भारी खरीद बिक्री होती है ,………लुटेरों के माफिक कानून अध्यादेश बनते हैं …दलाल गाँधी गिरोह खातिर कचरीला दोगला संविधान बदलता गिरता बिकता है …..वोटबैंक खातिर देश पर दांव लगता है !..”

……“…..अरे देश हड़पने खातिर सब दांव चलते हैं !……छोडो उनको ,……….ई बताओ शिक्षा माने का है ….”….. एक बुजुर्ग ने चर्चा पटरी पर लाने का प्रयास किया तो साथिन बुजुर्गा ने फिर पटरी हिलाई……..

………..“..आज शिक्षा माने पैसे का खतरनाक खेल है ,..खेल में खिलाड़ी दर्शक दलाल मालिक अम्पायर खेल निर्माता मंडली सब मिलकर मूरख बनते बनाते हैं ,..”……………..

सवाल उठा……….“..ऊ कैसे दादी !….”

“….जिनका पुश्तैनी धंधा देशद्रोह मानवद्रोह है ….ऊ कितना बड़े मूरख होंगे !…”……….दादी ने आश्चर्य मिला उत्तर दिया तो पीछे से एक मूरख बोला

“…..हम केवल अज्ञान खातिर मूरख नहीं हैं …. कुसंस्कार कुशिक्षा फैलाने वाली जालिम व्यवस्था में सदज्ञान समझने अपनाने वाली औकाते नहीं लगती !……हमारी लंबी नालायकी जबर जिद्दी दाग मानो !…..”

“..लायक नालायक सब लायकदार बनेंगे …..मानवता से हर दाग उड़ेगा !..सब इंसान भगवन प्रेमी उनके ही सपूत कपूत हैं …..तुम शिक्षा का बताओ !…”…………..बुजुर्ग ने सूत्रधार पर अर्जी डाली तो पंचाधीश बोली

“…. उनके रचे सुन्दर संसार के कौनो कण इंसान पशु पक्षी से रत्ती भर प्रेम है ,..या …खुद से तनिक भी प्रेम है …..तो हम लायकदार बनेंगे ….कृपा बरसाना उनकी जिम्मेदारी है !….”

एक मूरख खड़ा होकर बोला ………..“….हम अपना भविष्य खतरनाक शैतानों के हाथ सौंपते हैं ,……फिर बीमा किश्त की चिंता में जलते हैं !…………….पूछो काहे !!..”

.. बात कहने के अंदाज से सभा में माध्यम हंसी गूंजी ,…..मूरख फिर बोला

“..अरे जबाब तो सुनो..!…काहे से कि हम मूरख हैं ,..लालची गिरोह तभी मानवता लूटता है ,…..सभा फिर ग़मगीन हो गयी …..”

……एक और मूरख तैश में आया …. “..इनकी कपट मक्कारी सब वहीँ घुसेगी !……बहुत दिन से भारत सपूतों का खून पीते हैं !..”

“..अरे बेमतलब गुस्से में न डूबो ,…..शिक्षा पूछो काहे गिरी !…..”………….बुजुर्ग के जरा आवेश में पुनः प्रयास किया ,…..सूत्रधार बोले

“..गिरी नही .. समझबूझकर पैमाइशी हिसाब लगाकर इस्टीमेट से गिराई गयी ,….महान भारती शिक्षा प्रणाली से क्रूरतम साजिश हुई ……..सर्वत्र प्रकाश फ़ैलाने वाले गुरुकुल बेदर्दी से उजाड़े गए ,…ज्ञानी योगी चरित्रवान गुरुओं को मारा गया !……ईसाई साजिशसेवा के तहत अंग्रेजी के पालतू कान्वेंट खोले गए ,… विश्वसल्तनत खातिर भारत पर पूरा कब्ज़ा जरूरी था ,……बिरतानी रानी के गुलाम मैकाले ..उनके भाई बंधु जायज नाजायज औलादों ने पीढ़ियों तक आमजन को अनपढ़ बनाया ,…………………………….

…फिर अनपढ़ता मिटाने के नाम पर खाने के अभियान शुरू हुए ,……आंगनबाड़ी सर्वशिक्षा जैसे अभियानों से अनेकों कर्मचारी अधिकारी नेता लखपति करोड़पति अरबपति हो गए !…..पढ़ा कोई नहीं !………….बाकी अधकचरी शिक्षा से पढेलिखे चोर डकैत नशेड़ी बलात्कारी तैयार होते हैं !………देशद्रोही राजसी कुनबे का आदेश है ..पढ़ो बढ़ो !……कहाँ बढ़ें !!..”…………….सूत्रधार ने भी रोशिल सवाल किया तो एक युवती ने शांति से उत्तर दिया

“..ऊ सर्वनाश की तरफ भरपूर जोर लगाए हैं चाचा !…..”

सूत्रधार फिर बोले ………………“….. देव भाषा मिटाने का सब प्रयास हुआ ,… हमरही निगाह में बकवास बनाया ,….महानतम संस्कृत माता को हमसे दूर किया गया ,… वैदिक महाज्ञान को सम्प्रदायी पाखण्ड बताया गया ,…..भारत का गरिमामय इतिहास ज्ञान भुलाकर गुलाम बनाने की साजिश रची गयी !…..इतिहास के नाम पर झूठ पढ़ाकर चोर लुटेरों का मंडन हुआ ……..गाँधी नेहरू जैसे गद्दार महान बने …….कुटिल अंग्रेजों के कपटी चाटुकार भारत के कर्णधार बने ,……. औरंगजेब अकबर बाबर जैसे नृशंश हत्यारों ने इतिहास से राणाप्रताप शिवाजी जैसे महापुरुषों को किनारे कर दिया ………..भगवान रामकृष्ण चंद्रगुप्त विक्रमादित्य हर्षवर्धन जैसी अनेकों महाप्रतापी यशगाथाएं गायब हो गयी !..”

एक महिला का अग्नि स्रोत भी फूटा …………“… हमको गायब करने का पूरा प्रबंध किया गया …….लुटेरों ने भारत पर भरसक कालिख जमाई …..सच्चा इतिहास सम्प्रदायी बन गया ,….सुखी संपन्न समर्थ विश्वगुरु भारत को भुलाया गया ,….. लूट अत्याचार नशा व्यभिचार बढ़ाया गया !……इनकी दी शिक्षा जैसे जहरीला मिड दे मील …….खाकर मरो ….भूखे मरोगे ही ! ..”

मरियल से बाबा भी बोले …………“…. सब लुटेरी व्यवस्था का छल है ,… संस्कृत सीखे खातिर अमरीका बेचैन है !…नासा विज्ञान कम्पूटर खातिर सबसे ज्यादा उपयोगी मानता है ,……..हमारा महाज्ञान चुराने अपनाने खातिर बहुतै दंड बैठक पेलते हैं ,…”

………..“..योग की महिमा जानकर यीशु का योगी वाला चित्र बनाया गया !……..मूरख बनावे खातिर चालू चर्चों के नाम संस्कृत छाप रखते हैं !……हमारे घरेलू आयुर्वेद का पेटेंट करवाते हैं !….बड़े बड़े प्रबंध स्कूल कालेज गीता की शिक्षा देते हैं ,……. कांग्रेसी लुटेरे शान से सम्प्रदायी सम्प्रदायी चिल्लाते हैं !….मानवता को निरा नकली अमानुषी शान्तिपाठ से नहलाते हैं ! .”…………..बुद्धिजीवी टाइप मूरख बोला तो साथी भी बोला .

“.. नकली नाटक से नोचना इनका जनमधारी गुन है भैय्या !….सद्ज्ञान महाज्ञान की बेकदरी साजिश का बड़ा अंग है ! .”

एक पंच साहब बोले ………“… सब ज्ञान विज्ञान मानवता खातिर है ,……भारत भूमि से दुनिया को अथाह सौगातें मिली हैं ,….. लेकर कृतज्ञ होना मानवता की निशानी है ,…दशमलव न मिलता तो कौन कम्पूटर रोमन लिपि में जोड़ घटाव गुना भाग करता !………….हजारों साल पहले हमारे ज्ञानियों ने नक्षत्र विज्ञान सीख लिया ,…सबको सिखाया !……तब आज सब चाँद मंगल पर जाते हैं !…”

दूसरे पंच ने समझाया ………..“…..सब उद्योग व्यापार यंत्र औजार हथियार का मूल पैदाइश हमारी पवित्र धरती पर हुए ,…पाई मात्रा सूत्र सूत कपड़ा लोहा स्टील जहाज यहाँ से दुनिया में फैला ….सब ज्ञान विज्ञान का विकास वैदिक महाज्ञान के परकाश में हुआ !…..यहाँ आत्मज्ञान महाज्ञान और आत्मविकास को सबसे बड़ा विकास माना गया ,…सब सुख शान्ति का जड़ यहै है !…तबहीं भारत विश्वगुरु है ,….सबको भारत की गौरवशाली महिमा समझना चाहिए !.”

………..“…….दुनिया को हमने बहुत कुछ दिया ….कुछ मिला भी होगा !…….अब छलकपट से शातिर जुगाड़ चलता है !…इंसान लुटता है ..”…………एक महिला की बात पर पंचाधीश फिर बोली .

“.. छल कपट फरेब लूट खसोट मिटाकर दुनिया को मिलकर सच्चाई पर चलने की जरूरत है !….विश्व मानवता उत्थान खातिर सबको मानव धर्म अपनाना होगा !…”

“..बिलकुल ठीक कहा माई !……दुनिया से विश्वनीडम का भारतीय सोच जब उखड़ी …. तब मानवता लूट अत्याचार गरीबी अपराध आतंक बीमारी में फंसी !….दुनिया एक परिवार है ,….सब कुछ न कुछ लेते देते हैं ,…”………….एक मूरख ने पंचाधीश का समर्थन किया तो मरियल बाबा बोले .

“..कुछौ लेनदेन न चले लेकिन हम प्यार से मिलकर रहैं …सब साथै उन्नति करें …यहै धर्म अध्यात्म है !…”

“..अरे पढ़ाई पर कुछ बोलो …..”……….एक महिला फिर उकताई तो एक और पंच बोले ..

“…पढ़ाई का धारा बदलनी होगी !…….पहले भाषाई गुलामी हटानी होगी !.. भारत में अंग्रेजी माध्यम स्कूल भयानक ठगी का धंधा है ….ई बंद होना चाहिए !……..सब शिक्षा परीक्षा भारतीय भाषा में होनी चाहिए !….”

पंच रुके तो सूत्रधार शुरू हुए …………..“…….देवभाषा संस्कृत सब भाषा की माँ है ,…सबको भरपूर इच्छा से पढनी चाहिए !…एकदिन पूरी दुनिया पढेगी !…..हिंदी सब बहनों को जोड़ेगी !……मराठी बंगाली गुजराती कन्नड़ मलयालम असमी सब भाषा में पढ़ाई होना चाहिए ,….माँ बोली में पढ़ाई से बुद्धि का विकास होता है ,…..विदेशी भाषा में रट्टू तोता मानो !…पालतू तोता उड़ना का जाने !….”

पंच ने फिर बारी लगाई …………“…….सरल समझ खातिर सब भाषा की सहायता लेनी चाहिए !.. तकनीकी शब्दों खातिर किताब में सार्थक अर्थ होना चाहिए !..”

खिचड़ी दाढ़ी वाला मूरख बोला …………“…..सही कहते हो भैय्या !…..अंग्रेजी का साजिशी चलन हटाना होगा ! …. विदेशी भाषा शौकिया विषय जैसा पढ़ा जाय !……..आठवीं तक बच्चों को मूल विद्या मिले !……पहचान शब्द व्याकरण के साथ सब विषय का मूल पढ़ें ,…..साथ में मानवता राष्ट्रीयता पढ़ानी सिखानी चाहिए !….राष्ट्र गौरव गाथाएं पढ़ानी चाहिए ,…..योग सबसे जरूरी विषय होना चाहिए !…..खेलकूद लेखन संगीत कला बढ़ाना चाहिए !…….”

“…धर्म अध्यात्म भी पढ़ाना चाहिए !….”…………एक और सवाली मत आया तो पंच बोले

“…बिलकुल पढ़ाना चाहिए !…..धर्म अध्यात्म पढ़ने से ज्यादा समझने अपनाने का चीज है !…समझें तो एक लाइन में है ….चाहे जनम गुजारकर मूरख बने रहें !……..योग से मानवता विकसित होती है !………गुरु शिक्षक माता पिता आध्यात्मिक सच्चे होंगे तो बच्चे जरूर समझेंगे अपनाएंगे !…..गीता रामायण का शिक्षा पाठ्यक्रम में होना चाहिए ,……पूर्ण मानवता राष्ट्रीयता ही अध्यात्म है !… सच्चे सुख की गारंटी है !…”

एक महिला बोली …………“..महतारी बाप अनपढ़ गंवार हैं तो हुशियार बच्चा उनको भी सिखा सकता है !……बच्चन का सच्ची जिद बड़ों को सुधार सकती है !…”

“..सही कहा भौजी !…..बच्चों में बड़ी ताकत होती है ,….आगे बताओ !..”…………एक युवा ने समर्थन के साथ चर्चा को धकेला तो सूत्रधार का मत फिर आया

“..फिर बारहवीं तक सब विषयों का ऊंचा मध्य ज्ञान मिले !……गुरुकुल में नयी पीढ़ी का सर्वांगी विकास होना चाहिए ,….. ज्ञानदान के साथ अध्यात्म कर्मठता वीरता भरनी चाहिए !……..बाकी हम मूरख का जानें ,…हमारे शिक्षाविद मिलबैठ कर बढ़िया पाठ्यक्रम बना लेंगे !…ऊ हमारी शिक्षा को उन्नति का औजार बना देंगे !..”

………..“..उन्नति का औजार तो आजौ है ,..लेकिन उन्नति से सौ गुना गिराती है ,…बीमार नशेड़ी अपराधी बनाती है ……अर्थ गरीबी में नकली कमी आई है ,….बाकी गरीबी से सब बेहाल हैं ,..”…………एक प्रतिवादी ने फिर ब्रेक लगाई तो दूसरा भी भड़का .

“…बाकी का हाल टमाटर आलू प्याज से पूंछो ! ……..नख से चोटी तक महाभ्रष्ट लूटराज देखो !..अस्पतालों में लुटकर मरती इंसानियत देखो !…अपराध अन्याय अत्याचार का बोलबाला देखो !……चहुंओर अन्धकार में भटकती मानवता देखो !..”

…………“..शैतान अंग्रेजन के टाईमौ इतना गिरा हाल न होगा !….तब हम चरित्रवान थे ,…. उन्होंने आपस में लड़ाकर गिराया … मारा ..लूटा !…..दलाल लुटेरों का लड़ाकर मारने का पिलान है !….”……….एक और अग्निवाण निकला तो फिर आग फैली .

“..दिखावटी तरक्की .. विनाशक विकास ..खैरात तुष्टीकरण का आड़ में हमको बहुत लूटा नोचा गया ,……मानवता को बेदर्दी से बांटा काटा गया …..अंग्रेजी गुलामों का छलावा बहुत मंहगा दर्दनाक पड़ा !.. असल में हम सब मालामाल हैं………हमारा माल गद्दार मानवद्रोहियों की भयानक तिजोरियों में दबा है !…”

बुद्धिजीवी टाइप ने पानी डालने का असफल प्रयास किया …………“…….अंग्रेजी व्यवस्था के विदेशी कर्णधार नजरबंदी खातिर कुछ खुलासे कर सकते हैं !…….लेकिन फंसेगा वही जो बेकार फ़ालतू होगा !…लूटतंत्र में गांधियों की गद्दारी दबी रहेगी !..”

“..फिर सोनिया गाँधी की खरबों नम्बरी दौलत खुली है ….. मुंह किसी का नहीं खुला !…..कौनो अमरीकी वेबसाईट ने सफ़ेद सफ़ेद सवा खरब बताया है ,…ईसे सैकड़ों गुना काली काली होगी ….गाँधी और उनके पालतू खानदानों के कब्जे में हमारा सब धन है …किसी कांग्रेसी को चवन्नी शरम नहीं आई !…”………..आग बढ़ी तो बुजुर्ग गुस्सैल मुस्कान से बोले .

“..फ़ालतू बात फिर न फेंटो …उनको काहे की शरम ,…पूरी चमड़ी उतरेगी तो माल निकलेगा ……फिर अगले मंगलयान से सबको भेज देंगे !…. तुम शिक्षा का बताओ !..”……………क्रमशः

( मानवता के महान दूत श्री नेल्सन मंडेलाजी की जीवन यात्रा पूरी होने पर मूरख पंचायत हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करती है !…..मूरखों को विश्वास है कि आप परमपिता परमात्मा से मिलकर शीघ्र ही अपना शेष कार्य करने पुनः धरा पर आयेंगे )

वन्देमातरम !

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

December 7, 2013

आदरणीय…………………. सच इसके अलावा यह भी है कि हम इसी लायक थे……………..और इसी लायक है

    Santosh Kumar के द्वारा
    December 9, 2013

    आदरणीय अनिल जी ,..सादर प्रणाम सटीक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार ,…हैं और थे के बीच जीवन मृत्यु का सफर भी तो लगता है !….सुखद सार्थक सफर के लिए हार्दिक शुभकामनाएं …..सादर अभिनन्दन वन्देमातरम !


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