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मूरख पंचायत ,...आम खजाना -१

Posted On: 30 Nov, 2013 Others में

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गतांक से आगे …..

चिट्ठी के बाद मूरखों में खुसरपुसर होने लगी ……

“… खजाना वाली खुदाई में का निकला भैय्या !…..”……….एक महिला ने नया प्रश्न उठाया तो बुजुर्ग भड़के

“..निकलना का है … सत्ता कुटिलनीति से गिद्धदृष्टि गड़ाए है !…..लूटतंत्र सब लूटने की फिराक में है !…नजरबंदी खातिर खुदाई बंद कर दिया ….”

बुद्धिजीवी टाइप मूरख बोला ………..“…..डाकू सरकार सब किला खंडहर खुदवाने के पिलान में है !…….मैटल डिटेक्टर से जांच पड़ताल के बाद खोदना शुरू किया था ……….मशीन झूठ न बोलती !…. सौ दोसौ मीटर गहरे की खबर ऊपरे मिल जाती है !….

“..अब समझे ,….मामला रफादफा करके चोरी से खोदेंगे ,…. जेसीबी लगाकर दो घंटे में लाद ले जायेंगे !…..लुटेरे नेता और मालामाल ,…..सोने की चिड़िया फिर कंगाल !..”……………….एक युवती बोली तो मरियल बाबा चश्मा पकड़ शुरू हुए .

“..लुटेरों का आदि इतिहास लूट है बिटिया !…….एकबार राजस्थान में खजाना निकला था ,….. खोदबीन के बाद कांग्रेसी सत्ता ने अफवाह बताया ,………फिर ट्रकों में लाद ले गए !…तमाम गंवई आँखें मूरख बन गयी ,….लुटेरे मालामाल हो गए !… जनता को अफवाहे लगी ..”

एक मूरख जोर से बोला ………..“……तपसी संत महात्मा बिलकुल सच्ची बात कहे हैं….किले में खजाना जरूर है !..हजार तन नहीं तो हजार किलो होगा ,…..हमारा भारत सनातन सोने की चिड़िया है …. भारत भूमि का कण कण खजाना है ,…किले में खजाना अचरज नहीं हमारी सच्चाई है ,……..लुटेरों से पहले हमारा हर घर खजाना था ,…हमारे घर महल मंदिर सब सोने चांदी से लबालब थे !…..ई पक्के से पक्का सच है !….”

“…संत महात्मा केवल सच कहता है भैय्या …..लेकिन ..हिन्दुस्तान में सच दबाने खातिर तमाम मशीनें जेसीबी कम्पूटर छापेखाने कैमरा चलते हैं !…”……………एक महिला का मत आया तो दूसरी बोली

“…तपसी संत महात्माओं को शैतान हमेशा तंग करते हैं !…..शैतान लोग कांची के शंकराचार्य को कितना परेशान किये ,…स्वामीजी को मिटाने खातिर तमाम साजिश चलती है !…”

बीच से एक मूरख खड़ा हुआ …….“…….शोभन सरकार दो घंटा में खजाना निकालने को कहे थे ,……..नाकामयाबी पर हर सजा मंजूर करी थी ,…. फिरौ सरकारी चालबाजी उलझा गयी !…….पक्का डाकू लोग खजाना तीन तेरह करने का जुगाड़ है !……”

“…. बुनियादी शैतान ठग झूठा पाखंडी बताकर हंसी उड़ाये ,… गिराने की सब जुगत भिड़ाए !……..चमचा पार्टी जुटी है ,….टीवी अखबार वाले जी जान लगाये हैं !…..भारत को बरगलाने के तमाम जुगाड़ हैं !…”……….पीछे से कही बात पर एक बुजुर्ग बोले .

“… बरगलाने में अंग्रेजी पिट्ठुओ को सवा सौ साला महारत है !…….भ्रष्ट इंदिरा ने राजसी संपति को राष्ट्रीय बनाया ,..माल के साथ भरपूर वाहवाही और देश लूटा !…..वही खजाना महाभ्रष्ट सोनिया मेम ने विदेशी सड़कों पर नीलाम किया …….इंदिरा राज में रोज चार बक्सा हीरा सोना जवाहरात इटली उड़ता था ,.. अत्याचारी सासराज में रोकने जांचने बोलने की औकात किसकी होगी !……..”

एक युवा बोला …………“..काहे कोई राजदल ई बात नही किया !…..कोई दल कालेधन पर ढंग से मुंह नहीं खोला …. आज की गुलाम कामयाबी सच कहने की ताकत नही देती !…”

हरी साड़ी वाली महिला बोली ………“…काहे से कि सब मिले हैं !…..राजदल सच कहते करते तो मानवसेवी सन्यासी लूटतंत्र के खिलाफ मोर्चा काहे खोलता ..”

एक पंच ने मुंह खोला ………..“..स्वामीजी को केवल सन्यासी कहना मूरखता है बहू !……आसमानी बुलंदी वाला जमीन से जमा राष्ट्रऋषि कहो !…..स्वामीजी स्वर्णिम नवभारत के जनक हैं ,……भारतीयता के सच्चे पिता हैं ,…उनका रास्ता पलायनी मौज नही .. मानवता खातिर कठिन तपस्या है !……..उनका मानवता से गहरा प्रेम है …हमारी खातिर अथाह दर्द है ,… ऊ महान पुरुषार्थी फकीर हमारी खातिर पैदा हुआ है ,…!..”

पीछे बैठे बुजुर्ग ने टोका ………..“..भारत पिता के पुत्रों का धरम भी है !……”

“..सब धरम अपनाएंगे बाबा ….यहै उत्थानपथ है !…..”………पंच ने विश्वास से उत्तर दिया तो बुजुर्ग फिर बोले ..

.… देश भयानक अराजकता में डूबा है ,…समस्या गिनाना मूरखता है ….”

“…….चोर सरकार मुसीबत गणना विभाग बना देगी ,……पालतू डाकू मंत्री बनकर हमारा निवाला छीनेगा …..”…….एक युवा ने तंज किया तो दूसरा भड़का

..काहे बैक फायर करते हो !…….. समस्या गिनाओ !…..”

“..अहमक हो का यार !..का गिनाओगे …”………….. युवा पहले तमका फिर मध्यम स्वर में बोला

“….कहाँ का समस्या नहीं है भैय्या !……हम मुसीबतों के अम्बार में बस जिन्दा हैं !…… देश पूरी गुलामी के कगार पर है ,…..खंडित देश के तमाम खंड करने की साजिशें हैं !….. पूंजीवादी इंटरनेशनल लुटेरे सबकुछ लूटने पर आमादा हैं ,…..लालची जुल्म अत्याचार अपराध भरी साजिशों से इंसान जीव कुदरत सब कराहते है ,….. अन्न तक गुलाम जहरीला है ,…सब बीमार हैं ….विदेशी दलालों का राज रहा तो खेत आँगन बिस्तरौ गुलाम होगा !…..”

मरियल बुजुर्ग फिर बोले ……..“….सबकुछ गुलामै है लल्ला ,… हमारे मन माथे पर गुलामी जहर वाली चाकलेट रगडी गयी ,….मैकाली साजिशों से हमारी सोच भोगी गुलाम बनायी गयी ……लुटेरे राक्षस पालतू मुर्गा की तरह दाने डालकर मानवता खाते हैं !……मोटी गुलामी में हम धीरे से चिल्लाते हैं .”

एक पंच बोले ………..“..मोटी गुलामी मिटाने का समय है काका !….. लुटेरी सत्ता हमेशा अपने महापाप दबाती है ,…. बहुतै सफेदपोश मक्कारी से साजिश होती है ,…दुनिया का बाप बना शैतान लालची गिरोह भारत हड़पना चाहता है ,…ई चंद लोग हैं ,..लेकिन इनके क्रूर साजिशी इशारों पर दुनिया गिरते पड़ते चलती है ,…… ईस्ट इण्डिया कंपनी के सिपहसालारों ने भारत का सब खजाना लूटकर कंगाल किया है ,….गांधियों की गद्दारी देश पर बहुत भारी पड़ी !..”

वृद्धा माई बोली …………“..हम भगवान से विनती ही करेंगे .. गद्दारों के हाथ खजाना न लगे !…………लुटेरों के हाथ एक तोला न जाना चाहिए !…..मालामाल देश की सब दौलत राष्ट्रभक्तों के पवित्र हाथ आये !…..हम अपना कालाधन भी लायेंगे !….. गिरे राष्ट्र का सुन्दर नवा निर्माण होगा ..”

“…माने आजके सब दल चोर डाकू हैं !…..”…………डंडा टेके खड़े मूरख ने उबासी मारी तो महिला बोली………………..क्रमशः

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