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मूरखमंच…….गद्दारों का काम तमाम, जाग उठा है हिन्दुस्तान !!

आदरणीय मित्रों ,बहनों एवं गुरुजनों ,.सादर प्रणाम ………सबसे बड़े लोकतंत्र के मुंह पर काली स्याही देखकर देश की तरह मूरखमंच पर भी लावा फूट रहा है ,…तो आइये बिना समय गंवाए सीधा चलते हैं मंच पर ….
………………………………………………………………………………………………………………………
ठण्ड का रौद्र रूप जारी है ,..गरीबों के पास आग के अलावा और कोई साधन नहीं है ,..रोजमर्रा का जीवन इसीके इर्दगिर्द चलता है …..मूरखमंच भी आग के चारों तरफ जमा है ,…
अखबार घूमफिर कर एक जगह टिक गए हैं ,…एक अजीब सी कसमसाहट सबके चेहरों पर नजर आ रही है ,…

“..काका ,.आखिर ई लोग का चाहते हैं ?…. बार बार बाबा को काहे जलील करते हैं ?…”………..रहमान भाई ने मौन तोडा ..
“..अरे डर गए हैं सब ! ,..इन गद्दारन की चाहत है कि, चाहे देश लुटता रहे !..गरीब मरता रहे !…गाँव बर्बाद होता रहे ….लेकिन ये मौज के साथ खाते पचाते हुए ऐश करते रहें !!…कोई आवाज न उठाये,…ऊ का कहते हैं,… इनके रंग में भंग ना पड़े बस! ..देश तो है ही कूड़ेदान में !..”…..कहकर आसरे काका ने आग को फूंक मार और तेज किया .
“..अरे बेपरवाह रहो सबलोग !..इनकी कमीनी हरकतों से कुछ नहीं बिगड़ेगा !…बाबा की निगाह केवल मंजिल पर है ,…इनके पापो का घड़ा लबालब भर चुका है,..बस फूटना बाकी है !…अब देश को रोकने की ताकत कौनो माई के लाल में नहीं है !..”……..नन्हे ने जोश में खड़े होते हुए हुंकार भरी .
“..ऐसा है रहमान भाई ,..जब कौनो जोर नहीं चला तो हिन्दू मुसलमान का पत्ता फेंका है ,..का पता आखिरी दांव लग जाय !!..” ……..चंद्रिका की बात से पहली बार सब लोग सहमत दिखे .
“..चंदिरका उनका दांव अब सपना ही रहेगा !.. का मुसलमानों के पास दिमाग नहीं है ?…अब हमको तोते की तरह नहीं रटा सकते हैं,…कब तक हमको डरा-धमका कर अपना उल्लू सीधा कर सकते हैं ,….नयी पीढ़ी बहुतै होशियार है !….सबको ठीक से तालीम मिलती तो हम काहे पीछे रहते ?..”…….रहमान भाई ने एक प्रश्न के साथ चन्द्रिका को निपटाया ..
“…अरे दिया भी बुझने से पहले फडफडाता है ,..भाई लोग बेचैन होंगे कि एक सन्यासी ने देश को कैसे जगा दिया !!…अब अंग्रेजन की मानस औलादों को एक जहाज बुक करके उड़ जाना चाहिए, इसी में उनकी भलाई है !!..”…….भीखू चाचा ने जेब से खैनी निकलते हुए ताल ठोंकी .
“…सही कह रहे हो चाचा !….बेचैनी में इंसान पगला जाता है ,..देखो बेचारों ने का का नहीं किया !,..पहले बाबा को ख़तम करने का इंतजाम किया था !..लेकिन भविष्य को कौन मार सका है !….उधर अन्नाजी ठहरे सीधे सादे आदमी, उनको तो मजे में निपटा दिया,.. अखबार और टेलीविजन सब कब्जे में किया,.लेकिन देश फ़िरौ खड़ा हो गया …ऊ तो अच्छा है कि दिल्ली में दवाई पानी आराम से मिलती है ,..गाँव में होते तो अबतक ससुरों को नीम के पेड़ से बांधना पड़ता !..”……..पुल्लू की शातिर मासूमियत पर सब ठहाका लगाकर हंस पड़े..
“……खानदानी लुटेरन से देश की रक्षा और वसूली के लिए सब देशभगत एकसाथ खड़े हैं,. तो चोर लोग जबरदस्ती मुसकाय के फोटो कैसे खिंचवाते हैं ?..”……..मिलन ने एक अखबारी फोटो को इशारा करते हुए पूछा .
“……तकलीफ में हँसना बड़ी मेहनत का काम है, और एक कला है ,..ऊ काम पागलन के अलावा केवल खाऊ नेता और वेश्या ही कर सकते हैं…”…………नन्हे के तडके से सब फिर से हंसने लगे .
“…..देखो भाई !….बाबा जी ने सोते और लुटते देश को जगाया है ….. अब हमारी गरीबी मिटेगी और देश का गौरव बढेगा ,…. सब लोगों को बिना कुछ सोचे विचारे पूरी ताकत से आन्दोलन में कूदकर ई महायज्ञ में अपनी आहुति डालनी चाहिए,..नहीं तो कल को रोयेंगे कि देश के बदलाव में हम फिसड्डी रह गए !. …ई चर्चा-वर्चा से हमको कुछ नहीं मिलेगा ,..हमने अन्नाजी को भी चिट्ठी लिखी थी ,..बिना भेजे हम जानते हैं कि वो हमारे साथ हैं ,..उनको फिर से हमारा राम राम ,..अब हम सब लोग एकजुट होकर अहंकार में अंधे लुटेरों को उनकी औकात दिखायेंगे !..”………हमेशा की तरह आसरे काका बात पूरी करते करते तैश में आ गए ..
“…..अब आएगा मजा !..जब होगा ता ता थैय्या !….समय आ गया है कि तानाशाहों को मिटटी में मिलाकर हम अपना भी नाम रोशन करेंगे !,..अपने बच्चों को स्वाभिमान की कहानी सुनायेंगे !….कुछ फारम-वारम भरना होगा का ?…”………उत्साह से लबरेज चन्द्रिका ने अपने बच्चों का भी मानसिक दर्शन कर लिया .
“..ई चंदिरका कभी नहीं सुधरेगा !…..लुगाई का कहीं अता-पता नहीं !…बच्चों को कहानी सुनाने लगा है ,..!!…”……….पुल्लू ने चन्द्रिका की पीठ पर धौल जमाते हुए व्यंग्य किया . .
“..चाचा अब तुम भी खड़े हो जाओ !…बहुत टाइम हो गया है ,.जाकर चारा -पानी भी करना है !..”…………मिलन ने हाथ से ईशारा करते हुए भीखू चाचा से कहा ,…तो भीखू चाचा भी मुस्कराने लगे और फटाफट भाषण की मुद्रा में आ गए ,..
.“…भाईओं देश के स्वाभिमान की लड़ाई हम सबकी है ,..पानी हमारे सिर के ऊपर से गुजर रहा है ,..अगर अब चूके तो चुके ही समझो !…समय आ गया है कि हम पूरी तरह से इन खानदानी हुक्मरानों और अंग्रेजों की मानस औलादों को उखाड़ फेंकें ! ,..तभी हमारे हजारों लाखों शहीदों की आत्मा को भी चैन मिलेगा !…. हम सब इस लड़ाई में बाबा के पीछे खड़े हैं और इस देश के शाही लुटेरों को सबक सिखाकर ही दम लेंगे ,… हमारे नौजवानों में वो ताकत है जिससे हम हिंदुस्तान की तस्वीर बदल देंगे !………..है कि नहीं !!!…”….भीखू चाचा जोर से दहाड़े !!....प्रतिउत्तर में दुगुने जोश से सबने मुट्ठी लहराकर हुंकार भरी ,….
रहमान भाई ने नारा लगाया ,.”जाग उठा है हिन्दुस्तान !…” सब एक स्वर में जोश से गरजे … “..गद्दारों का काम तमाम !”….अलाव की आग ठंडी हो रही थी लेकिन दिलों में भरा लावा उफान मारने लगा .
भीखू चाचा अभी भी भाषण की मुद्रा छोड़ने को तैयार नहीं हुए ,..बोले …”….याद रखो सब लोग !..हमारी गरीबी और लाचारी के जिम्मेदार यही लोग हैं ,..जितना पैसा विदेशों में जमा किया है अगर वो हमारे काम आता तो हमें हरकदम पर अपना सम्मान नहीं खोना पड़ता ,….अब इनसे पूरा हिसाब चुकता करने का मौका मिला है,.. किसी को भी चूकना नहीं है ,..सब लोग पूरा तैयार रहो ! ,..जब, जहाँ ,जैसे मौका मिले इन आदमखोरों को दिखा दो भारतमाता के लालों की असीम ताकत !…” ..
“..हम तैयार हैं !!..”….फिर से सबने मुट्ठी हवा में लहराई ..
पुल्लू गरजा ,.”बोलो,.. भारत माता की जय !..”…..सब जोश में आनंदित होकर नारे लगाने लगे !…वन्देमातरम !,.भारत माता की जय ! के नारों से गाँव का आसमान गूँज उठा ,..यह गूँज फैलती गयी,.. और फैलती ही गयी,…..वन्देमातरम

संतोष कुमार

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55 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अलीन के द्वारा
February 2, 2012

संतोष कुमार जी, नमस्कार!
भावनाओं और पीड़ा को शब्दों में व्यक्त करना कोई आपसे सीखे…
बहुत खूब…

    Santosh Kumar के द्वारा
    February 2, 2012

    अलीन जी ,.सादर नमस्कार
    आपके प्रोत्साहन भरे उद्गारों के लिए बहुत आभारी हूँ .

January 25, 2012

प्रिय संतोष भाई !
काश ऐसा जयघोष भारत के कोने कोने में देखने-सुनने को मिले !!
जय हिन्द जय भारत !!
:)

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 26, 2012

    प्रिय संदीप जी ,.नमस्कार
    अवश्य ही यह जयघोष भारत के कोने कोने में सुनाई पड़ेगा !
    जय हिंद ,.जय भारत !

viplavimayank के द्वारा
January 24, 2012

मूरख मंच जिंदाबाद…सारे ठलुवे मुर्दाबाद…बोलो भई सब संतन की जय|
समय आ गया है कि हम पूरी तरह से इन खानदानी हुक्मरानों और अंग्रेजों की मानस औलादों को उखाड़ फेंकें ! ,..तभी हमारे हजारों लाखों शहीदों की आत्मा को भी चैन मिलेगा !…. हम सब इस लड़ाई में बाबा के पीछे खड़े हैं और इस देश के शाही लुटेरों को सबक सिखाकर ही दम लेंगे|…निःसंदेह ….वन्देमातरम|

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 26, 2012

    भाई जी ,.प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार
    वन्देमातरम !

dineshaastik के द्वारा
January 23, 2012

संतोष जी आपका व्यांगिग प्रयास बहुत ही सराहनीय है किन्तु 
इन अपराधिक नेताओं से जनता नहीं जीत सकती। जब तक
यह जाति प्रथा का जहर एवं धर्म की शराब से हमें मुक्ति न
मिल जाए।
लगे रहो कभी न कभी तो हम कामयाब होंगे।
आपकी रचना पढ़कर सचमुच तनाव मुक्त हो जाता हूँ, इसके लिये
आपका आभार।
कृपया इसे भी पढ़ें–
“क्या यही गणतंत्र है”
http://dineshaastik.jagranjunction.com/

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 23, 2012

    दिनेश जी ,.आपकी सराहना के लिए बहुत आभार ,..किसने सोचा था कि सर्वशक्ति संपन्न रावण की सेना से वानर भालू जीतेंगे !..या फिर पांच पांडव समस्त कुरुवंश का सर्वनाश कर देंगे !….हमें कामयाब होना ही होगा !!..
    प्रोत्साहन के लिए पुनः आभार

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
January 23, 2012

मूरख मंच की एक और शानदार प्रस्तुति.

बधाई! संतोष जी.

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 23, 2012

    आदरणीय राजीव जी ,.आपके प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार

sinsera के द्वारा
January 21, 2012

संतोष जी, नमस्कार,
नाम मूरखमंच और बातें इतनी गंभीर..
ज्यों बिहारी की सतसई, ज्यों नाविक के तीर..
नुक्कड़ नाटक का आनंद आ गया..

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 23, 2012

    सरिता जी ,.सादर नमस्कार
    मूरखों की बातें कभी कभी गंभीर लगने ही लगती हैं ,..हा हा
    आपको आनंद आया जानकार बहुत ख़ुशी हुई ,..सदैव प्रोत्साहन की कामना है ,..बहुत बहुत आभार

manoranjanthakur के द्वारा
January 21, 2012

चरित्र काल पात्र
पठकथा निर्देशन
सब ए वन

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 23, 2012

    आदरणीय मनोरंजन जी ,..प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार

rahulpriyadarshi के द्वारा
January 20, 2012

मैं भी आपके मूरख मंच के साथ इस लड़ाई में बाबा के पीछे खड़ा हु,इसलिए नहीं कि वो सन्यासी हैं,बल्कि इसलिए कि जो भी कर रहे हैं देश के भले के लिए कर रहे हैं,आप इसी तरह अपने मंच के जरिये नपुंसकों को निशाना बनाते रहिये,इनका सर कुचलना बहुत जरुरी हो गया है….भारत माता की जय.

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 20, 2012

    राहुल जी ,.नमस्कार
    आपने बहुत ही अच्छी बात कही है ,..हमें बाबा के काम ,उद्देश्य और मुद्दों को समझकर उनके पीछे खड़ा होना चाहिए ,…तभी देश का भला होगा ,….हिन्दुस्तान में ऐसे लोगों की कोई कमी नहीं जिन्हें गेरुए वस्त्रों से ही एलर्जी है ,..बाकी कुछ समझ पाना उनके वश में है ही नहीं ,..
    आपके प्रोत्साहन के लिए ह्रदय से आभार आपका

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 20, 2012

    भारत माता की जय !..वन्देमातरम !

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    January 26, 2012

    स्वामी रामदेव एक स्वच्छ और समृद्ध भारत चाहते हैं,उनके प्रति पूर्वाग्रह से ग्रसित लोग घृणित मानसिकता वाले व्यक्ति हैं,हमें पूर्वाग्रहों से दूर रहते हुए उनके पुनीत आन्दोलन में अपना सहयोग अवश्य करना चाहिए,वन्दे मातरम :)

    Santosh Kumar के द्वारा
    February 2, 2012

    निःसंदेह राहुल जी ,.हम सबको बाबा रामदेव जी का सहयोग करना ही चाहिए ,..वंदेमातरम .

akraktale के द्वारा
January 19, 2012

संतोष भाई जी नमस्कार,
आपका मंच तो सदा से ही जाग्रत रहा है. आवश्यकता इस जाग्रति को देश के अन्य भागों में पहुंचाने की है. बहुत सार्थक लेख बधाई.

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 20, 2012

    आदरणीय भाई जी ,.सादर नमस्कार
    देश जाग्रति आ रही है और पूरी अवश्य आएगी ,…बहुत बहुत आभार आपका

nishamittal के द्वारा
January 19, 2012

व्यंग्य की कटीली धार आपके आलेख में अच्छी लगी संतोष जी,आशावादी बने रहिये सब कुछ उत्तम ही होगा.

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    आदरणीय निशाजी ,.सादर प्रणाम
    रचना आपको अच्छी लगी इसके लिए बहुत आभारी हूँ ,…आशावाद ही जीवन है ..

Gagan के द्वारा
January 19, 2012

संतोष भाई जी
नमस्कार,
भगवन ने चाहा तो पाँच राज्यों के चोनाव मे ही इनको इनकी औकोत समझ मे आ जायगी |
ठण्ड मे एकदम गरमा गरम व्यंग के लिय बधाई |

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    गगन जी ,.सादर नमस्ते
    बिलकुल ऐसा ही होगा,. ,..इनकी अकल ठिकाने लगाना ही होगा ,..लोकतंत्र में जनता ही भगवान होती है ,..आपकी सराहना के लिए बहुत बहुत आभार

yogi sarswat के द्वारा
January 19, 2012

संतोष जी ! आपका बात को कहने का ढंग, आपकी शैल्ली , और आपकी रचना के चरित्र हमेशा आकर्षित करते हैं ! अगर आपने कभी के . पी. सक्सेना .जी को अगर पढ़ा हो तो आप दोनों की लिखना का तरीका बहुत कुछ एक जैसा है , वो भी बहुत सुन्दर लिखते हैं और आपके तो कहने ही क्या !
मेरी बधाई स्वीकार करें !

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    योगी जी ,.नमस्कार
    आपकी सराहना के लिए बहुत आभारी हूँ ,…के पी सक्सेना जी को बहुत पहले पढ़ा है मैंने ,..बहुत बहुत आभार आपका

mparveen के द्वारा
January 19, 2012

संतोष जी नमस्कार,
आपका आलेख कल ही पढ़ लिया था लेकिन किसी कारणवश उस समय प्रतिकिर्या नहीं कर पाई . अब चुनाव आ गए हैं तो इन नेताओं को जनता नजर आने लगी . फिर से वादों का दौर शुरू हो गया .लेकिन अब जवाब देने का समय है जनता का देखो क्या फैसला होगा ??
अपने जो कहा में उससे पूरी तरह सहमत हु :- याद रखो सब लोग !..हमारी गरीबी और लाचारी के जिम्मेदार यही लोग हैं ,..जितना पैसा विदेशों में जमा किया है अगर वो हमारे काम आता तो हमें हरकदम पर अपना सम्मान नहीं खोना पड़ता ,….अब इनसे पूरा हिसाब चुकता करने का मौका मिला है,.. किसी को भी चूकना नहीं है ,..सब लोग पूरा तैयार रहो ! ,..जब, जहाँ ,जैसे मौका मिले इन आदमखोरों को दिखा दो भारतमाता के लालों की असीम ताकत !…” ..
जय हिंद !!!

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    परवीन जी ,.सादर नमस्कार
    नेताओं के लिए जनता का मतलब ही चुनाव हो गया है ,..आपके समर्थन के लिए बहुत आभारी हूँ ..
    वन्दे मातरम

abodhbaalak के द्वारा
January 19, 2012

गुरु भाई
मेरी दुआ है की हिंदुस्तान सच में जाग उठे, हालांकि ………..
पर अच्छा सोचना और उसके लिए दुआ करना ज़रूरी है.
सदा की तरह सुन्दर ……….
http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    गुरुभाई ,.आपके प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार

vinitashukla के द्वारा
January 19, 2012

“तकलीफ में हँसना बड़ी मेहनत का काम है, और एक कला है,….ऊ काम पागलन के अलावा केवल खाऊ नेता और वेश्या ही कर सकते हैं” व्यंग्य की धार बहुत ही तीव्र और सटीक है. अच्छी पोस्ट पर बधाई संतोष जी.

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    आदरणीय विनीता जी ,..सादर प्रणाम और कोटि कोटि आभार आपका

shashibhushan1959 के द्वारा
January 19, 2012

आदरणीय संतोष जी,
सादर !
“आज नहीं तो कल होगा सारे चोरों का कम तमाम !
जय रघुनन्दन – जय सियाराम !
.
दोगली बात करें ये सारे, भूल गए अपने ही वादे !
शहंशाह बनकर इतरायें, कलतक थे मामूली प्यादे !
लम्पट हैं ये शातिर बगुले, हाथ छुरी है मुंह में राम !
जय रघुनन्दन – जय सियाराम !
.
लोकतंत्र का मंदिर बन गया, चोर लुटेरों का अड्डा !
कब्र उसी में बननेवाली, खोद रहे हैं जो खड्डा !
माथा भन्नायेगा ऐसा काम न आये झंडू बाम !
जय रघुनन्दन – जय सियाराम !

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    आदरणीय शशिभूषण जी ,.सादर अभिवादन
    जबरदस्त ,..धुंवाधार प्रतिक्रिया को नमन …..जय रघुनन्दन -जय सियाराम

anandpravin के द्वारा
January 18, 2012

संतोष भाई की जय हो,
आपने अपने ब्लॉग द्वारा तमन्ना जी के प्रश्नों का बिलकुल सटीक उत्तर दिया है,
ये अलग बात है की यदि वो समझना चाहें तो
पर मैं भी इसमें एक बात कहना चाहूंगा जो मेरा निजी मत है की,
रामदेव बाबा को इतना भी आगे करने की जरुरत नहीं थी सवाल है की लोकतंत्र में स्याही फेंकना या ना फेकना उतना बरा मुद्दा नहीं हो सकता जितना की ये मुद्दा होना चाहिए की बाबा का आन्दोलन किस दिशा में जा रहा है,
और शायद रामदेव बाबा के उटपटांग बयानों के कारण भी कुछ लोग उन्हें सही से नहीं ले पा रहें है, ख़ास कर उन्होंने जो अरविन्द केजरीवाल और अन्ना के बारे में बोला था ऐसे में किसी को चरित्र प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता I
मेरे कहने का मतलब अगर आप समझ सकें तो ये है की आप एक कुशल लेखक है इसमें कोई शक नहीं किन्तु
इस मुद्दे पर आप ज्यादा ही पछ ले रहें है ऐसा सिर्फ मेरा सोच हो सकता है इसके लिए माफ़ी चाहूंगा पर आप
इसपर सोचियेगा धन्यवाद

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    आनंदप्रवीण जी,नमस्कार
    बहुत आभारी हूँ आपका की आपने अपनी असहमति व्यक्त की ,..मैंने यह लेख तमन्ना जी के प्रतिउत्तर में नहीं लिखा है ..उनको जबाब उनके ब्लॉग पर आपने और मैंने भी दे दिया है ,..
    दरअसल मेरी सोच का दायरा बहुत छोटा है ,.शायद कुँए के मेंढक जितना!..मैं बाबा और अन्ना को एक ही कुँए में देख रहा हूँ तो निश्चित ही पक्षपाती हूँ ,..
    सत्ताधीश खड़े होकर रोती जनता को पैजामा नीचे कर के दिखा रहे है ,.हमारी यह जिम्मेदारी होनी चाहिए की इस बात का ध्यान रखें की किसने सीटी बजाई थी और किसने ताली मारी थी ,..और जब इसने सीटी बजाई थी तो उसने ताली क्यों नहीं बजाई थी ?…लेकिन इससे चरित्र प्रमाणपत्र तो सत्ता को ही मिलेगा ?…
    मैं पहले दिन से अन्नाजी के आन्दोलन से जुड़ा हूँ ,..बाबा जी से अभी तक नहीं जुड पाया हूँ ,..लेकिन समझता हूँ की देश को दिशा देने में बाबा रामदेव ही सक्षम हैं ,..और मुझे व्यक्ति से ऊपर उठकर मुद्दों को समर्थन देना चाहिए ,..अन्नाजी का जन लोकपाल का मुद्दा बाबाजी के मुद्दों में समाहित है ,..
    कुंवा गोल होता है अतः मैं सबको बराबर ही देखता हूँ ,..मैं किसी की आलोचना नहीं कर रहा हूँ या करना चाहता हूँ ,,..आपसे निवेदन है कि समय मिले तो मेरे पुराने लेख अवश्य पढ़ें ,..हार्दिक आभार सहित

    anandpravin के द्वारा
    January 19, 2012

    संतोष भाई,
    सवाल कुंए का मेंढक होने या ना होने का नहीं है,
    यदि आपकी सोच छोटी है तो हमारी तो है ही नहीं
    मैंने बस आपनी बात रखी थी यदि आपको बुरा लगा हो तो माफ़ी चाहूँगा
    आप जैसे लोगों से माफ़ी मांगने में कोई शर्म नहीं
    उम्मीद है छोटा और वास्तविक मुर्ख जान कर माफ़ करेंगे

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 20, 2012

    आनंद जी ,.बुरा लगने वाली कोई बात ही नहीं है ,..आपने अपनी बात रखी उसका स्वागत है .. मुझे बहुत अच्छा लगा ,..और माफ़ी मांगकर आपने भाई को शर्मिंदा ही किया है ,….
    आन्दोलन का परिणाम तो भविष्य ही तय करेगा,..और दोनों ने (बाबा +अन्ना) सदैव एक दुसरे को समर्थन दिया है ,..अन्नाजी के आन्दोलन की आभासी सफलता(जो काल्पनिक ही रही) में बाबा का बहुत बड़ा योगदान है ,…मैं पूरी आशा करता हूँ की आप निश्चित ही सभी बातों को समझकर पूरी क्षमता से मूरख मंच के साथ बाबा रामदेव के पीछे खड़े होंगे ,.(हालांकि अभी भी हैं लेकिन कुछ शंकाओं के साथ ).हमें मात्र यह याद रखना है कि दुश्मनों को धूल चटानी ही है ,…भारत माता की जय !..वन्देमातरम

rajkamal के द्वारा
January 18, 2012

प्रिय संतोष भाई …… नमस्कारम !
आप की गाड़ी ने सही ट्रेक और सही रफ्तार पकड ली है ……
अब तो यह सुपरफास्ट एक्सप्रेस बन गई है
बस समय की मांग के अनुसार इसी प्रकार दौड़ाते रहिये
नहीं नहीं
उड़ाते रहिये
हा हा हा हा हा हा हा हा हा
मुबारकबाद सहित

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    आदरणीय गुरुदेव ,..सादर प्रणाम
    अनाड़ी ड्राइवर सुपरफास्ट चला रहा है ,…लेकिन दौड़ता तो रहेगा ही ….अनमोल प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार आपका

Pramod Kumar के द्वारा
January 18, 2012

veru good article congrasulation

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    धन्यवाद प्रमोद जी

alkargupta1 के द्वारा
January 18, 2012

संतोष जी , आज लोक हित की बात अधम प्रवृत्ति के लोगों को पचती ही नहीं है
तभी बाबा पर स्याही फेंकने का ऐसा घृणित कार्य किया गया जो बहुत ही निंदनीय
है एक न एक दिन इनका भी काम तमाम होगा ही…..मूरख मंच की चर्चा बहुत
ज़ोरदार रही…..भारत माता की जय ! वन्दे मातरम !

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    आदरणीय अलका जी ,.सादर प्रणाम
    अनमोल प्रोत्साहन के लिए बहुत बहुत आभार आपका ,..वन्देमातरम

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 18, 2012

आदरणीय संतोष जी. सादर अभिवादन
तुम्हारी नजर क्यूँ खफा होगी
मेरी ताजी रचना
एक बार फिर प्यार का मौसम आ गया
आप के स्नेह से क्यूँ दूर हो गई.
आप लिखते रहिये. हम पढ़ते रहेंगे

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी,.सादर नमन
    क्षमा चाहूँगा आपसे ,.समयाभाव के कारण आपकी रचना तक नहीं पहुँच पाया ,..नेट भी बहुत स्लो चलता है ,…आप मुझे पढ़ते हैं यह मेरा सौभाग्य है ,…हार्दिक आभार सहित

आर. एन. शाही के द्वारा
January 18, 2012

इनके पापो का घड़ा लबालब भर चुका है,..बस फूटना बाकी है !…अब देश को रोकने की ताकत कौनो माई के लाल में नहीं है !..”……..नन्हे ने जोश में खड़े होते हुए हुंकार भरी .
                        वाह संतोष जी ! अलाव जलाए रखिये । बधाई !

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    आदरणीय सर ,..बहुत बहुत आभार आपका ,.यह अलाव घर घर जलाना होगा ..

minujha के द्वारा
January 18, 2012

बाबा रामदेव के मुख पर स्याही फेकने का जो घृणित
काम किया गया है ,वो निंदनीय तो है पर ये भ्रष्टाचार
के खिलाफ छिङी जंग की आग में घी का काम करेगी
संतोष जी,जैसा मूरख मंच पर हुआ

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    आदरणीय मीनूजी ,.आपके समर्थन और प्रोत्साहन के लिए बहुत आभारी हूँ …आग तो बढ़ती ही जाएगी ,..पुनः आभार

allrounder के द्वारा
January 18, 2012

नमस्कार भाई संतोष जी, बाबा पर स्याही फेंका जाना सचमुच निंदनीय है, यदि कोई व्यक्ति इस देश मैं आम जन के हित की बात करता है तो उसके साथ ऐसा वर्ताव किया जाना सचमुच अलोकतांत्रिक है !

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    सचिन भाई जी ,.सादर नमस्कार
    आपके स्नेह भरे समर्थन के लिए बहुत आभारी हूँ ,..

    neeru के द्वारा
    January 19, 2012

    संतोष सर जी नमस्कार ,

    पहले तो आपको मेरी तरफ से मुबारकबाद, मैंने आपका अर्तिक्ल बड़े ध्यान से पड़ा सच अगर सारा देश एकजुट हो जाये तो क्या नहीं हो सकता
    (”जाग उठा है हिन्दुस्तान .गद्दारों का काम तमाम ,फिर तो सच मे ही काम तमाम समजो )
    well done keep it up
    जय हिंद
    नीरू

    Santosh Kumar के द्वारा
    January 19, 2012

    नीरू जी ,.आपने रचना पढी इसके लिए बहुत आभारी हूँ ,.आपको अच्छी लगी इसके लिए kai गुना jyada आभारी हूँ .




Hamar Desh

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