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Santosh Kumar


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उठो जवानों !

Posted On: 18 Feb, 2012  
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कविता जनरल डब्बा में

44 Comments

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

"जब से मन को ज्ञान मिला है, दिल को इक अरमान मिला है साँसे तो लेते ही सब है, पर लुटने का फरमान मिला है, कब तक देश को नोच खायेंगे, नेता रूपी शैतान मिला है, देश बड़ा बलवान बनेगा, "बम भोले" का वरदान मिला है" संतोष भाई की जय हो, शिवरात्री पर हार्दिक शुभकामनाये मूर्खों को एक बात अब धीरे - धीरे समझ में आ रही है की ये माँ बेटे की टोली जिसमें अब फिरंगी बिटिया भी सामिल हो गयी है से कुछ होने वाला नहीं है और ये बस लुट तंत्र में विश्वास रखते है क्वात्रोकी जैसे लोगों को अब सजा देकर भी क्या होगा सजा तो इन गद्दारों को मिलनी चाहिए ताकि फिर कोई क्वात्रोकी यहाँ ना आ सके मुरख मच की लव जलती रहनी चाहिए हर हर महादेव जय भारत

के द्वारा: ANAND PRAVIN

संतोष भाई की जय हो हमेशा, ये स्वप्न है पर स्वप्न की कामना तो हम अवस्य कर सकतें है देश और बाबा दोनों अपने ही पैसे को मांग रहें है, फिर भी क्यूँ हम इतने लाचार नजर आ रहें है इसपर मैंने एक कविता भी लिखी थी शायद आपने पढ़ी हो या ना पढ़ी हो बोलो कहाँ फिरे फरियादी, “अपनी ही फ़रियाद लिए” .....................यूँ तो ये कविता एक आम आदमी की आवाज़ थी किन्तु आज "बाबा" द्वारा उठाई जा रही आवाज़ भी तो आम आदमी की आवाज़ ही है अफसोश बस इतना है की ये सरकार तो निकम्मी है ही पता नहीं विपक्ष कितना सार्थक परिणाम ला पायेगा इस पर, किन्तु इतना तो सत्य है की हम अपना हक़ उन्ही विदेशों में नहीं सड़ने देंगे "साडा हक़ एते रख" आप यूँही लिखते रहिये, और एक निवेदन है की आपका ये मंच अनमोल है बड़ी चीजों का बड़ा मोल होता है इसलिए आप रुक - रुक कर पोस्ट करें और थोड़ा अपने लिए और हम सब के लिए समाजिक कारणों (बिना राजनीती) के बाड़े में भी लिखे क्यूंकि में देखना चाहता हूँ की देश के प्रति समर्पित उनका बेटा समाझ को क्या सन्देश देना चाहता है आप विजय है, और विजय रहें हमेंसा जय हिंद, जय भारत

के द्वारा: ANAND PRAVIN

के द्वारा: VKGHAI

संतोष जी,नमस्ते... "लिखो ,..स्वामी जी ,..सब लोगों का आपको बार-बार दंडवत परनाम!..” ………..आसरे काका ने हाथ जोड़ते हुए कहा तो सबने हाथ जोड़ लिए ." यह वाक्यांश अपने आप में बहुत बड़ा अर्थ समेटे हैं,जहां आसरे काका ने सिर्फ रामदेव जी की परनाम बोला तो उपस्थित सभी ने श्रद्धा से हाथ भी जोड़ लिए,जबकि उन्हें पता था कि स्वामीजी इसका जवाब नहीं दे सकेंगे,लेकिन श्रध्दा में कोई कमी नहीं है,ऐसा गहन विचारपूर्ण चित्रण संक्षिप्त शब्दों में करना आपकी लेखन कला को बहुत समृद्ध बनाता है. ',..हमारी औलादों का भविष्य खतरे में है ,.अगर हम शुतुरमुर्ग की तरह सिर गाड़े रहे तो आने वाली नस्लें हमको कभी माफ नहीं करेंगी !.”' मैं आपका प्रशंसक हो चुका हूँ संतोष जी,मूरखमंच की ललकार में जरा मेरी भी आवाज शामिल कर लीजिये,बहुत दिल करता है उन सब के साथ मिलकर भारत माता की जय-जयकार लगाने का.

के द्वारा: rahulpriyadarshi

संतोष भाई, सविवेक नमस्कार आपने मुरखमंच के द्वारा पुनः एक सार्थक राग छेड़ा है इतना हाय तौबा मचने के बाद, ए जी, ओ जी, टू जी का बखेड़ा होने के बाद भी नतीजा क्या निकल रहा है, कनिमोझी बाहर, कलमाड़ी बाहर, सारे उदोग्पति जो जेल में थे बाहर, दयानिधि बाहर और भी सब महान और देश के सम्मानित व्हाइट कोलार चोर बाहर बचा बेचारा राजा तो वो भी देर सबेर बाहर आ ही जाएगा और समाचार के किसी कोने में इसका उल्लेख्य मिलेगा ये बस यूँ ही चलता रहेगा और सुनिए अगले दो सालों में क्या होने वाला है अरविन्द केजरीवाल पैसे के हेर - फेर के आरोप में जेल के अन्दर, किरण बेदी NGO में हेर - फेर के लिए जेल में ,सुब्रमन्यम स्वामी देश द्रोह के आरोप में अन्दर, बाबा रामदेव घोटालों के आरोप में अन्दर, अन्ना अन्दर तो नहीं पर देश के सबसे बड़े फ्रोड के रूप में प्रचारित यही होने वाला है, क्यूंकि आपने इस लेख का नाम ही रखा है सज्जनशक्ति एक हों !!! किन्तु मुझे बताइये की सज्जन कौन है, इसी मंच पर जहां सज्जन होने के दावे करने वालों की कमी नहीं वहा बाबा रामदेव पर स्याही फेकने को ऐसे प्रदर्शित किया जाता है जैसे बाबा से बड़ा चोर कोई हो ही नहीं....................बात ये नहीं की लेख लिखने वाली महान कौन है बात ये है की उन्हें समर्थन देने वाले कौन है.................यहाँ कवी सज्जनशक्ति एक नहीं हो सकती .............हाँ हम कोशिश जरुर कर सकते है और आपकी कोशिश उन्ही में से एक है पिछले लेख में मैंने देखा था की कुछ लोगों ने आपको सलाह दी थी की हर बात को बाबा के तरफ ना मोड़े पर मेरी ये अनुरोध है की आप अपनी धार बनाय रखें हम आपके साथ है, और जो लोग आपके लेख को सिर्फ मनोरंजन के लिए पढ़ते है या सिर्फ कमेन्ट पाने का अड्डा बनाते है उन्हें याहां आना ही नहीं चाहिए यहाँ तो बस यही चलता रहेंगा...................जय हिंद ............जय भारत.............वन्देमातरम

के द्वारा: ANAND PRAVIN

संतोष भाई, की जय हो हमेसा मूर्खों के सरदार को उनके दल के प्रमुख सदस्य की ओर से अभिवादन जमीं की दशा बड़ी बुरी होती जा रही है, नहर तो अब नाम के ही बचें है देश में हमारा खान पान कहाँ से बेहतर होगा जब सही फसल ही नहीं उगेंगे पुनः सार्थक लेख आपका, जोरदार कटाक्ष किन्तु खेद है पर मुझे ऐसा लगा की आपने विवरण को पूरा नहीं किया ओर बड़े संक्षिप्त में निकल गए, यदि ओर विस्तार देते तो ओर रोचक हो जाता किन्तु जो है वो ही काफी है, बस आप तो एक मुर्कों की वेबसाइट लोंच कर ही दीजिये उसके बाद देखिये की आपकी बात कहाँ तक जाती है "एक मुर्ख है पुकारता, दशा को देख देश की, पुरुषार्थ से खडा है वो, है कर रहा सचेत भी" विशेष साधुवाद, लिखते रहिये

के द्वारा: ANAND PRAVIN

आदरनिये संतोष जी, आपने सर कहने के लिए मना कर दिया तो शब्द नहीं मिल रहा कहने के लिए फिर ये मुरख मंच भी नहीं की आपको मुर्ख कहूँ इसलिए आप ही कोई उपयुक्त सम्बोधन सुझाइए जिसमे आपकी गरिमा और हमारा प्यार दोनों बना रहे .................................................................................. इस लेख को मेने पूरा पढ़ा पढ़ कर मह्सुश हुआ की ऐसे लल्ला तो हमारे गली मुह्ह्ल्ले में ही रहते है, बस यही आपकी खूबी है की बात को ज़रा सरल कर के तीव्र व्यंग मार देते है................फिर युवराज तो आपके प्रिय पात्र बने हुए है ....................ना बनने वाली कोई बात भी नहीं उनमें.......................और इटली वाली रानी ..............के क्या कहने ...................अनुरोध है की एकाद कविता भी उनके शान में बोले देते तो सोने पे सुहागा हो जाता........................आशा करता हूँ की ऐसे और भी ल्लाओं के बाड़े में आपके द्वारा पढने को मिलेगा .......................आपका प्रिय अनुज आनंद प्रवीन

के द्वारा: ANAND PRAVIN

हम अपनी लड़ाई बीच में नहीं छोड़ेंगे,..देश के गद्दारों को उनकी औकात दिखा कर रहेंगे !..”….सबका जोश हिलोरें मारने लगा ,..गाँव का आसमान.भारत माता की जय !….वन्देमातरम प्रिय संतोष जी जो जो पढेंगे खून कम से कम उबाल तो मारेगा ही और जब उनका खून उबला तो कहीं न कहीं तो रंग लाएगा ही एक से दो दो से चार ...हम भी यही जोर जोर से दोहराते हैं .... भैया सब अपनी ताकत का इस्तेमाल करो खुद को पहचानो... ..लेकिन अब हम नामर्दों की तरह खड़े खड़े देश को मिटते हुए नहीं देखेंगे !…जब सब रास्ते बंद हो जाते हैं तो नया रास्ता बनाना ही पड़ता है ,.देशभगत जनता में ऊ ताकत है कि हम लुटेरी बिदेशी व्यवस्था को जड़मूल से उखाड़ कर अपना राज कायम करें .. जय भारत भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukla bhramar5

प्रिय संतोष जी ...... नमस्कारम ! आपने अपनी प्रयागराज और इलाहाबाद की यात्रा का जिक्र इस लेख में बहुत ही कम किया है इससे जनता (जागरण जंक्शन की ) में यह सन्देश गया है की आप आपके लिए मूर्ख मंच सर्वोपरि है उसके आगे अपने निजी हित और रूचिया भी गौण है सलाम करता हूँ मैं आपको वंदे मातरम सरस्वती माता जी के पूजन की हार्दिक मुबारकबाद हा हा हा हा हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

संतोष जी नमस्कार,आपका मूरख मंच वास्तव में बड़ी समझदारी की बात बहुत चतुराई से कर जाता है,लेख के अंशों में प्रयाग यात्रा का संस्मरण एक सुखद अनुभूति कराता है,आपने बड़ी वाजिब बात कही है की इस खानदान ने अंग्रेजी आत्मा को काली चमड़ी के अन्दर अंतरात्मा में छुपा/बसा लिया है,इनसे मुक्ति पाना देश के उन्नत भविष्य के लिए सबसे ज्यादा जरुरी है,जनता इन गद्दारों की बार बार ऊँगली करने की आदत से तंग आ गयी है...अब समय आ गया है जब इस ऊँगली करने वाले हाथ को ही उखाड़ फेंका जाए.जनता को अपने नायकों और खलनायकों को पहचानने में अब तनिक भी भूल नहीं करनी चाहिए वरना हाथ मलने के सिवा कोई चारा न होगा.बहुत उत्तम लेख :) गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं.

के द्वारा: rahulpriyadarshi

आज सुबह सुबह आपका यात्रा संस्मरण पढ़कर दिन की बहुत अच्छी शुरुआत हुयी....प्रयागराज का चित्रात्मक वर्णन यूँ लगा जैसे थोड़ी देर के लिए वे सारे दृश्य हमारी आँखों के सामने आ गए,सहृदय पंडित जी के साथ गुजारा आपका वक़्त निश्चय ही बहुत मंगलदायक होगा..मैं आज तक कभी प्रयागराज नहीं गया,किन्तु अब जाने की उत्सुकता जाग उठी है...साथ ही आनंद भवन उर्फ़ इमारत मंजिल भ्रमण की विवेचना भी बहुत भायी,काले अंग्रेज की हवेली आप देख कर आ गए,उम्मीद है हमें भी शीघ्र ही उनकी 'कोठी' पर लानतें भेजने का मौका मिले...आपके इस आलेख में जीवंत संस्मरण के साथ ही मनभावन व्यंग्य की फुहारें भी हैं...ऐसा लगता है कि आज का दिन भी खुशगवार गुजरेगा...चाहता तो हूँ कि प्रत्येक शब्द की विवेचना करूँ,किन्तु शायद शब्द कम पड़ जायें...अति उत्तम,आप निरंतर यूँ ही पवित्र स्थलों का भ्रमण कर हमें अपने अनुभव से अवगत करते रहे,इसे हमारे बीच पेश नहीं करते तो काफी कुछ हमसे छुट जाता,पेश करने के लिए धन्यवाद.

के द्वारा: rahulpriyadarshi

आदरणीय संतोष भाई .... सादर अभिवादन ! वाकई में आप अन्याय करते अगर इस यात्रा व्रतांत को हम सभी संग सांझा ना करते .... एक एक अक्षर पढ़ा है मैंने लेकिन पूरे लेख में सिर्फ एक ही शब्द आपतिजनक है .... उसमे सुधार कर देने से यह लेख पहले से भी बढ़िया “बन” जाएगा ..... शुभकामनाओं सहित :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

संतोष भाई को मेरा प्रणाम आपका वृतांत पढ़ा, पढ़ कर मह्सुश हुआ की प्रयाग तो नहीं जा सकता पर अपने पास के ही गंगा नदी में जा कर स्नान कर आऊं, सायद कुछ पाप धुल जाए पर आपने अपने वृतांत में एक सच्चे व्यांग्कर्ता का रूप दिखाया है, और जो रूप आपने "नेहरु" का दिखाया है उसे पढ़ कर दिल को काफी सुकून मह्सुश हुआ की आपके माध्यम से लोगों को उस महान पुरुषार्थ वाले सफ़ेद टोपी चोर के बारे में जान्ने को मिलेगा इसके लिए आपको बहुत धन्यवाद कहना चाहूँगा और सबसे मजेदार आप की जो बात मुझे लगी वो गाँधी परिवार का "स्विस" कनेक्शन इसे कहते है नंगे को भी नंगा करना आशा करता हूँ की आप यूँही देश का भ्रमण करे और हमें अपने अनुभव से रूबरू करवाए धन्यवाद

के द्वारा: anandpravin

देश में सैकड़ों लंका बन गयी हैं !,..हजारों रावण मेघनाद पैदा हो गए हैं, तो विभीषण भी पैदा होंगे !,...हमें इस समय विभीषण की बड़ी जरुरत है न जाने क्यों देर लगा रहें हैं अवतार में ... प्रिय संतोष भाई बड़ा ही सुन्दर चल रहा है प्रसंग ...आनंद दाई काश हमारे लोग जागें और कुछ दिखा दें की हम में भी है दम ...हम चाहें तो पैदा कर दें चट्टानों में राहो सा ...लेकिन जब जागो तभी सबेरा !.... जब तक हम गांधी टोकरे को पीछे लटकाए लोगों को लात मारकर उनकी औकात नहीं दिखायेंगे, तब तक ये हमारा अपमान और बलात्कार करते रहेंगे ,………….सबलोग याद रखो !! बहुत ही सुन्दर ..हम और क्या लिखें सब कुछ तो लिखा गया है ...जागो देश वासियों जागो ...दो दिन दो रोटी के लालच में सब मत त्यागो ... भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

आनंद जी ,.बुरा लगने वाली कोई बात ही नहीं है ,..आपने अपनी बात रखी उसका स्वागत है .. मुझे बहुत अच्छा लगा ,..और माफ़ी मांगकर आपने भाई को शर्मिंदा ही किया है ,.... आन्दोलन का परिणाम तो भविष्य ही तय करेगा,..और दोनों ने (बाबा +अन्ना) सदैव एक दुसरे को समर्थन दिया है ,..अन्नाजी के आन्दोलन की आभासी सफलता(जो काल्पनिक ही रही) में बाबा का बहुत बड़ा योगदान है ,...मैं पूरी आशा करता हूँ की आप निश्चित ही सभी बातों को समझकर पूरी क्षमता से मूरख मंच के साथ बाबा रामदेव के पीछे खड़े होंगे ,.(हालांकि अभी भी हैं लेकिन कुछ शंकाओं के साथ ).हमें मात्र यह याद रखना है कि दुश्मनों को धूल चटानी ही है ,...भारत माता की जय !..वन्देमातरम

के द्वारा: Santosh Kumar

संतोष जी नमस्कार, आपका आलेख कल ही पढ़ लिया था लेकिन किसी कारणवश उस समय प्रतिकिर्या नहीं कर पाई . अब चुनाव आ गए हैं तो इन नेताओं को जनता नजर आने लगी . फिर से वादों का दौर शुरू हो गया .लेकिन अब जवाब देने का समय है जनता का देखो क्या फैसला होगा ?? अपने जो कहा में उससे पूरी तरह सहमत हु :- याद रखो सब लोग !..हमारी गरीबी और लाचारी के जिम्मेदार यही लोग हैं ,..जितना पैसा विदेशों में जमा किया है अगर वो हमारे काम आता तो हमें हरकदम पर अपना सम्मान नहीं खोना पड़ता ,….अब इनसे पूरा हिसाब चुकता करने का मौका मिला है,.. किसी को भी चूकना नहीं है ,..सब लोग पूरा तैयार रहो ! ,..जब, जहाँ ,जैसे मौका मिले इन आदमखोरों को दिखा दो भारतमाता के लालों की असीम ताकत !…” .. जय हिंद !!!

के द्वारा: mparveen

आनंदप्रवीण जी,नमस्कार बहुत आभारी हूँ आपका की आपने अपनी असहमति व्यक्त की ,..मैंने यह लेख तमन्ना जी के प्रतिउत्तर में नहीं लिखा है ..उनको जबाब उनके ब्लॉग पर आपने और मैंने भी दे दिया है ,.. दरअसल मेरी सोच का दायरा बहुत छोटा है ,.शायद कुँए के मेंढक जितना!..मैं बाबा और अन्ना को एक ही कुँए में देख रहा हूँ तो निश्चित ही पक्षपाती हूँ ,.. सत्ताधीश खड़े होकर रोती जनता को पैजामा नीचे कर के दिखा रहे है ,.हमारी यह जिम्मेदारी होनी चाहिए की इस बात का ध्यान रखें की किसने सीटी बजाई थी और किसने ताली मारी थी ,..और जब इसने सीटी बजाई थी तो उसने ताली क्यों नहीं बजाई थी ?...लेकिन इससे चरित्र प्रमाणपत्र तो सत्ता को ही मिलेगा ?... मैं पहले दिन से अन्नाजी के आन्दोलन से जुड़ा हूँ ,..बाबा जी से अभी तक नहीं जुड पाया हूँ ,..लेकिन समझता हूँ की देश को दिशा देने में बाबा रामदेव ही सक्षम हैं ,..और मुझे व्यक्ति से ऊपर उठकर मुद्दों को समर्थन देना चाहिए ,..अन्नाजी का जन लोकपाल का मुद्दा बाबाजी के मुद्दों में समाहित है ,.. कुंवा गोल होता है अतः मैं सबको बराबर ही देखता हूँ ,..मैं किसी की आलोचना नहीं कर रहा हूँ या करना चाहता हूँ ,,..आपसे निवेदन है कि समय मिले तो मेरे पुराने लेख अवश्य पढ़ें ,..हार्दिक आभार सहित

के द्वारा: Santosh Kumar

संतोष भाई की जय हो, आपने अपने ब्लॉग द्वारा तमन्ना जी के प्रश्नों का बिलकुल सटीक उत्तर दिया है, ये अलग बात है की यदि वो समझना चाहें तो पर मैं भी इसमें एक बात कहना चाहूंगा जो मेरा निजी मत है की, रामदेव बाबा को इतना भी आगे करने की जरुरत नहीं थी सवाल है की लोकतंत्र में स्याही फेंकना या ना फेकना उतना बरा मुद्दा नहीं हो सकता जितना की ये मुद्दा होना चाहिए की बाबा का आन्दोलन किस दिशा में जा रहा है, और शायद रामदेव बाबा के उटपटांग बयानों के कारण भी कुछ लोग उन्हें सही से नहीं ले पा रहें है, ख़ास कर उन्होंने जो अरविन्द केजरीवाल और अन्ना के बारे में बोला था ऐसे में किसी को चरित्र प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता I मेरे कहने का मतलब अगर आप समझ सकें तो ये है की आप एक कुशल लेखक है इसमें कोई शक नहीं किन्तु इस मुद्दे पर आप ज्यादा ही पछ ले रहें है ऐसा सिर्फ मेरा सोच हो सकता है इसके लिए माफ़ी चाहूंगा पर आप इसपर सोचियेगा धन्यवाद

के द्वारा: anandpravin

के द्वारा: Pramod Kumar

संतोष कुमार जी आप गजब का वयंग कसते हो / ऐसा व्यंग कि सच्चाई के एकदम करीब हे / आपके मुरख मंच के पात्र सचमुच कमाल का बोलते हें / आप की भाषा वाकई दिल को छू जाती हे / आप के ब्लॉग का विशेस कर मुरख मंच का बेसब्री से इतजार रहता हे / वाकई सत्ता से लड़ना आसान नहीं / आजादी के समय गाँधी जी हो या अब अनन्ना , रामदेव या आम जनता सभी इस सरकार का शिकार हें / आम आदमी जब तक जात पात धर्म से ऊपर उठकर वोट नहीं करेगा तब तक हम सभी सरकार के शासन से त्रस्त रहेंगें / आज इस आने वाले चुनाव में लोगों को सही नेताओं को चुनना चैये चाहे वो किसी भी पार्टी का हो / पार्टी विशेस का पट्टा जब तक हम अपने गले से नहीं निकालेगें तथा विवेक से वोट नहीं करेंगे तब तक जन कत्ल्यान की बात बेमानी हें / आज सरकार जन कल्याण से मुकर रही हे / नेता राजे रजवाड़ों जेसा व्यवहार कर रहें हें / सचमुच आप अच्छा सोचते व् लिखतें हे / आपको बधाई

के द्वारा: satish3840

अजी चिन्ता को गोली मारिये ! चाहे जितनी उछल-कूद मचा लें, लेकिन अब ऊँट को पहाड़ के नीचे आना ही होगा । चुनाव-चिह्न बदल देने से किसी का असली चेहरा थोड़े ही बदल जाता है । लेकिन बड़े शातिर हैं ये लोग भाई, मान गए । सुना है नए चुनावी नारे को गाने-बजाने के लिये एम पी से किन्नरों की फ़ौज को बड़ी संख्या में हायर किया गया है । इस पर निर्णय के लिये पार्टी कोर कमेटी की एक गुप्त बैठक हुई, जिसमें बहस के दौरान यह तथ्य सामने आया कि अक्सर चुनाव प्रचार के दौरान यदि जनता किसी दल के खिलाफ़ भड़क जाय, तो वह सबसे पहले पार्टी चुनाव चिह्न पर ही अपना गुस्सा उतारती है, और हमला कर उसे उखाड़ फ़ेंकती है । तब शीर्ष नेतृत्व की किसी मैडम ने प्रचार के लिये किन्नरों को लगाए जाने का सुझाव पेश किया, ताक़ि न रहेगा बाँस, और न बजेगी बाँसुरी । लेकिन आप चिन्ता मत कीजिये, बाबा के साथ मिल-जुल कर देख लेवल जाएगा … हमनियों कौनों एथी हैं काऽऽ ?

के द्वारा: आर.एन. शाही

के द्वारा: Rajkamal Sharma

के द्वारा: आर.एन. शाही

के द्वारा: Harish Bhatt

के द्वारा: आर.एन. शाही

आदरणीय शाही जी ,.सादर प्रणाम आपके अनमोल वचनों के लिए कोटि कोटि आभार,...लुधियाना आपकी यादों में बसा है जानकार बहुत ख़ुशी हुई ,..कम्बलों की उस क्वालिटी के बारे में तो नहीं कह सकता ,लेकिन अभी भी बेहतरीन क्वालिटी के कम्बलों और ऊनी परिधानों का उत्पादन होता है ,..हर वर्ग के लिए विस्तृत श्रखंला उपलब्ध है .... पंजाब का खानपान तो विश्वप्रसिद्ध ही है,..लुधियाना के मशहूर खानपान प्रतिष्ठानों की प्रतिष्ठा उनके स्वाद की ही तरह लाजबाब है ,...बहुत दिन हो गए मुझे भी बाहर पराठे खाए हुए ,..सच में मेरे मुह में भी पानी आ गया ,.कल इतवार है ,.कहीं पराठें ही खाऊँगा ,.... लुधियाना के लिए आपकी शुभकामनाओ को मेरा नमन और कोटिशः आभार .

के द्वारा: Santosh Kumar

आदमी जिसका खाता है, उसी का बजाता भी है संतोष जी । हम सभी यही करते हैं, और यही धर्म भी है । मैं काफ़ी पहले लगभग तीन दशक पूर्व लुधियाने किसी काम से गया था । जिन सज्जन के यहाँ ठहरा था, उन्होंने विदाई के समय जो कम्बल भेंट किया था, वह आजतक घर में मौज़ूद है । पता नहीं लुधियाने के कम्बलों की वह क्वालिटी आज मेनटेन्ड है या नहीं । और एक चीज़ जो वहाँ की भुलाए नहीं भूलती (क्योंकि ज़रा पेटू किस्म का रहा हूँ), वह है लुधियाना के रेस्तराओं में बनने वाले मक्खन से तरबतर परांठों का स्वाद । वाह, लाजवाब ! सर्दियों के ही दिन थे, आलू, गोभी, मूली और मेथी के किस्म-किस्म के भरवाँ परांठे घूम-घूम कर जो खाया था, उसे याद कर इस वक़्त भी मुंह में पानी आ रहा है । भगवान आपके लुधियाना को हमेशा समृद्धि से यूं ही भरपूर रखें, यही दुआ है । साभार !

के द्वारा: आर.एन. शाही

के द्वारा: girish

के द्वारा: alokmohan

के द्वारा: govind

के द्वारा: Santosh Kumar

प्रिय संतोश जी, और सभि पाठको को मेरा ( रोशन ) का नमस्कार, मै आज बहुत खुस हु...क्युंकि मैंने संतोश जी का  लेख पढा और उसके साथ साथ मैंने सभि पाठको के दिये हुए राय पठे ... पढने के उपरांत मुझमे बहुत सारी विचारधाराये जगि... कभि राजकमल जी के अनमोल वचनो  ने दिल जीता तो कभि दीपक स्रिवासतवा जी ने क्या अछा और क्या बुरा होता है कि सिख दि..तो कभि मनोज जी ने लछ्डा का सहि मतलब समझाया..! संतोश जी आपके बारे मे हम राय रखना कैसे भुल सकते है..मै क्या कहु आपको...मेरे पास शायद सब्दो कि  कमि है मगर इतना तो जरुर कहुंगा कि आपका नाम हि आपकि परिभासा है..! मेरि यहि अनुरोध है कि आप युहि मनभावन  लेख लिखते रहे ...! शुक्रिया..

के द्वारा: Roshan Dhar Dubey

.सरकारी में तो सब खुली छूट है ..बाग़डोर लगाम सब उनके हाथ में रहेगी ,.छोटके अधिकारी खुल्ले भैंसे की तरह फसल चरते रहेंगे ,… जज कचहरी सब आजाद है …ऊपर से आरक्षण का भूत ,... दलाल आपके इर्द गिर्द पक्का होंगे ,.नहीं तो एन जी ओ को काहे नहीं रखते !,..सब जानते हैं कि नेता और अफसरन के परिवार वाले दर्जन के हिसाब से एन जी ओ चलाते हैं ,…का इससे लेन देन का दूसरा बड़ा रास्ता नहीं खुल जायेगा... चन्द्रिका ने ठीक ही कहा की गांधी जी होते तो अहिंसा की लाठी तोड़ ...दे दनादन ...अब ज़माना यही है संतोष जी इन्हें जितना प्यार से समझाओ सर पे चढ़े जात हैं ....यन जी ओ और दलाल ..बहुत कुछ है अभी लेकिन आइये कुछ तो बढे आगे ..भागे भूत की लंगोटी सही संतोष जी .... सुन्दर लेख ...जय श्री राधे भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

Priy संतोष भाई ...... नमस्कारम ! अरे भाई यह तो सरासर जुल्म है आपका ..... आपकी इस पोस्ट पर आये हुए सबसे पहले कमेन्ट की दूसरी मंजिल में मेरी आवाज रिकार्डिड है ..... कमाल की बात है की शशिभूषण जी ने उसको सुन लिया और आपने अनसुना कर दिया ..... आज के ही अखबार में ताजा खबर है मनप्रीत बादल को छोड़ कर गए साथियों से लिए गए इंटरव्यू के बारे में ..... पढ़ कर मन दुखी हुआ की यह नेता लोग अंदरखाते मिल कर भोली भली जनता को किस तरह से बेवकूफ बनाते हुए अपना उल्लू सीधा करते रहते है ..... देखते है की इस बार पंजाब और पंजाबियो की किस्मत में क्या लिखा है अति सुन्दर लेख पर मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| ************************************************************************************************ * * * * * * * * * * * * * * * * * * ***** * * * * * * * ****** * ******* * * *** ****** * * * * * ****** * * ********* * * * * * *** * * *

के द्वारा: Rajkamal Sharma

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के द्वारा: Rajkamal Sharma

.वीर जी तुसी दस्सो ,…की बनूगा पंजाब दा ..बनना की है मालको ,.रब्ब दे सहारे ही जिंदगी कटूगी,…लीडरां ने ताँ बरबाद ही करना ...साड्डा पंजाब हुन तेजी नाल पिच्छे जा रिहा है ,…आधी आबादी नशेयां दी गिरफ्त चे आ गी ,…अपनी धरती दवावां नाल खराब हो रही है ,…पानी पीन जोगा नहीं बचेया …..सारे बीमार होई जांदे ,…कर्जा सोन नहीं दिंदा ….खर्चे घटदे नहीं ….उत्तों लीडर ड्रामे तो अलावा कुछ करदे नहीं ... प्रिय संतोष जी बहुत सुन्दर अब आप देखो इतना आगे बढ़ा पंजाब विकसित फिर भी ये चिंताएं तो हम सब के यहाँ की हाल सोचिये ..क्यों न रोयें ? हमने भी कहीं कहीं पंजाब में बड़े घरों के मालकों से ये शराब और अन्य लतों की बातें सुनी हैं ..माँ बाप समृद्ध होते हुए भी बच्चों के आगे रोते गिडगिडाते दिखे कोई कनाडा जाने के लिए कोई पजेरो के लिए ...ऐसे कई ...विचार करने वाली पोस्ट ... हम पंजाबी तो नहीं पर बहुत कुछ समझे ....आभार संतोष जी ...प्रिय शशि जी की बात से हम भी सहमत हैं जय श्री raadhe bhramr 5

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

के द्वारा: amit

के द्वारा: rahulpriyadarshi

आदरणीय विनीता जी ,.सादर प्रणाम आपके अनमोल सार्थक विचारों के लिए अत्यंत आभारी हूँ ,..विपक्ष की कमजोरी बड़ा कारण है ....इन्होने या तो उनको सक्षम होने नहीं दिया या फिर अपने ही रंग में रंग लिया ,..खाओ और खाने दो का सिद्धांत अपना रखा है ,...उत्तर प्रदेश में माया जाल को हरकदम पर कांग्रेसी समर्थन है ,...सबको कंट्रोल कर लेते हैं ,...भाजपाई भी ज्यादातर भ्रष्ट हो चुके हैं ,...एक राजनीतिक शून्यता आ गयी है ....अब तो लगता है कि माफिया राज कर रहा है ,.......लोकतंत्र कि सार्थकता पर सवाल खड़े हो गए हैं ,..इसका एक ही निदान लगता है ,..जनता की जागरूकता !!....लेकिन जहाँ अधिसंख्य जनता बेहाल है वहां जागरूक हों या पेट भरें ....आपका ह्रदय से आभार

के द्वारा: Santosh Kumar

सन्तोषभाई नमस्कार जनताने -- दुश्मन को दोस्त बनाने के बहुत गाने गा लिये--- सडक छाप धार्मिक नेता और आदर्षवादियोंने जनता को नपुंसक बना दी है । अब दुशमन को दुशमनी दिखाने का टाईम है । जनता को लूटनेवाले को जनताने अब प्यार नही करना है बल्की बैर रखना है । मौका मिलते ही घुल चटाना है । एक दवाखाना हम भी खडा कर सकते है । लम्बे लम्बे ईन्जेक्शन तैयार करो, उसमे बैर भावना की दवा डालो । देखो आसपास लगा न सको नही तो दिखाओ लेखक हो तो दे मारो कागज में वरना की-बोर्ड तो है । की-बोर्ड की एक एक की मांगती है ईस दवाई की सुई । पहला पत्थर मारनेवाला ईसा का डायलोग पूराना हो गया है । अब तो पहला ईन्जेक्शन वो मारे जीसमे भ्रष्टाचारियों के प्रति नफरत हो । आपने मार दिया है । बधाई हो ।

के द्वारा: bharodiya

आदरणीय श्री संतोष जी, वक्त एवं परिस्थिति के अधीन आज पहली बार मुझे आपके पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है | आपके आलेख का सबसे अच्छा पहलू मुझे ये लगा कि आपने समस्या ही नहीं वरन उसके मूल कारण पर भी प्रकाश डाला है ............. मसलन, व्यवस्था से तंग सभी हैं किन्तु कोई भी स्वयं को बदलने के लिए तैयार नहीं है| दरअसल ये व्यवस्था भी हमारी ही बनायीं हुई है ....... हम सादगी भूल गए हैं, ज्ञान की बातें केवल सुनते-सुनाते हैं, अपने बच्चों की गलत आदतों को नजरअंदाज करते हैं, जाति, धर्म और परिचय देखकर वोट डालते हैं, यहाँ तक की स्वयं की संस्कृति पर अपमानित महसूस करते हैं किन्तु विदेशियों की तरह दूसरी उंगली उठाने पर गर्व............................ जब हम स्वयं इतने गिरे हुए हैं तो व्यवस्था क्या ख़ाक बदलेंगे | वहां तो हमारे जैसे हीं लोग हैं, फर्क सिर्फ इतना है कि वे रेस में हमसे आगे निकल गए | वैसे, आपके लिखने का अंदाज अच्छा लगा, उम्दा और अलग | कोटिशः धन्यवाद |

के द्वारा: Baijnath Pandey

श्री संतोष भाई,  आपको नजर न लगे। मूरख मंच में आपकी बातों को पढ़कर  मुंशी प्रेम चंद की यादें ताजा हो जाती है। विविध तथ्यों के  समावेश होने से आप मुंशी प्रेम चंद के अत्यन्त करीब दिख रहे हैं।   इसके पहले भी अंधेरा..तो सिर्फ देहरी पर...पढ़ा था। हमने सोचा कि  उसी वक्त...आपकी तुलना मुंशी प्रेम चंद से करू पर एक और लेख  को पढ़कर।  सो इस बार हमने अपने मन की बात कह डाली। लेख  का अन्त सकारात्मक और आशावादी होने पर शुक्रगुजार हूं...  आपकी बात में...भारत माता की जय !……………. मंच पर भारत माता के जयकारे लगने लगे ,……शीघ्र ही पूरा गाँव भारत माता के जयकारों से गुंजायमान हो गया।....मुझे बहुत अच्छा लगा... देशवासी जयकारे की वाणी के साथ ही उसे कर्म में बदलकर बहुरूपिये  नेताओँ पर नियंत्रण लगाकर भारत पुनः विश्व गुरू बन सकते हैं। 

के द्वारा: pramod chaubey

फिर प्रदेश को हाथी अकेला ही खाए ! ,.कैसे बर्दाश्त होता होगा !..कहीं नंबर आने तक सब ख़तम ना कर दे,..Priy santosh bhaai ….. सप्रेम नमस्कारम ! लगभग सभी जगहों का यही हाल हो गया है आजकल ..... जब जाने का समय आने लगता है तो सरकार के मुखी लोगों को भरमाने के लिए संगत दर्शन लगा कर + पिछले चार साल की लंबित मांगो को पूर्ण +आंशिक रूप से मान कर + सरकारी विज्ञापनों पर करोड़ों रूपये का प्रचार करने जैसे अनेको त्रिको से खजाने को खाली कर जाते है..... इस मामले में सारे कानून और जनता सुप्तप्राय से है ......हमारी मेहनत का + टेक्स के पैसे को लुटाया जाता है +बर्बाद किया जाता है और हम निरीह जनता इन हुकमरानो को अपनी मूक स्वीकृति देकर इनको अपनी मनमानिया करने देते है .... जय हो :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

प्रिय संतोष भाई ..... सप्रेम नमस्कारम ! अपने शुरूआती दिनों के किसी वयंग्य में मैंने लिखा था की इस मंच पर सुभाषचन्द्र बोस जी के नारे “तुम मुझको खून दो –मैं तुमको आजादी दूँगा” की तर्ज पर इस मंच पर “तुम मुझको कमेन्ट दो तो मैं भी तुमको कमेन्ट दूँगा” वाली नीति चलती है ..... अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कभी जरूरत के नाम पर तो कभी सौदे के नाम पर तो कभी ब्लैकमेलिंग के तौर पर भी समझौते होते है ..... इसलिए इस विदेशी करियाने की दुकानों के भारत में आने का असली कारण क्या है ?.... यह तो या तो रब्ब जाने या फिर विक्किलिक्स ..... हा हा हा हा हा हा :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma

संतोष भाई आज लगता है मुख्यं मंत्रिणी से मंत्रणा कर मिल आये क्या ...वे भी आज ऐसे ही पीछे पड़ी थीं ..रूमाल से मुह पोंछ पोंछ ...सब माया जाल है ,,,,,चलता है ...झोपडी में विदेश के दोस्तों के साथ वो राज कुवर आ के गरीबों का मजाक करता है ...फिर विदेश भाग जाता है आदि आदि ..... सुन्दर लेख ये आसरे काका और भीखू चाचा जरा सा भी डरते नहीं हैं ....फौलाद दिल वाले लग रहे हैं .... धन्यवाद ...सुन्दर ...…केवल दिल्ली की कमाई से कहाँ काम चलेगा ! …फिर प्रदेश को हाथी अकेला ही खाए ! ,.कैसे बर्दाश्त होता होगा !..कहीं नंबर आने तक सब ख़तम ना कर दे,.. भ्रमर ५ गलती से काहे बोलेगा,.सैकड़ों गुलामों की फ़ौज है उसके पीछे ,.. पूरी तैयारी होती होगी ,…कहाँ चुप रहना है ,…कहाँ बोलना है …..का बोलना है ,..कहाँ जाना है ,.कहाँ नहीं जाना है ,..कब झोपड़ी में सोना है,.. कब विदेश जाना है ,…सबकी पूरी तैयारी होती होगी !..ये ससुरे नेता अंग्रेजन के बाप हैं ,..किसी तरह से आग लगाकर फूट डाल देते हैं,.. फिर चैन से हाथ सेंकते हुए खाते रहते हैं

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

प्रिय संतोष जी ....सप्रेम नमस्कार ! नमस्कार ! शुक्रिया ! स्वागत ! आदर ! अभिनन्दन ! और आभार ! मैं तो इस आशा में बैठा था की सारा लेख बाबा जी के कारनामों पर न हो ..... लेकिन ब्रेक में जो “बहनों का विविध भारती वाला प्रोग्राम” चालू हुआ तो बाबा जी कहीं पीछे छूट गए और देश तथा समाज और घर परिवार की समस्याए एक के बाद एक करके सहज रूप से सामने आती चली गई की लेख के अंत में आकर पाठक सोचता है की “यह कहाँ आ गए हम यूहीं साथ साथ चलते” .... साथ साथ चलते ही यह मंजिल मिल पाएगी मुबारकबाद और मंगलकामनाये न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/11/राजकमल-इन-पञ्चकोटि-महामण/

के द्वारा: rajkamal

आदरणीय संतोष जी बहुत अच्छी पोस्ट के लिए बधाई आपकी इस पोस्ट में तो सरला ने उस बच्चे को पचास रुपये का नोट दिया लेकिन आज जब मैं फार्म की दुकान पर खड़ा तो तो एक पांच या छः साल की बच्ची आते जाते लोगों से भीख मांग रही थी तो जब वह एक लड़की के पास पहुची तो उस ने उस बिचारी को कहा मारेंगे एक थप्पड़ दिमाग ठीक हो जाएगा. इतना सुनते ही मुझे काफी गुस्सा आया कि उस बिचारी को अगर वो कुछ दे नहीं सकती थी तो उसने उसे गाली क्यों दी? मेरा तो मन किया कि उस को खींच के एक थप्पड़ मार के उसका दिमाग ठीक कर दूं लेकिन क्या करूँ अपना ये समाज है ना मुझे ही लड़की छेड़ने का आरोपी बना देगा , इसलिए मुझे चुप रहना पड़ा. अगर उसके पास पैसे नहीं थे तो उससे प्यार से भी बोल सकती थी, लेकिन उसने नहीं बोला क्योंकि वो गरीब थी....... फिल्म तमन्ना का एक बहुत ही प्यारा गाना है घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूँ करलें. किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए . संतोष जी,कहा जाता है कि औरत ममता से ओत-प्रोत होती है, लेकिन आज मेरा यह भ्रम टूटता नज़र आ रहा उस की वजह से........... धन्यवाद. http://komalnegi.jagranjunction.com/2011/06/13/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%96-%E0%A4%95%E0%A4%AE-%E0%A4%B2%E0%A4%97%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B2/ http://ajaykumar2623.jagranjunction.com/

के द्वारा: ajaykumar2623

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

निर्धन समाज पार्टी का घोस्णा पत्र पन्जिक्रित करेन्सी सन्सार से निर्धनन्ता, भ्रिस्टाचार, अपराध तथा आलस्य का जड से विनाश करने का एक मूल मन्त्र है! ईससे सम्पूर्ण सन्सार का विकास होगा . लेकिन ईसे दुनिया के समस्त देशौ को स्वीकार करना पडेगा तथा पन्जिक्रित पुन्जी को परिचलन मे लाना पडेगा तभी भुख्मरी, गरीबी,भ्रिसटाचार, अपराध व आलश्य से छुट्कारा पाया जा सकता है. लोकपाल, लोकायुक्त या कडे से भी कडा कानून पुरी तरह से समाज से करप्शन व क्राईम को समाप्त नही कर सकता. ईसे रोकने हेतु दुनिया के किसि न किसि देश को आगे आ कर पन्जिक्रित पुन्जी के परिचालन को शुरू करना पडेगा. करन्शी का परिवर्तित रुप " नोट कि जगह पर बॆक से जारी की गयी करन्सी पर खाता धारक नाम व नम्बर को लिख कर ्नोट के प्रचलन से मात्र सन्चालन के द्वारा करप्शन व अपराध से एक साथ छुट्कारा मिल जायेगा. १९९३ मे उत्तर प्रदेश मे जन्मी निर्धन समाज पाट्री ने सभी प्रन्तौ मे होने वाले लोकसभा चुनाव मे अपने प्रत्यासी उतारने का निर्णय लिया है. सरकार बनते ही देश से रुपये के परिचलन को निरस्त कर रजिस्टर्ड करन्सी लागू करेगी. काला धन के वापस लाने वालो पर कोयी मुकदमा नही चलेगा और ना हि कोयी टैक्स वसूला जयेगा. पार्टी ने घोस्णा पत्र मे पन्जिक्रित पुन्जी के प्रचलन को सरकार बनते ही लागू करने का वादा किया तथा वर्तमान मे चल रहे रुपये को बन्द कर बैन्क के द्वारा सीधे खाता धारक के डीमन्ड के अनुसार करन्सी जारी कर देश से करपशन व अपराध मुक्त शासन की स्थापना करने का निर्णय लिया है. पार्टी के रास्ट्रीय कैम कार्यालय ईलिस बाजार, कानपुर महानागर, उत्तर प्रदेश मे पार्टी के रास्ट्रीय पमूख ईकवाल सिद्दीकी उप्स्थिति मे पार्टी की रास्ट्रीय समिति के समस्त सदस्यॊ ने एक स्वर मे पार्टी के घोसणा पत्र जारी कर विधान सभा के चुनाव मे पाचो प्रान्तो मे प्रत्यासी उतारने का निर्णय लेते हुऎ महारास्ट्र के सन्योजक श्री उदय बागणे, उत्तराखण्ड के श्री य़शवन्त सिन्ह नेगी, झारखन्ड के श्री नीरज कछवाहा, ऒडिसा के श्री आनिरुध्द स्वाई, आन्ध्र प्रदेश के डा. नरेन्द्र भल्ला व लकछमन राव को प्रदेश स्तर पर समितिया’ बनाने का निर्धेस दिया. रूपया समाज मे ब्याप्त समस्त बिमारियो का कारण है. रूपये के रूप को परिवर्तित कर समाज मे अराजकता, भ्रिस्टाचा्री, भय, चोरी, डकैती, लूट व आलस्य को जड से मिटाया जायेगा. युरो, डालर, पोण्ड्स, लीरा, दिनार, टका, येन आदि के रूप को भी बदल जाने से समस्त विश्व को ईन बिमारियो को निजात दिलाया जा सकता. निर्धन समाज पाट्री के एक सुत्रीय मुद्दे को सन्सार मे अन्तर रास्ट्रीय पहिचान मिल रही है. वीरेन्द्र तोमर, रास्ट्रीय महा सचिव ३७/४२, गिलिश बज़ार, कानपुर निर्धन समाज पार्टी, उत्तर प्रदेश, भारत, E-mail: nirdhansamajparty@gmail.com, Mobile :+91-94154 78524

के द्वारा: Nirdhan Samaj Party

प्रिय संतोष जी .....सप्रेम नमस्कार ! “कजरा मोहब्बत वाला अंखियों में ऐसा डाला कजरे ने ले ली मेरी जान –हाए रे मैं तेरे कुर्बान” यह आपका लहरा मोहब्बत वाले भाई साहिब तो वाकई में मस्त -२ चीज है ..... मेरे ख्याल से जिसने भी इस लेख को पढ़ा है एक बारगी तो वोह उनसे जरूर मिलना चाहेगा” अब इसे आपकी कलम का जादू कहे या फिर उस लहरा वाले की मोहब्बत इस लेख को पढ़ कर समझ में नहीं आ रहा है की आपकी तारीफ करूं या फिर उस लहरा मोहब्बत वाले भाई साहिब की” मेरी तरफ से आप दोनों को ही शुभकामनाये आपका मुबार्कबाद सहित आभार न्ये साल तक आने वाले सभी त्योहारों की बधाई :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: rajkamal

के द्वारा: rajkamal

के द्वारा: neeru

प्रिय संतोष जी अब ये मूरख मंच से शुद्ध भाषा-मजा हुआ तीर -तीखी गोली भी उनके गले में न उतरे तो और क्या कहें -श्री लाल शुक्ल जी के परलोक गमन की सुन सच में बड़ा दर्द हुआ मन को -अच्छा है की आप जैसे कई व्यंग्यकार अभी लेखनी थामे राजा को भी दर्पण दिखा रहे हैं ..वर्ना आज के युग में तो चाटुकारों की ही बल्ले बल्ले है ..अति सुन्दर बेबाक ..व्यंग्य गजब का ..बधाई हो जो सरकार हैं वो कहते हैं कि हम ही खुदा हैं ,..विरोधी भी कम नहीं हैं,..सब मिलकर हमको उल्लू बना रहे हैं ,..बाबा ने का गलत किया ?…देश को बचाना ही चाहते हैं ना,..अन्ना ने जनता को तो खड़ा कर दिया,लेकिन अब उनके लोग ही बैठने लगे हैं ,…. सब कहते हैं कि संसद ही सबसे ऊपर है ,..उसमे बैठे चोर डाकू क्या खुद के गले में फंदा डालेंगे ? शुक्ल भ्रमर ५

के द्वारा: surendr shukl bhramar5

के द्वारा: gurmeet

सन्तोषभाई नमस्कार आपने ईस कहानी द्वार बहुत अच्छा मेसेज दिया है । बधाई आप को । गांव का पूरा चित्र खडा कर दिया । आप की कहानी मे कडुआहट है लेकिन कहानी सीधी और सरल जाती है । मंगल और भागीरथ जनमते हैं, युवा होते हैं , युवावस्था के हर करतब दिखाते है जो सब से ज्याद पिडा दायक हिस्सा था कहानी का, और बुद्ढे होते है । अंत में मंगल कामना भी है । लेकिन कहानी के बहार भी मंगल और भागीरथ है, जीस के जनम का पता नही, मांबाप का पता नही । उन की कहानी थोडी रीवर्स में चलती है । लगता है आदमी मां की गोद से नही स्मशान से खडे हो कर आ रहे हैं और समाप्त होने के लिये मां की गोद ढुंढते हैं समा जाने के लिये । मंगल और भागीरथ कभी बुढे रहे होंगे आज जवान हो गये हैं । हर वो काम करते हैं जो कहानी का सबसे खराब हिस्सा होता है । राह देखनी है वो कब बच्चे बनते हैं और फिर क्या करते हैं । फिर से आप को बधाई ।

के द्वारा: bharodiya

1) तुमने भौजी को गोद में उठाकर उतारा था.......... 2)पापी तो हम दोनों ही हैं ,..ईर्ष्या और लालच में अपनी जड़े ही काटते रहे ,..अब देखो जिस बेटे के लिए छल,कपट सबकुछ किया,…. उसीने पैर तोड़ दिया , 3)अगर आज एकजुट नहीं हुए तो हमेशा अलग ही रहेंगे और ये गिद्ध नोच नोचकर अपना पेट भरते रहेंगे 4)अब दोनों मिलकर गाँव के बच्चों को अच्छी बातें सिखायेंगे ,..यही प्रायश्चित कर सकते हैं 5)पास खड़े बच्चे पत्थरों को पिघलता देख हैरान हो गए ......... 6)दोनों एक दूसरे के कंधे पर हाथ रख घर की तरफ चल पड़े ,…उनके क़दमों में एक नया उत्साह आ गया ,….. राधा बुआ ने कहा ,...मंगला चाची की आत्मा को अब जरूर शान्ति मिलेगी …………… ****** जरूर शान्ति मिलेगी मंगला चाची की आत्मा को ..... प्रिय संतोष भाई जी एक एक लाइन को बार बार पढने का मन करता है .............. कोई लाइन छुट तो नहीं गयी ये डर बार बार लगा रहता था जिस की वजह से मुझे कई बार बैक प्रोसेस भी फालो करना पड़ा ................... अच्छा ही नहीं बहुत अच्छा पोस्ट .......

के द्वारा: Amresh Bahadur Singh

भाई जान बहुत अच्छा लेख.बहुत -बहुत बधाई हो इस नए लेख के लिए दोस्ती और दुश्मनी में जयादा फर्क नहीं होता है.दुश्मनी हम उन्ही से करते है जो हमारा दोस्त होता है और हमें हमेशा ये याद रखना चाहिए इस दुनिया में परफेक्ट कोई नहीं होता हर इन्सान में कोई-न -कोई कमियाँ जरुर होती है. दोस्त भी एसे ही होते है,अच्छाई और बुराई दोनों ही होता है पर हम अच्छाई को ज्यादा देखते है,बुराई हो तो हम उसे अपना दुश्मन बना लेते है.हमें ये सोचना चाहिए हम किसी को दोस्त बनाते है तो उसकी अच्छाई और बुराई दोनों को अपनाना चाहिए.क्योंकि कोई दोस्त बुरा नहीं होता ,वो हमें लगने लगता है उस टाइम पर . मोरल :दोस्त के अच्छाई में अपना साथ दो और बुराई में भी अगर वो गलत करता है तो उसे प्यार से समझाओ .

के द्वारा: Deepak Srivastava

.प्रिय संतोष जी मन में समा जाने वाली कहानी ..काश लोग आपस के रिश्तों को बिना जांचे परखे ग़लतफ़हमी में आ कोई कदम न उठायें ...दुश्मन तो इस सब का ही फायदा लेता रहता है ..निम्न पंक्तियाँ सुन्दर सन्देश देती हुयी लगता है मुंशी प्रेम चाँद की कहानी पढ़ रहे हैं ...आभार bhramr 5 पापी तो हम दोनों ही हैं ,..ईर्ष्या और लालच में अपनी जड़े ही काटते रहे ,..अब देखो जिस बेटे के लिए छल,कपट सबकुछ किया,…. उसीने पैर तोड़ दिया ,.कोई पूछता है तो बताता हूँ कि गाय ने मारा,….भगवान हमको ठीक ही सजा दे रहा है,..पूरे गाँव को टुकड़ों में बांटने का घोर पाप किया है हमने ,..अपने फायदे के लिए बदमाशों को बढाया ,..वही अब नेता बन सबका खून चूस रहे हैं

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

के द्वारा: naturecure

आदरणीय अजय जी ,.सादर नमस्कार आपके विचारों को पढ़कर ख़ुशी हुई ,...जब हम गुण ढूँढते हैं तो आराम से मिलते हैं ,..बाकी इंसानी प्रवत्ति ही अवगुण खोजने की है ,. मैंने आपके दिए लिंक को पढ़ा था ,..बहुत सही बात की है आपने ,..सरकारी कामों में बेहूदगियां ही हैं ,...आम आदमी को राशन कार्ड ,पासपोर्ट बनवाने में कितनी परेशानी होती है ,..लेकिन आतंकिओं ,अपराधिओं के बड़े आराम से बन जाते हैं ,..कितने बांग्लादेशी हिंदुस्तान के नागरिक बन गए ,...नागरिकों के पास कोई प्रूफ नहीं जो आधार बनवा सके ,..ये योजना ही बेकार लगती है,.कुछ दिनों बाद दलाल आ जायेंगे इसमं फिर आराम से बन जायेगा ,..फिर चाहे वो पाकिस्तानी हो ,.या बंगलादेशी ,....कुछ हमारे भी बन जायेंगे ,.... यदि आपके पास समय है तो आप जरूर प्रतिक्रिया दें ,..किसी का भला बुरा कुछ नहीं है ,..जो अच्छा लगे वो करें ,.इससे आपके विचार ज्यादा फैलेंगे ,....साभार

के द्वारा: Santosh Kumar

के द्वारा: ATUL

भाई बहुत ही अच्छा लेख.आपकी लेख मुझे वर्तमान में हो रही सामाजिक बुराईयों से रूबरू कराती है . कहते है बुराई को हटाने के लिए लड़ना जरुरी होता है पर आपने नया ही तरीका नीकाल लिया है,वैसे हम जानते ही है कलम में बहूत ताक़त होती है जिसे आपने अपनाया है और देश की जनता को बुराईयों से जागरूक करा रहे हो. आज हमारे देश में अच्छाई और बुराई हो रहा है(अच्छाई कम है और बुराई ज्यादा) उसका जिमेवार केवल हम है इसका कारन हम बहूत ही जल्दी किसे भी व्यक्ति विस्वास कर बैठते है और वो व्यक्ति पावर आते ही अपने आपको भगवान् समझने लगते है इनमे अहंकार भर जाता है.हम अपने देश को भारत माता का दर्जा देते है पर उसको चलाने वाले को पता होगा इसका मतलब क्या होता है,उनको चयन करने वाले हम मूरख ही तो है . अब बहूत हो गया अब हमें जाग जाना चाहिए गलत और सही क्या है इसको समझना चाहिए और बुराईयों के खिलाप आवाज उठानी चाहिए तभी जाकर हम एक खुशहाल ज़िन्दगी जी पाएंगे.

के द्वारा: deepaksrivastava392

प्रिय संतोष भाई ....नमस्कार ! आपका यह अंदाज इस मंच पर आपको बाकी के ब्लागरो से जुदा करता है ....... वैसे तो इस मंच की चोंच -चर्चा की हरेक बात महत्वपूर्ण तथा गहरे अर्थ लिए हुए है ..... लेकिन मुझको अपने अंदाज की थ लाइने तो लुट कर ले गई :- जब भी टुन्न होते तो छंगू पूछता,…यार मंगू ये बता, मुझमें क्या कमी है ?……..और मंगू का जबाब होता था ,..यार तू अपनी छोड़,… ये बता मुझमें क्या कमी है ?…जब उतरती थी तो दोनों कहते थे ,..भाई ..नसीब अपना अपना ,..मोहन के नसीब में था परधान बनना,…कोई बात नहीं ,. कमाई तो हम भी मोटी कर ही लेंगे !!…………………अब मानोगे कि नहीं ? और आपको तो हम मान ही चुके है .... क्योंकि आपके अंदाज की नकल करके ही मैंने जागरण गांव की सभी महिलाओं की हड़ताल नामक लेख लिखा था ...... इसलिए आभार + शुभकामनाये और मुबारकबाद

के द्वारा: Rajkamal Sharma

श्री अवधेश जी ,.सादर अभिवादन आपने पहली बार कुछ लिखा ,..वो भी मेरे ब्लाग पर ,..इसके लिए आपका बहुत आभार ,.क्षमा मांगने वाली कोई बात ही नहीं है ,..आपने अपने विचार रखे ,..आपका स्वागत है ,...दरअसल समस्या बहुत गंभीर है और कई चीजें महत्वपूर्ण है ,.अतः समग्र चिंतन के साथ साथ सामजिक ,नैतिक जागरण अत्यंत आवश्यक होगा ,..केवल वेश्यालय खोल देने भर से ही समस्या ख़त्म नहीं होगी ,...यदि गंगा मैली हो रही है तो उसमें गिरनेवाले नालों को तो बंद करना ही होगा ,..लेकिन उन नालों के गंदे पानी को भी तो कहीं जगह चाहिए ,...कामुकता को जगाने के लिए बहुत से कारक हैं ,..केवल महिलाओं को दोष नहीं दिया जा सकता ,... आपने बेबाकी से अपने विचार रखे ..आपका पुनः आभार ,..समय मिलने पर प्रतिक्रिया देते रहें

के द्वारा: Santosh Kumar

मै पहलीबार कुछ लिख रहा हु गलत या गलती के लिए छमा कीजियेगा काम के भाव सभी में होते है पर ये जाग्रत जभी होते है जब की कुछ कामुक्ता जैसी चीजे देखने से अधिक्तर महिला को देखो , वो अपने अंग प्रदर्सन में लगी रहती है जिस से की पुर्सो की काम भावना भड़क उठती है और उसे सांत करने के लिए बलात्कार जैसे कार्य से भी नहीं डरता , ऐसा नहीं की किसी को अपनी इज्जत प्यारी नहीं है पर काम की वजह से अँधा हो जाता है और इस तरह के घिनोने कार्य कर बैठता है. आज हर जगह विदेशी माहोल फ़ैल चूका है , इस लिए वैस्याल्य खोलना चाहिए जो महिला शौख से या पैसे के लिए ये कार्य करती हो उनको लाएसेंस देदेना चाहिए, आज कल पुरुस भी महिलाओ की काम वासना सांत करने के लिए सेवा प्रदान कर रहे है एसा सुनने में आता है, वो भी पकडे जाने पर लाएसेंस देकर पुरुष वैस्यालय बना कर वहा भेज देना चाहिए तब जाकर ये बलात्कार जैसे केस शायद बंद हो पाए मै नियम और कायदों को नहीं जनता हू क्रपया गलती के लिए छमा करे, गलत हो डिलीट कर दे , अवधेश

के द्वारा: अवधेश

के द्वारा: gurmeet

के द्वारा: neeru

सेन्ही संतोष जी, आपकी इस पोस्ट पर कमेन्ट करने से पहले इसे कई बार पढ़ा क्योंकि आपने समस्या को बड़ी अच्छी तरह से समझते हुए क्रमबद्ध तरीके से प्रत्येक महत्वपूर्ण पहलुओं पर अपनी राय दी है और समस्या को सही तरीके से व्याख्यित करने की कोशिश भी. लेकिन हर बिंदु पर (शायद आप स्वयं भी इस बात से सहमत होंगे) अभी बहुत कुछ समझने और कहने की गुंजाइश है, कुल मिला कर एक अच्छी कोशिश की आपने और अंततः निष्कर्ष वही है कि इस मामले में कानून कुछ भी करे तब तक कुछ सकारात्मक न होगा जब तक समाज स्वयं संगठित प्रयास नहीं करता है. विषय इतना व्यापक है कि इसके अलग अलग पहलुओं पर गंभीर और सार्थक चर्चा होनी चाहिए समग्र में कुछ भी कह पाना सिर्फ भ्रम उत्पन्न करेगा. अच्छे लेखन पर बधाई!

के द्वारा: chaatak

"हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि महिलाएं पुरुषों से काफी कम हैं ,…" प्रिय श्री संतोष जी " कृपया पूरा पढ़ें जरूर ,..लेख थोडा लम्बा हो सकता है, लेकिन आपका स्नेह भी गहरा है ,. .." आपकी स्नेह शीलता ही यहाँ खीच लायी | आप जैसा विद्वान् जब किसी विषय पर चर्चा करता है तो उस चिन्तन में महत्त्व पूर्ण तथ्यों का समावेश होता ही है | अपनी अज्ञानता के लिए क्षमा याचना सहित मै यह निवेदन करना चाहता हु की यह विषय मेरी रुचियों व पहुच के बाहर है | अतह अज्ञान बस कुछ कह पाना उचित नहीं | पर कमेन्ट की पहली लाइन जो आपकी पोस्ट से ली है उस पर मेरा कहना है की लिंग अनुपात की विषमता के दुष्परिणाम को भोगने के लिए देश को अब चिंतन करना ही चाहिए | स्नेह व शुभ कामनाओ सहित

के द्वारा: Ramesh Bajpai

आदरणीय अशोक जी ,.सादर प्रणाम आप मुझ पर इतना स्नेह लुटाते हैं,...ये प्रणाम करके शर्मिंदा क्यों करते हैं ???? मैंने आपसे आज्ञा लेकर आपके ही विचार को थोडा आगे बढ़ने का प्रयास किया ,..आपने पूरे लेख का गूढ़ अर्थ बिलकुल साफ़ शब्दों स्पष्ट कर दिया है ,..बस सदैव आपके स्नेह का प्रार्थी हूँ .. असहमति भी नहीं है ,...आप यह कहते हैं कि कोई स्वेच्छा से नहीं आता ,..मैं कहता हूँ बहुत लोग स्व से दूर होगये हैं उनके लिए इच्छा ही सबकुछ है ,..मुझे प्रतिशत तो नहीं पता लेकिन इतना कह सकता हूँ कि कुछ लोग अपनी इच्छा से इस गंदे धंधे में आते हैं ,...नशा इसमें एक बहुत बड़ा कारक भी है ,.....इनका स्व सुप्त है तो स्वेच्छा का अर्थ ही क्या है .....और इससे ज्यादा खतरनाक तो यह है कि फिर इनकी प्रवत्ति आपराधिक हो जाती ,...इसके लिए पुरुष ज्यादा दोषी हैं लेकिन वही न ,..नारी ,पुरुष बाद में ..मानव पहले ,.कुछ न कुछ तो ... ..मैं आशा करता हूँ आप मेरे बाकि सारी बातें तो वही हैं ,..

के द्वारा: Santosh Kumar

आदरणीय संतोषजी सादर प्रणाम. पहले तो मै आपकी मनमोहक कलमकारी की तारीफ करना चाहता हूँ क्योंकि जिस कानून की बात में ठीक से समझा न सका आपने उसको विस्तार से समझाना चाहा है. ये मेरे लिए आपकी मदत है धन्यवाद. आप, न मै और न ही कोई सभ्य व्यक्ति कभी भी ऐसा चाहेगा की कोई इस गलत पेशे को अपनाये. काफी कुछ लिखा है आपने कानून के बारे में, मै समझता हूँ की गूढ़ अर्थ यही है को कोई भी इस पेशे में न आ सके और न ही कोई किसी को ला सके मगर जो इस पेशे से जुडी महिलाये बच्चे हैं उनको भी न्याय मिल सके. आप मेरी बात से सहमत नहीं है अवश्य हो सकता है.सहमति या असहमति विचारों की दिशा पर निर्भर करती है. आप की विचार की दिशा मेरे विचार की दिशा से भिन्न होगी.कोई बात नहीं, मगर मै आज भी अपनी बात पर टिका हुआ हूँ. "इच्छा" हर सम्पूर्ण पुरुष और नारी दोनों में होगी ही, यदि नहीं है तो वह सम्पूर्ण नहीं है. बात इसको संयमित रखने की है, कोई अधिक संयमित होता है कोई कम. जिसको आप स्वेच्छा कहते हैं वह कम संयमित महिला के लिए ही आपने उपयोग किया होगा जिसके कारण वह दोषी नजर आने लगी है. मेरे विचार में इसके लिए वह दोषी नहीं है हालात ही बता सकते हैं की क्या मजबूरी है. कभी वक्त से शादी नहीं होना,कभी काफी वक्त तक पति का दूर रहना या किसी महिला द्वारा ही बहकाना अब में और विस्तार में नहीं जाना चाहता. मगर मेरा दिल इस बात को नहीं मानता की स्वेच्छा.........

के द्वारा: akraktale

सन्तोषभाई नमस्कार ये लाईन हमारी रही नही है ईस लिये ईस विषय का ज्ञान हमारे पास नही है । फीर भी स्थानिक पेपेरों के ज्ञान के आधार से अपनी बात रखता हु । सरकार को अपने टूरिस्ट विभाग को सुचना देनी चाहिए के अपनी टूरिस्ट गाईड मे लिखना चाहिए की यदी आप मुम्बई घुमने आते हो, अपनी पत्नि के साथ, अगर आपके कोई मित्र या सगा यहां नही है तो अपना शादी का आल्बम साथमे लाओ ताकी आप जो गेस्ट हाउस या होटेल में उतरें हैं वहां हम रेड डालते हैं तो आप को असुविधा न हो । यदी कोई सही पेहचान नही है तो आप पति पत्नि होते भी आप अनैतिक व्यवहार के दायरे मे आ सकते हैं । यहां आम आदमी को क्या लेना देना वेश्या व्यवसाय के साथ । लेकिन वेश्या का कानून आम आदमी को भी लपेटे मे लेता है । बाहर से आये आदमी को क्या मालुम कौन सा गेस्ट हाउस या होटेल पोलिस के खराब लिस्ट में है । कानून को यहां पर जरा फीर से सोचना चाहिए । कोई भी व्यवसाय का सीधा संबन्ध है पेट से । समाज अपने सुविधा के अनुसार उसे नैतिक अनैतिकता का लेबल चिटका देता है । चोरी या डाका भी व्यवसाय ही है लेकिन वो दूसरों को नूकसान पहुचाता है । तो वो अनैतिक है । वेश्या व्यवसाय ऐसा नूकसान नही पहुंचाता । हां, दलिल हो सकती है की सामाजिक मूल्यों का नूकसान है । मेरे विचार मे सामाजिक मूल्य बने है आदमी की सुखाकारी के लिए । जिन्दा रेह पाने का सुख, पेट भरने का सुख सब से ज्यादा एहमियत रखता है । सरकार और समाज मिलके ईस व्यावसाय को सही रूप दें उसमे ही सब की भालाई है ।

के द्वारा: bharodiya

गुरुदेव,.सादर प्रणाम आपको धन्यवाद देकर मैं आपके स्नेह को हल्का नहीं कर सकता ,.... मुझे पता ही नहीं था कि मैं लिख भी सकता हूँ ,..बस परिस्थिति वश भड़ास निकालने के लिए लिखने लगा ,.दैनिक जागरण में कुछ पत्र लिखे,.छपे भी ..फिर जल्द ही छोड़ भी दिया ,...लेकिन आदरणीय निशाजी के प्रोत्साहन से दुबारा लिखने लगा और आप सबसे प्रेरणा और आशीर्वाद लेते हुए अपने मन के विचारों को कीबोर्ड पर उतारने लगा ,..आपको पसंद आया तो निश्चित ही कामचलाऊ से अच्छा ही लिखता होउंगा ,..बस आप सब से विनती है ,...आशीर्वाद सदैव बनाये रखना ,.. यदि अच्छा न लिख सकू तो गलतियों को बताना और सुधरवाना गुरु की जिम्मेदारी है ,.मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है ,..आप अवश्य ही ऐसा करेंगे ,... आपका ..संतोष कुमार

के द्वारा: Santosh Kumar

के द्वारा: raju

के द्वारा: vicky

के द्वारा: neeru

संतोष जी ; आपके नायक ने आपबीती में लगभग हर पहलू को छुआ है ! यही यथार्थ भी है ! बिडम्बना भी ! हर भ्रष्टाचारी के ' जन्म ' का ऐसा / ऐसे ही कारण है / हैं ! कहीं कोई खुद अपनी अनैतिक अभिलाषाओं का दास है , कोई परिजनों की आवश्यकताओं / मांगों के आगे विवश , कोई उन विभागों में कार्यरत है जहाँ बने रहने/ जीवित रहने के लिए ऊपर वालों को वेतन से भी अधिक चढ़ौत्री चढ़ाना जरूरी होता है ! और एक बार भ्रष्टाचरण का जन्म हुआ नहीं कि रावण सा अमर हो आने वाली पीढ़ियों के रक्त में घुल जाता है ! त्रेता में रावण कि केवल भौतिक मृत्यु हुई थी ! किन्तु रावण अमर था सो अमर है ! थोडा थोडा हम सबके अन्दर ! हाँ राम को अमरत्व का वरदान नहीं था ! इसीलिये रावण हमारे अन्दर जीवित है और राम मूर्तिस्वरूप मंदिरों में प्रतीक्षित ! भौतिक मृत्यु को समक्ष /निकट देख हम सब रावन की ही तरह राम/ सत्य की महिमा को स्वीकार रहे होते हैं !

के द्वारा: Charchit Chittransh

प्रिय संतोष जी लाजबाब सम सामयिक प्रस्तुति व्यंग्य से परिपूर्ण अपना हाथ हथेली रेखाएं सब वे इस रचना में देख सकते हैं भविष्य देख भी यदि यों ही भैंसे सा चरते ही रहे तो अंत में उनके पास शायद कोई कुत्ता ही बचे आप ने तो उनके पास ज्यादा कुछ बचा दिखा दिया -बोटी नोचने वाला ही पास होगा -निम्न पंक्तियों में सार भरा है - सुन्दर -बधाई हो भ्रमर ५ खैर मेरी छोटी लड़की ने कुछ समझदारी दिखाई ,..हालांकि जब उसने मेरे ही दलाल कल्लू चायवाले से शादी की तब मुझे बहुत गुस्सा आया था ,..लेकिन अब वही थोडा बहुत मेरे काम आ जाते हैं .. अब पेंशन से ज्यादा खर्चा तो मेरी दवाइओं का है ,.दिल ,जिगर ,फेफड़े तो कमजोर हैं ही ,..इतना मुर्गा खाने के बाद भी हड्डियाँ जबाब दे रही हैं ,…शुगर ,हाई ब्लडप्रेशर की क्या बात ,..जबसे ये निकम्मे आन्दोलन चले हैं ,..तबसे अचानक ब्लडप्रेशर लो भी हो जाता है ,…कुल मिलाकर बड़ी विपदा में हूँ ..

के द्वारा: surendra shukla bhramar5

के द्वारा: gullu asnani

संतोष जी हार्दिक अभिवादन , सुन्दर और सार्थक विषय आप का -जैसे एक बार सचिन तेंदुलकर ने शराब कम्पनी को अंगूठा दिखाया सब को वैसे ही करना चाहिए -हम उन्हें ही लेकिन क्यों दोष दें संतोष जी क्या ये हमारी सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती की इन नशे की चीजों के प्रतिबन्ध के लिए कुछ करे सब तो अपनी जेब भरने में -टैक्स कमाने में लगे -समाज रहे या जाये भाड़ में उन्हें क्या -..आप के निम्न विचार सुन्दर घर वाले भी अपनों को समझाएं ..ये हमारा दायित्व है ... खिलाडियों को हम प्रेरित करे आदर्श बनायें लेकिन गलत करें तो प्रतिरोध भी करें .... संभव है कि खिलाडिओं को इतना सोचने की फुर्सत न हो लेकिन उनकी छवि को लेकर सदैव सतर्क रहने वाले परिवार के लोगों को उनकी सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिकता का अहसास दिलाना ही चाहिए नहीं तो कल को कोई १२ साल का लड़का सड़क पर टुन्न होकर गाता मिल सकता है ,…. “किरकेट बदनाम हुआ — माल्या तेरे लिए ” सार्थक लेख बधाई

के द्वारा: surendr kumar shukl bhramar5

कल टी.वी. मे कुछ लडके एक नया गीत गा रहे थे । शब्द ये थे ----“ लाईफ ठीक है, टेन्शन नही है ।“ धोनी ईस जमात का हो सकता है । लेकिन अमिताभ ? बिल्कुल नही । उनमे ठेहराव है, हर आयाम से पुख्त है । लेकिन फिर भी वो महाराष्ट्र सरकार से भिड गये । मामला था शराब पिने की ईजाजत के लिये उम्र बढाना । उनको सरकार की शुभ-नीति ध्यान मे नही आई । ( १०० अशुभ-नीति के बिच १ शुभ-नीति आ जाती है ) उन को ध्यान मे आई आपनी पित्रु-भक्ति, अपने पिता की किताब । ( माफ करना मुजे नाम याद नही,और ऐसी किताबो का नाम याद ना रहे वही ठीक है ।) वो शायराना किताब है । शराबियो को बेहलाती है । उन के अनूसार शराब पीना आदमी का मौलिक अधिकार है । वो भूल जाते है भारत अभी पूरी तरह युरोप नही बना है । भारतिय समाज की कुछ वेल्यु बच गई है । यहा नशा और नग्नता को निची नजरो से देखा जाता है । अगर मै कहु की कपडे पेहनना या नही पेहनना वो तय करने का मेरा मौलिक अधिकार है, तो ? मै अपने अधिकार का उपयोग करके रास्ते पे नन्गा नाचने-गाने लगु “ लाईफ ठीक है, टेन्शन नही है ।“ , तो ? नही चलेगाना ?

के द्वारा: bharodiya

के द्वारा: surendra shukla bhramar5




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