हमार देश

एक आम आवाज

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Santosh Kumar


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कुछ बातें ,…बस यूं ही !

Posted On: 7 Jun, 2016  
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फालतू भाप !

Posted On: 7 May, 2016  
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देशद्रोह !

Posted On: 14 Mar, 2016  
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मूरखमंच ,…..सादर प्रणाम कलामजी !….(२)

Posted On: 3 Aug, 2015  
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मूरखमंच ,…..सादर प्रणाम कलामजी !….1

Posted On: 3 Aug, 2015  
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मूरख मंच ,…आदरणीय प्रधानमन्त्री जी !

Posted On: 26 Jul, 2015  
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असतो मा सद्गमय !

Posted On: 16 Jun, 2015  
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मूरखमंच ,…….सूखा !

Posted On: 8 Aug, 2014  
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मूरख पंचायत ,…..अंततः !

Posted On: 13 Jul, 2014  
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मूरख पंचायत ,….वाह मोदी आह मोदी !

Posted On: 13 Jul, 2014  
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मूरख पंचायत ,..सजा दंड !

Posted On: 13 Jul, 2014  
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मूरख पंचायत ,….निरुत्तर प्रदेश !

Posted On: 7 Jul, 2014  
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मूरख पंचायत ,…..सादर प्रणाम मोदीजी !

Posted On: 26 May, 2014  
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मूरख पंचायत ,…..चुनाव बाद !

Posted On: 24 May, 2014  
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मूरख पंचायत ,……और चिट्ठी !

Posted On: 11 May, 2014  
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मूरख पंचायत ,…..माँ और मोदी सरकार !

Posted On: 11 May, 2014  
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मूरख पंचायत ,…चुनाव चर्चा !

Posted On: 11 May, 2014  
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मूरख पंचायत ,……झूठी पिकनिक और …..४

Posted On: 30 Apr, 2014  
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मूरख पंचायत ,….झूठी पिकनिक और …..३

Posted On: 30 Apr, 2014  
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मूरख पंचायत ,……झूठी पिकनिक और …..२

Posted On: 30 Apr, 2014  
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मूरख पंचायत ,…झूठी पिकनिक और ..१

Posted On: 29 Apr, 2014  
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मूरख पंचायत ,….इदम् न मम !

Posted On: 10 Apr, 2014  
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मूरख पंचायत ,….अलख निरंजन !..

Posted On: 5 Apr, 2014  
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मूरख पंचायत ,……योग महोत्सव !

Posted On: 23 Mar, 2014  
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मूरख पंचायत ,…..राजनामा और -२

Posted On: 16 Mar, 2014  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

प्रिय संतोष जी, काफी दिनों बाद आपका आलेख एक नए कलेवर में पढ़ने को मिला. साथ ही आपको साप्ताहिक सम्मान की बधाई ! अपनी कई चीजों पर या कहें तो समग्र रूप से सबको सोचने और अपना कर्तव्य सही ढंग से निभाने को चेताया है वरना तो हम देख ही रहे हैं. अन्ना के आंदोलन का असर बस यही हुआ की कांग्रेस धराशायी हो गए और उनके कुछ चेले सत्ता में दाखिल हो गए. जनता तो आज भी निरीह है कल भी थी. मोदी जी भरपूर कोशिश कर रहे हैं पर पूर्ण सफलता से अभी कोसों दूर हैं. अब दोष किसे देना शिकन्दी को बनाकर ढाल अर्जुन, बना गांगेय का जो काल अर्जुन ... उसके आगे जो भी महाभारत में हुआ क्या आज भारत में नहीं हो रहा है? उंगलियां उठाना तो आसान है उसे मुट्ठी बना ताकत लाना अलग है. हम सभी उंगलियां ही उठा रहे हैं, मुट्ठी नहीं बना पा रहे हैं. 'वृथा है पूछना किसने किया क्या, जगत् के धर्म को सम्बल दिया क्या ! सुयोधन था खडा कल तक जहां पर, न हैं क्या आज पाण्डव ही वहां पर ?' 'उन्होंने कौन-सा अपधर्म छोडा ? किये से कौन कुत्सित कर्म छोडा ? गिनाऊं क्या ? स्वयं सब जानते हैं, जगद्गुरु आपको हम मानते है ।' 'शिखण्डी को बनाकर ढाल अर्जुन, हुआ गांगेय का जो काल अर्जुन, नहीं वह और कुछ, सत्कर्म ही था । हरे ! कह दीजिये, वह धर्म ही था ।'

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

संतोष जी स्नेहसिक्त अभिवादन स्वीकार करें । बहुत दिनों बाद आज फिर आपके वही तीखे तेवर देखने को  मिले, जिन्होंने सुराज आंदोलन में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हुए अपना सफल योगदान किया था । आज आपके स्वामी जी को जो भी सम्मान प्राप्त हो रहा है, उसमें निस्संदेह आपकी पैनी लेखनी और मूर्ख चौपाल की भी महती प्रतिभागिता रही है । विपक्ष पर नाराज़ न हों, सत्तापक्ष को उन्हें निंदक नियरे राखिये वाले भाव से ही लेना चाहिए । तेज़ रफ़्तार में अक्सर चाल बेढब होने का खतरा बना रहता है, जबकि विपक्ष चाल को संयत बनाए रखने का बढ़िया औजार साबित होता है । लिखते रहें, धन्यवाद ।

के द्वारा: आर.एन. शाही आर.एन. शाही

भारत में इस्लामी जिहाद दो नयें रुपों में सामने आया है. पहला लव जिहाद ( लिंग जिहाद) और दुसरा गुदा जिहाद (अश्लील शब्दों के लिए माफी चाहुंगा). इनमें से पहला लिंग जिहाद है, जिसमें मुस्लिम युवक हिंदू युवती से येनकेनप्रकारेण दोस्ती बनाकर उससे शादी कर लेता है. शादी के बाद बच्चे पैदा करके उसे सेक्स स्लेव्ह बनाकर अपने दोस्तो, रिश्तेदारों को नज़राने के रुप में पेश करता है. हिंदू लडकी झाँसे में आ भी जाए, किंतु अगर उसके पालक अगर समय रहते जागरुक हुए तो लिंग जिहादी को पुलिस के फटके पड़ने की संभावना तो शत प्रतिशत. उपर से कानूनी सजा मिलना अलग और 5-6 साल जेल की चक्की पिसना नसीब में. लेकिन सबसे खतरनाक है गुदा जिहाद. जी हाँ. यह इसलिए बहुत खतरनाक है की, गुदा जिहादी जबतक आपके करीब ना आए और स्वयं को बम से ना उडा़ दे, आप समझ ही नही सकेंगे की वह एक गुदा जिहादी था (अगर आप की मौत ना हुई हो और बच गए या धमाके में अपाहिज हुए, तो.) होता क्या है कि, मुस्लिम कट्टरवादी किसी गरीब मुस्लिम परिवार के 12-15 साल के बच्चे को बहला फुसलाकर, उसका दिमाग ब्रेनवाश करके तथा उसके माँ-बाप को खासी रकम देकर अपने साथ कर लेते हैं. बाद में उसके दिमाग में दीने इस्लाम और जिहाद की बातें इतनी ठूँस-ठूँस कर भरी जाती हैं कि, वह पुर्णरुपेण (सर से पाँव तक) जिहादी बन जाता है. और ऐसा बने भी क्यों ना? क्योंकि कुरान में तन, मन और धन से जिहाद करना जो सिखाया है, जी हाँ जिहाद अपने तन (शरीर), मन (दिमाग) तथा धन (पैसे) से करो. अब 12-15 साल के लड़के के पास ना तो मन (दिमाग) होता है और ना ही धन (पैसा). तो उसके पास जिहाद के लिए बचा क्या? केवल अपना तन (शरीर). और कुरान में यह भी लिखा है की अपने अंगप्रत्यंग (शरीर के सारे भागों से) जिहाद करना फर्ज है. तो इस जिहादी बच्चे के पास बचा क्या? सिर्फ गुदा. और शातीर कट्टरपंथी इसी का फायदा उठाते हैं. पहले उस बच्चे से गुदामैथुन करके अपनी हवस को शांत करते है और साथ ही तबतक उसकी गुदामैथुन करते है जबतक की उसकी गुदा इतनी चौड़ी ना हो जाए कि उसमें आर.डी.एक्स. तथा डिटोनेटर घुस जाएँ. एक बार गुदा के अंदर आर.डी.एक्स., डिटोनेटर वैगराह विस्फोटक सामाग्री फिट कर दी जाये, बाद में उसे रिमोट कंट्रोल से जोडकर उसका रिसिव्हर गुदा जिहादीके पिठ पर बाँध देते हैं. (पिठ पर बाँधने से गुदा जिहादी उसे छु नहीं सकता. और ऐसा इसलिए करते हैं की शायद आगे जाकर गुदा जिहादी बगावत करें तो भी उसके हाथ पिठ में बँधे रिसिवर तक नां पहुँचे और कट्टरपंथियों का उसे विस्फोट करने का अंजाम पूरा हो जाए) आगे गुदा जिहादी किसी भी भिड़भाडवाली जगह पर पहुँच गया तो उसे कट्टरपंथी अपने रिमोट कंट्रोल से उडा देते हैं. इसलिए प्रिय भारतीय नागरिकों, अपने आप को सँभालो. मुसलमानों की बस्तियाँ अपने पास ना बनने दें. मुस्लिम युवकों से सदैव सावधान (दोस्ती बनाने का केवल बहाना करें, ना की सचमुचके दोस्त बन जाएँ). अपने नजदिक किसी 12-15 साल के मुसलमान बच्चे को ना आने दें. (हो सकता है वह शायद गुदाजिहादी हो. क्या भरोसा?) अपनें बच्चों को मुसलमान बच्चों के साथ मेलमिलाप नां करने दें और उन्हें हमेशा दूर रखें. सदैव हिंदू सभ्यता का सम्मान, आदर करें. हिंदूराष्ट्र का अभिमान रखें. जय हिंद!

के द्वारा:

सादर प्रणाम! भ्रम में जीना हमेशा ही सुखद होता है.................................हम क्या थे और क्या नहीं थे? यह एक झूठ है और इसको बार-बार चिल्लाने से भी कोई मतलब नहीं है. यह तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जिससे हम रूबरू न हुए हो और बस पीढ़ी दर पीढ़ी विश्वास करते आये हो. इससे कहीं ज्यादा महत्पूर्ण यह है कि हम क्या है और क्या कर रहे हैं? सवाल यह नहीं कि अँधेरा फ़ैल रहा है. सवाल यह है कि दीपक बुझ रहा है परन्तु हम इसमे अँधेरे को दोष नहीं दे सकते. उसकी इतनी जरूरत नहीं कि वह प्रकाश को ख़त्म कर दे. हाँ यह तभी संभव है जब दीपक बुझने लगे. ऐसा ही कुछ भारतीय समाज में है. चारो तरफ लोग बुझे हुए दीपक लेकर चिला रहे हैं कि हम प्रकश के प्रतिक थे परन्तु अँधेरा ने हमें बुझा दिया. क्या यह संभव है? दीपक को बुझाया हमने है क्योंकि हमने न ही बाती बदली और न ही नियमित रूप से दीपक में तेल डाले. बस बुझा हुआ दीपक लेकर चिल्लाते रहे है कि यह दीपक है इसे सभी अपने घरों में रखों और तुम भी लेकर चलो और साड़ी दुनिया को चिल्ला-चिल्लाकर बताओ ताकि अँधेरा ख़त्म हो. यह क्या मुर्खता है? क्या संभव है इससे अँधेरा दूर भाग जाए. और सच में हम प्रकाशित दीपक लेकर चले है तो फिर चिलाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी और यदि हम ऐसा करेंगे तो यह भी हमारी मुर्खता होगी. अब आते है सीधे पॉइंट पर. हम बार-बार चिल्लाते है कि वेस्टर्न संस्कृति ने भारतीय संस्कृति को भ्रष्ट कर दिया. क्या यह संभव है कि जो अच्छा हो उसे बुरा कर दिया जाय, क्या संभव है कि दिन को रात में बदल दिया जाय.......................कहीं ऐसा तो नहीं कि हम रात को दिन मान बैठे, कहीं ऐसा तो नहीं कि हम अँधेरा को प्रकाश मान बैठे है, कहीं ऐसा तो नहीं कि हम किसी ख्वाब में है, कहीं ऐसा तो नहीं कि हम कोई बहुत बड़ा भ्रम पाल बैठे हैं....................

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

के द्वारा: vkboss1 vkboss1

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

सहज आग्रह पर मानव शुरू हुआ ……….. “…..हमारी मूरखता महज इतनी है कि सबको अलग अलग देखते हैं ,……हम धर्म जाति क्षेत्र भाषा में बंटकर भूल जाते हैं कि सब भगवान के हैं !………..ये हमारी मूल सोच नहीं है ,….आज के रावणों ने फूटी सोच हमारे अंदर ठूंसी है !….तभी वो महामूरख और हम मूरख हैं ,…….दुनिया में हर किसी का पूरा हिसाब होता है ,…..हर अन्याय पाप का बदला ब्याज सहित मिलता है !……..हम सब एक हैं ,…एक ही हैं ,…और हमेशा एक रहेंगे ,…क्योंकि परमपिता एक है ,….वही एक अनेक है ,…..हम उसकी प्यारी संतानें हैं !……… परमपिता के लिए एक होकर काम करना हमारा परम कर्तव्य है !…….उनके दिखाए रास्ते पर चलकर ,..उनके दिए साधनों से अपनी और सबकी जीवन यात्रा सुखी करेंगे ,……….हमारी औलादों को बीमा नहीं हमारा सच्चा पुरुषार्थ चाहिए !……माताओं के दुलार के साथ बच्चों को उनकी निर्माण शक्ति चाहिए ,….परमपिता ने मानव को उत्थान के लिए ही बनाया है ,…मानवता का उत्थान दिव्यता में होगा ,…..देवभूमि भारत से दिव्यजगत का मधुर नाद संसार में गूंजेगा !…….त्राहि त्राहि करती मानवता उठकर दिव्य सुखसागर का आनंद लेगी ….आज जग पालनहार कन्हैया फिर आएगा !……हमारी आत्मा को जगायेगा !…….हमें स्वागत में समर्पित होना चाहिए ,…” जागेगा सोया इंसान, जागेगा सबका ईमान भरे उजाला श्याम गात में ,रखवाला सबका घनश्याम अब आओ तुम कन्हाई, रात पूरी होने आई ,…बोलो राधेश्याम राधेश्याम राधेश्याम जय राधेश्याम सीताराम सीताराम सीताराम जय सीताराम राम राज्य की परिकल्पना कितनी सुखद लगती है संतोष जी लेकिन लगता है मुग़ल काल वापस न आ जाये ! हर बार की तरह सशक्त प्रस्तुति !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

कांगेस से मिलो भौजी !…..पूरा देश खाकर भूखे रहने वाले मगरमच्छ पांच रूपये में हमारा पेट भरते हैं ,…लुटेरे हमसे गू से गिरा मजाक करते हैं !… हमको लूटकर गरीब बनाया ! …..हमारी सम्पन्नता खाने वाले विदेशी दलालों की लूटों से मंहगाई आसमान पर है ,….हमारा अकूत माल उड़ाने वाले हमको भिखमंगा कहते हैं फिर भीख फेंककर जयकारे लगवाते हैं ,….लुटेरी सत्ता व्यवस्था उखाड़कर गद्दारों से अपना काला धन लेंगे !….अपनी व्यवस्था होगी ..तब हमारी गरीबी जड़ से मिटेगी ,…सबलोग सुखी संपन्न होंगे !..”………….एक युवा ने महिला के आंसू पोंछे तो दूसरा भडका . “….. सौ दिन में मंहगाई मिटाने का वादा कर हमारी छाती पर चढ़े थे !….अब रोजे पेट्रोल डीजल चढाते हैं ,..हिन्दुस्तान में केवल मौत सस्ती बची है !..बिना इलाज के मरो ,..दवाई खाकर मरो ,..सड़क पर कुत्तों की तरह मरो ,….जहर सरकारी खाने से बच्चों को मारो ,…अब राक्षसराज का अंत तुरंत जरूरी है ,….लेकिन खाट सरकती देखकर मक्कार चादर का जुगाड़ लगाते हैं ,……पूरा भारत भारत स्वाभिमान से जुड़ा है ,…हमारा उत्थान होकर रहेगा !…”बहुत दिनों के बाद एक बार फिर से सशक्त रचना के साथ प्रकट हुए हैं महारज ! बहुत सटीक , लेकिन राक्षस ज्यादा जिन्दा रहते हैं श्री संतोष जी , येन केन प्रकारेण अपने लिए जड़ी बूटी का इंतज़ाम कर लेते हैं और फिर सांस आ जाती है ! सपा , बसपा , जैसे लोग जड़ी बूटी ही तो हैं कांग्रेस के लिए

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

मित्र संतोष जी, मन की बात बताता हूँ कि आपकी इस सेव करके रखने योग्य कृति को पढ़ने के बाद काफ़ी देर तक जड़वत बैठा रहा हूँ, फ़िर कुछ लिख रहा हूँ, क्योंकि कुछ तो लिखना ही पड़ेगा । सर्वव्यापी आम मानव में जैसे-जैसे आपकी भावनाओं को समझ पाने की क्षमताओं का लोप हो रहा है, उसी अनुपात में आपके तत्वज्ञान में वृद्धि होती जा रही है । दोनों विपरीतगामी हैं, कोई मेल नहीं है । परन्तु जिस प्रकार प्रभु श्रीमन्नारायण एवं अन्य देवगण भारतभूमि के कल्याणार्थ अपने कर्मपथ से विचलित हुए बिना सतत प्रयत्नशील हैं, आपको भी उनकी कृपा से प्रभु के आदेशानुसार अपने मार्ग से विचलित हुए बिना चलते जाना है । पीछे कौन है, कोई है भी या नहीं, इसकी चिन्ता करना व्यर्थ है । अपना कर्म ही अपने साथ होता है, शेष जगत मिथ्या था, मिथ्या है, और मिथ्या ही रहेगा । शुभकामनाएँ !

के द्वारा:

आदरणीय संतोष जी, सादर ! ""“..देखिये भाई !……अंग्रेजों ने बहुत दिमागी मेहनत से जाल बनाया है ,…हमने खून पसीने से मजबूत किया है ,…अब कोई कमजोर करे तो उसका इलाज करना पड़ेगा न !……..भ्रष्टाचार का मुद्दा गरमाया है ,…बाबा के साथ अन्ना भी गरजे ,… कुछ तो उछलकूद दिखानी होगी !….नयी पीढ़ी के लुटेरों को ज़माना भी है ,…. निचले बाबुओं को जरा सा कसकर अपनी पीठ ठोकना पड़ेगा !…वैसे भी तंत्र धीरे से ठेके पर होगा ,……दलाली हमतक पहुचाने के लिए केवल अफसर रहेंगे ,.. कर्मचारी केवल हमारी कंपनी रखेंगी ,………हम अपनी सल्तनत बचाने के लिए किसी की बलि भी दे सकते हैं ,……पूरी राजनीती हमारे कब्जे में है ,..शासन हमारा गुलाम है ,…हमें पूरी सरकारी फ़ौज को फांसी पर लटकाना पड़े तो लटकायेगे !……. आपसी नूराकुश्ती में विपक्षी के साथ अपने को भी पटकना पड़े तो भी परवाह नहीं , ……लेकिन लोकतंत्र आजाद नहीं करेंगे !""" ये चोर-लुटेरे अभी भी अपने सपने में मस्त हैं ! इन्हें ये नहीं पता की इनके पैरों के नीचे की जमीन खिसक गई है ! ऊपर शून्य आकाश और नीचे अतल पाताल इनका इन्तेजार कर रहा है !

के द्वारा: shashi bhushan shashi bhushan

आदरणीय संतोष जी, सादर ! ""“…दूसरा जबाब राहुल बाबा का है ……पहली तीन लाइन क्वाईट मुस्कान है ,…..फिर लिखा है ,…मूरखों का सम्मन गया भाड़ में.. हमने ये फाड़ा ,….वैसे हमारी भी फटी है ,…लाइन में लगकर एज निकल गयी ,…कबतक संगठन में कील कांटे लगाएंगे भाई ,……बिना गद्दी के वो माफिया की पुत्री भी नहीं तैयार है ,….हजारों करोड़ खर्च हो गया ,.चार बार गेटअप बदला ,.. दसियों पैंतरे दिखाए लेकिन बात नहीं बनी ,..मैं ज्योतिष में विश्वास नहीं करता लेकिन देशभक्त लोग राहू-केतु की तरह लगते हैं ,…..लगता है दीदी को भी आगे लाना पड़ेगा ,.उसके बाल मम्मी ने दादी की तरह कटवाए हैं ,….. कुछ साजिश की खुशबू भी आती है ,….चलो आखिरी से पहले एक दांव और देखते हैं ,…""" अब तो बस जूता मारना ही बाकी है ! उसका भी दिन साइत नजदीक आता जा रहा है !

के द्वारा: shashi bhushan shashi bhushan

अब स्वागत हैं सर्वज्ञानी भोंपू श्री नकविजय सिंह का ,….शातिर और गधे चेले को भी प्रधानमंत्री का ख़्वाब दिखाते हैं !…..फिर पूरा करने में एड़ी छोटी का जोर लगाते हैं ,..ओसामा इनके जी जा थे ,..इनकी गुलाटियों में बहुतै मजा है ,…कभी हिन्दू को आतंकी बनाने में धोती खोलते हैं ,..कभी आतंकदेव की पूजा परिक्रमा करते हैं तो …. उनको फांसी से जश्ने बहार में भी डूबते हैं ,…..मालिक भक्ति में इतना लीन हैं कि सैकड़ों लाख करोड़ की लूट नहीं देखते ,…..स्वामीजी की मानव राष्ट्र सेवा इनको ठगी का धंधा लगता है !..”…………दो चार युवाओं की चप्पल हाथ में दिखने लगी ,….सयानों ने घूरा तो पंचायत की मर्यादा लौटी …सूत्रधार और आगे बढे हहहाआआअ ! एक एक करके सबकी लंगोट खोल दी आपने श्री संतोष जी ! लेकिन लंगोट खुलती जाए , क्या फर्क पड़ने वाला है इन्हें जब तक कानून इनकी और इनके जीजा की जेब में है ?

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

जितना विलम्ब होगा अंजाम उतना ही भयानक होगा ,…इनके नामों का तिनका भी नही बचेगा ,…यदि बचा तो पुतले फूंकने के काम आएगा ,…..लुटेरी सत्ताओं का नशा उतारने के लिए गरीब जूतों की कमी नही होगी ,….भगवान की लाठी इनको प्रतिक्षण मौत मांगने को विवश कर देगी ….आक्रोश में फिर भगवान ही याद आये …. हे भगवान फिर जल्दी मिलो !….अब ठीक से मिलना !……हम जड़ मूरख नही बदलेंगे ,…..तुमको हमें बदलना होगा ,..तुमको अपने नियम भी छोड़ने होंगे ,…..हम हमारे देश के साथ मानवता दांव पर है ……..कितनी बार कहें …. सिर्फ तुम हमारे जिम्मेदार हो !…..टूटी कलाई प्रमाण है कि तुम अपना काम ठीक से करते हो ,….हमें भी तो सिखाओ !…तुमने ही मूरख को अपने साथ जोड़ा है ,……योगिराज भर्तहरी ने लिखा है .. मूरख को ब्रम्हा भी नही समझा सकते !…..परमब्रम्ह से इस लाचारी की अपेक्षा नही है ,..तुम सर्वशक्तिमान हो ,..तुम्हारी सर्वव्यापक सत्ता सब कुछ कर सकती है ,…….मूरख हर बार हर रूप में तुम्हारा स्वागत करता है प्रभु !….. उस लायक तो नही फिरभी तुमको बारबार हरबार हरपल के लिए मिलना होगा ,…मिलना ही होगा प्रभु !ऋषि मुनियों की धरती भारत में बाहर की कंपनियों ने इस तरह का जाल बुन दिया है की आम आदमी भी और्वेद पर भरोसा करने से कतरा रहा है ! बहुत सही आलेख श्री संतोष जी ! हमेशा की तरह बेहतरीन सोच पर लिखा लेख

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

हम तो मूरख ही हैं ,… छबीस ग्यारह के भयानक घाव का आक्रोश दुनिया ने देखा ,….. क्या हुआ ,..आतंकी अपना काम करते रहे ,….हम सब भूल गए !……एक मुर्गे को फांसी पर लटकाकर आदमखोर देशभक्त बनेंगे !……..तब महाघोटालों मंहगाई लूट पर जनआक्रोश था ,….किस्सा घुमाया भ्रष्टाचार बचाया !…..अब फिर बचानी है ,…फिर कुछ तूफानी करना पड़ा !……..लूटतंत्र में सरकार आतंकी अपराधी सब घड़ी की सुई की तरह मिलकर चलते हैं ,….. पहली नजर में हिजबुल मुजाहिदीन को जिम्मेदारी सौंपी है ,….दूसरी तीसरी चौथी नजर का अंजाम सलाह मशविरा करके बता देंगे दोबारा से मुरख्मंच की उपस्थिति देखकर मन प्रसन्न हो रहा है की कोई है जो दिल की बात लिखता है ! बहुत सुन्दर आदरणीय श्री संतोष जी !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: सुधीर कुमार सिन्हा सुधीर कुमार सिन्हा

मान्यवर संतोष जी, सादर ! ""हम सब यात्री हैं ,…अपनी यात्रा सुखद बनाने का जिम्मा हमारा ही है , ..अपने कर्म पुरुषार्थ से झूठा जाल तोडना ईश्वर की अखंड आज्ञा है ,..तब राक्षसी काले कबूतर फुर्र हो जायेंगे ,….हमारी सुख शान्ति हमारे सुकर्मों से आएगी ,….सुकर्म धर्म से पनपते है ….मानव सेवा हमारा और मानवता की रक्षा ईश्वर धर्म है !…..सब अपने धर्मों का पालन करेंगे !…”……….."""" . बिलकुल ठीक है- हम सब इस जीवन पथ के यात्री ही हैं ! जीवन के धरातल पर इतनी राहें हैं और उन राहों की इतनी शाखाएं हैं, की जरा सा भी हम भटके तो फिर सम्हालना मुश्किल हो जाता है ! एक क्षण की लापरवाही हमारा सम्पूर्ण जीवन नष्ट-भ्रष्ट कर सकती है ! सादर !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

आदरणीय संतोष कुमार जी, वर्तमान सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक विसंगतियों पर कथात्मक-संवाद शैली की मार्मिक अभिव्यक्ति; साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! "….बड़े अच्छा करेंगे तो बच्चालोग जरूर समझेंगे …. अंग्रेजीराज का जहर बहुत भयानक है ,…. इंडिया को भारत में मिलना होगा ,… सब एकै बीज है !…अपराधियों के राज में सब शिकार हैं …गिनती के गद्दारों ने लोकतंत्र खंड खंड करा है ,..यही लूटतंत्र चलाते हैं ,…बलात्कार व्यभिचार लूट अत्याचार अन्याय के गुनहगार यही गद्दार हैं ,……… गुनाहों से देश दुखी है ,……गली सड़क बाजार दूकान मकान थाना दफ्तर कुछ सुरक्षित नही बचा ,..इंसान बच गया तो जहर खा पीकर बीमारियाँ खा लेंगी !…..बचना है तो सबको बदलना होगा !..”………….गोविन्द रुका तो आसरे काका ने फिर कमान संभाली"

के द्वारा: Santlal Karun Santlal Karun

सीधी बात हैं भैय्या ,…..बिना राक्षसी व्यवस्था बदले कुछ नहीं बदलेगा ,..ई लुटेरे घोर पाप करते करवाते रहेंगे ,…हमारी इज्ज़त आबरू कुचलेंगे ,…हमारा धन इनकी तिजोरियों की शोभा बढ़ाएगा ,अंग्रेजी व्यवस्था में विदेशी ऐश करते हैं !…………………..बिना राजतंत्र दफनाए व्यवस्था नहीं बदलेगी !…….. एकजुट समाज ही गद्दार राजतंत्र बदलेगा ,…….. हमको सुख चैन सुरक्षा न्याय चाहिए तो एकसाथ नेकी की राह पर चलना होगा ,…ई हमारा सुभाग है कि इंसान बने ….बड़े सुभाग से भारतीय बने ,…बहुत बड़े सुभाग से साक्षात भगवान … तपस्वी ऋषियों महापुरुषों ज्ञानियों से प्रकाश मिला !…..हम मूरख औकातहीन प्राणी है ,…..हम शून्य हैं फिरौ बोलना करम धरम है तो हम बोलेंगे .. और पूरा बोलेंगे !…” … अभी थोडा थोडा अँधियारा है , सुबह होने और सूरज निकलने में अभी कुछ देर बाकी है श्री संतोष जी ! किन्तु इतना तो तय है की सुबह जरुर ही होगी !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

प्रिय संतोष जी, सादर अभिवादन! अब आजसे दूसरी चर्चा शुरू हो गयी है ... देश खतरे में है! यहाँ पहले आर्थिक खतरा था ...उसके बाद सामाजिक खतरा बढ़ा अब सामरिक खतरा का दबाव बढ़ा है ...इसके लिए अब हम सबको एक होकर देश के लिए कुर्बान होना पड़ेगा ... सब्सिडी नहीं लेनी होगी, टैक्स ज्यादा चुकाना होगा, रेल भाड़ा भी ज्यादा देना होगा ...क्योंकि पकिस्तान को जवाब देना है. क्रिकेट में तो हम हार गए युद्ध में पाकिस्तान को हराना है!,... पता नहीं आम आदमी अब सांस भी ले सकेगा या नहीं! ये शातिर नेता हमें कहीं का नहीं छोड़ेंगे! हम आपस में लड़े कटे मरे यही इनको चाहिए. पकिस्तान भी हिन्दुस्तान का दर दिखा कर पकिस्तान की आम जनता को बेवकूफ बनता है और हिन्दुस्तान भी वही कुछ करता आया है! आप की आवाज बुलंद रहे और लोगों को आपस में बांधने का प्रयास करते रहें! हिंदुस्तान सोने की चिड़िया था है और आगे भी रहेगा बशर्ते किहम सब में देश प्रेम की भावना जिन्दा रहे! आभार सहित!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

हमको नशे अपराध अंग्रेजियत बढ़ाकर लूटने वाले राजतंत्र को बदलना होगा ,……अत्याचारी अन्यायी भ्रष्टतंत्र में कौनो आशा निरा मूरखता है …. आज नारी सम्मान और मानवता गंभीर घायल है…लूटतंत्र में सिपाही से लेकर थानेदार जज सब बिकते हैं ,. …,..डरावनी कानून व्यवस्था में मालदार दरिंदे जेल भी पहुंचे तो भी सेवा मिलती है ,………ताकतवर को कोई सजा नही दिला सकता …अपराधी पुलिस पर खादी जूते की नोक है ,… सफेदपोश नेता सबसे बड़े अपराधी है ,……गद्दार राजतंत्र दरिंदों का साथी है ,.. बार बार मानवता के चीथड़े उड़ते है…… देश के करता धर्ता गांधी चोर लुटेरे देशद्रोही हैं ,……देश की सम्पन्नता चंद गद्दारों की बपौती है

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

बांकेबिहारी की लीला अद्भुत है ,……त्रिलोकस्वामी के आगे हम भिक्षुक बन जाते हैं ,…. स्वार्थवश ही सही हम अहंकार से पूर्णतया मुक्त हो जाते हैं ,..पहले बांके बिहारी से कुछ कहने की इच्छा और साहस नहीं था ,… लेकिन वो तो सुन चुके थे …… लगा जैसे कह रहे हों …. ‘तुमने मेरी बात कब मानी जो मैं तुम्हारी मानता फिरूं’…………..उनको अनसुना करते हुए फिर सवालों की झड़ी लग गयी ……..यह राक्षस राज कब तक चलेगा प्रभु !…दरिंदगी का अंत कब होगा ,….हमारी माँ बहनों को घोर पीड़ा कब तक गोपाल !!!….उन्हें इन्साफ कौन देगा !…..राक्षसों से इन्साफ मांगने का हक भी नही है ,…लुटेरे बेदर्दी से कुचलते हैं !……ये बलात्कारियों के साथी हैं !…..वहशी सत्ता कब तक हमें सताएगी …हम मूरख अज्ञानी सही ….लेकिन तुम हमेशा उद्धार करते हो ,…हम अधूरे मानव अपने स्वार्थ अहंकार लालच वासना में धर्मविमुख होते हैं ,…..फिर भी तुम हमें नहीं छोड़ सकते हो ,…रक्षा करना ही आपका धर्म है ……..उत्तर मिला ….छोड़ा कब है !मूरखराज तुम सब मेरे ही पुत्र हो ,.मैं हमेशा सबके साथ रहता हूँ लेकिन तुम नहीं देखते हो !…..जब तुम मुझे भूलते हो तो तुमको भी भूलकर पीड़ा का आनंद लेता हूँ ,…. अलग अलग होकर राक्षसों को राजधानियाँ तुम सौंपते हो !…….अत्याचार के खिलाफ जो आवाज नहीं उठाते वो भी तो अत्याचारी हैं ,…राक्षसों के खिलाफ एक नहीं होने वाले भी तो राक्षसी हैं ,..तुम्हारी मुसीबत का हल तुम्हारी उँगलियों में है ,….इसमें इतनी ताकत है कि उसके सैलाब में अत्याचारी तिनके की तरह उड़ जायेंगे !….लेकिन ऊँगली को दिमाग ही चलाता है ,..दिमाग से राक्षसी मायाजाल निकालकर मुझे बैठाओ !..सबकुछ दूंगा ,…….सच्चे कर्मों के ऊंचे फल ही मिलेंगे ,.. दुनिया में कुछ भी तुम्हारा नहीं है ,……लेकिन सबकुछ तुम्हारा ही है ,…तुम एक होकर राक्षसी ताकतों को भगाओ,…..फिर हर गाँव सैफई जैसा बनाना ,…हर घर लक्ष्मीनिवास बनेगा ,.पहले उस लायक तो बनो !…….बलात्कारी दरिंदों को प्राणदंड मैंने भी दिया था ,…फिर घोर दंड मिलेगा !…मेरी व्यवस्था से कभी कोई नहीं बचेगा !….तुम अपनी व्यवस्था देखो ,……..गिरोह बनाकर मासूम को कुचलने वाले बार बार प्राणदंड के अधिकारी हैं !……….राक्षसी सत्ता यह नियम नहीं बनाएगी ,… वो तो सभा भी नहीं करेंगे ,.. सोचते होंगे सर्दियों के दो चार दिन में तापमान और गिर जायेगा ,आक्रोश भी ठंडा हो जायेगा !……….वो खुद बलात्कारी हैं !..नियम बनाया भी तो पालन नहीं होगा …..राक्षसों के राज में बलात्कारी भ्रष्टाचारी अत्याचारी हमेशा बेख़ौफ़ ही होंगे ,…गाय गंगा भगवान हिन्दुस्तान के दुश्मनों को राज का अधिकार नहीं है ,… अधर्मियों की राजनीति धर्म सभ्यता संस्कार सब मिटाना चाहती है ,….ये देशद्रोही भारतवर्ष को उस मनमोहन की तरह बिना रीढ़ का गुलाम बनाना चाहते है , शायद गौरव गाथा लिखने का समय सन्निकट है श्री संतोष जी ! अपनी अपनी आहुति तैयार रखिये , आशा है ज्यादा इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा ! और इन्तिज़ार करना ही क्यूँ पड़ेगा जब आप भगवान् बांके बिहारी लाल जी का आशीर्वाद लेकर आये हैं ! राधे राधे …

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

गांधी लोग विचित्र प्रजाति के राक्षस हैं !….ऊपर से पूर्ण अहिंसक अंदर से खतरनाक मगरमच्छ ,..इनके राज में अपराधी बलात्कारी भ्रष्टाचारी निर्भय हैं ,..खुद सबसे बड़े अपराधी हैं ,.. अपराध से पक्की रिश्तेदारी होगी ,…..बगुलाभगती साजिशों से इन्होने देश खा लिया ,…विदेशी डालर के बराबर वाला रुपया इनके राज में पचपन गुना गरीब हुआ,…इनकी तिजोरियों में हमारी सोने की चिड़िया कैद है ,…..खूंखार विदेशी लुटेरों के बाद भी एक भारतीय कमाकर दस परिजनों को खिलाता-पिलाता पढाता-लिखाता था !…इनके भयानक लूटराज में सब कमाकर भी एक माँ बाप को नहीं पाल पाते है ,..भ्रष्टाचार व्यभिचार शिष्टाचार बन गया है ,…..भगवन ने हमें सबकुछ दिया ,…पूरी दुनिया से बहुत ज्यादा संपन्न बनाया ,.लेकिन लुटेरों की साजिशों ने खोखला कर दिया !… बहुत सौभाग्यशाली हैं आप श्री संतोष जी ! आपको प्रभि श्री कृष्णा के दर्शन हुए और आशीर्वाद मिला ! आपका मूराख्मंच , लगता है इस देश को राक्षसों से मुक्त करके ही मानेगा और इस देश को कुछ स्वनाम धन्य लुटेरों से मुक्त होना ही चाहिए , अन्यथा आज़ादी पूरी नहीं होगी !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

बलात्कार रोकना है तो हमें पूर्ण महाक्रान्ति करनी होगी,…..महापुरुषों के आदर्शों पर चलकर अपना स्वाभिमान जगाना होगा …..एकजुट होकर धर्म को सच्चे अर्थो में धारण करना होगा !….अपनी सच्ची परम्पराओं ,सभ्यता ,संस्कृति से जुड़ना होगा !…..अपने साथ सामजिक बदलाव लाकर इस बलात्कारी लूटतंत्र को उखाडना होगा,…लुटेरी अंग्रेजी व्यवस्था को उखाड़कर भारतीय व्यवस्था बनानी होगी !……बलात्कारियों को तुरंत कठोरतम सजा देने का कानून होना ही चाहिए ..लेकिन मूरख यही मानता है कि कोई एक दो कानून हमारी सुरक्षा नहीं कर सकते हैं ,…हमें राक्षसी लूटतंत्र बदलना ही होगा ! प्रिय संतोष जी, सस्नेह वृतांत अच्छा लगा. राधे राधे

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

सादर प्रणाम! ,…….अब पूर्णक्रान्ति होकर रहेगी ,…हम गद्दार लुटेरों को भगाकर अपने धन के साथ संस्कार भी वापस लायेंगे ……हम अपने साथ पूरे देश को बदलने जोड़ने खातिर भरपूर जोर लगाएंगे !…..कल हम सियासतबाजी को फिर नंगा करेंगे ,…..उसके बाद मूरखों का सामजिक कार्यक्रम चलेगा ,…हम हिन्दुस्तानी मिलकर अपनी कमियां ठीक करेंगे !….राम कृष्ण बुद्ध नानक महावीर का देश मानवता के दुश्मन राक्षसों को उखाड़ फेंकेगा !..हम इनके फैलाए राक्षसत्व को मिटाकर रामराज्य लायेंगे !…..धर्मप्रिय हिन्दुस्तान फिर से महाशक्ति विश्वगुरु बनकर रहेगा !……बोलो भारत माता की जय !..”……………..ठंड से पीले पड़ चुके मूरख चेहरों पर जोशीली लालिमा छा गयी …भारत माता की जय !….वन्देमातरम !!..इन्कलाब-जिंदाबाद के गगनभेदी नारे सुस्त फिजा में देर तक उत्साह घोलते रहे….वन्देमातरम ............... न लिखो कामिनी कवितायें, न प्रेयसि का श्रृंगार मित्र। कुछ दिन तो प्यार यार भूलो, अब लिखो देश से प्यार मित्र। ……… अब बातें हो तूफानों की, उम्मीद करें परिवर्तन हो, मैं करूँ निवेदन कवियों से, लिख क्रांति के अंगार मित्र। ……… मुझको लगता है राजनीति, बन गई आज है वेश्यालय, तलवार बनाकर कलमों को, करते इनका संहार मित्र। ………. जितनी भी क्राँति हुई अब तक, कवियों की प्रमुख भूमिका थी, कवियों में इतनी ताकत है, वो बदल सके सरकार मित्र। ………. क्या कर्ज लिये मर जायेंगे, जो भारत माँ के हम पर हैं, क्यों न हम ऐसा कर जायें, चुक जाये माँ उपकार मित्र। ………. ये जीवन बहुत कीमती है, मुझको क्या सबको मालुम है, क्यों जाया जीवन मूल्यवान, ये बातों में बेकार मित्र। ………. हम लिखें क्राँति की रचनायें, निश्चित ही परिवर्तन होगा, हम सोचे सब परिवर्तन की, सब करें क्राँति हुँकार मित्र। -.........दिनेश अग्रवाल

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

भगवान की पूजा के समय तमिल मराठी पंजाबी गुजराती बंगाली होना कोई महत्त्व नहीं रखता है ,…..ठाकुर ब्राम्हण दलित पिछड़ा को वर्गानुसार कृपा नहीं मिलती है ,…दीनानाथ उन्ही के हैं जो उनके रास्ते पर चलते हैं ,..जिनके मन में सबके प्रति करुणाभाव है ,..यदि हम परहित नहीं कर सकते हैं तो भी सच्चा निजहित करने से भगवन प्रसन्न ही होंगे ,..सच्चा निजहित लूटराज से मुक्ति ,…गाय गंगा प्रकृति का संरक्षण ,..दैवीय ज्ञान और संस्कारों को बढाने में है !………….नशा व्यसन मुक्ति ,..आपसी रंजिशों के खात्मे से भगवान कृपा अवश्य मिलेगी , बहुत सटीक बात कही है आपने ! और एक बात , आपने तो महाकाल के दर्शन के बाद चोला (फोटो ) ही बदल लिया

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: Jaynit Kumar Jaynit Kumar

चिताभस्म के परम सत्य तक पहुँचने से पहले हमें कई सत्यों का पालन करना होगा -इस सच को आपने शब्द दिया है जिससे हम सभी भागने की कोशिश करते है पर संज्ञान में अवश्य रहता है कि मुक्ति-मोक्ष का मार्ग यही है,पर आत्मसात करना कठिन जान पङता है कारण आसुरी शक्तियों का हमारे मन मष्तिष्क पर पङा हुआ प्रभाव जिससे हम मुक्त ही नहीं होना चाहते ........,उपाय भी आपने सोच में बदलाव बताया है पर सत्य के मार्ग में इतनी कठिनाईयां हैं संतोष भाई कि लोगों ने कल के बारे में सोचना छोङ दिया है उन्हें कैसे इस सत्य का एहसास दिलाया जाय कभी इस पर भी प्रकाश डालें......अति उत्तम आलेख के लिए बधाई

के द्वारा: minujha minujha

.नंगे मगरमच्छों का टाइम पूरा है ,…देश इनको फूंक मारकर उड़ा देगा ,…गांधियों की लूट और बेशर्मी उजागर है ,…माया मुलायम जैसे गद्दारों को अब विदेशी दलित, विदेशी मुसलमान ,विदेशी वोटर ढूँढने पड़ेंगे !….. देश ऐसी फाडेगा कि सिलने से पहले हजार बार सोचेंगे ,..पहला टांका कहाँ लगाएं !….जिंदगी जेल में यही सोचकर बीतेगी !…..देशद्रोही सरकार के सगे सौतेले हमक़दमों को हम हमेशा के लिए उखाड़ेगे ,…अधर्मी जातिवादियों का अवसरवाद उनकी कब्र और गहरी करेगा !……यह देश धार्मिक महापुरुषों का है ,..हमारे सच्चे पूर्वजों का है ,..इन गद्दारों के बाप का नहीं ,..आज इनके पास ताकत है तो बेरहम निर्लज्ज हैं ,..कल लात मारकर चौराहे पर टांगेंगे तो कोई रहम की भीख नहीं देगा ,…लुटेरी विदेशी दुकानों को हम नहीं जमने देंगे हमने दोमुहे नाम के एक जानवर का नाम सुना था ! यहाँ माया मुलायम नाम के दो नेता भी दोमुहे हैं ! इन्हें किसी संग्रहालय में रख देना चाहिए !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

…तुमको अपने कुकर्मों की सजा भुगतनी होगी ,…….स्वाभिमानी भारत तनकर स्वामीजी के पीछे खड़ा हैं ,. अन्नाजी जैसे सरल संत साथ देंगे !….देशभक्त देश की जरूरत समझते हैं !…………..भूखी नंगी जनता की क्रोधाग्नि में तुम स्वाहा हो जाओगे ,…भटके हिन्दुस्तानी सच्चाई की राह पर एक होंगे ,…तुम्हारे गुलाम सरकारी नौकर मजबूर हैं लेकिन भारतपुत्र हैं ,…..अस्तित्व की जंग में अपने साथ होंगे ,…..हम अपना हक तुमसे लेकर रहेंगे !…..तुम्हारा नाशकर हम अपना महानिर्माण करेंगे ,…..,..हमारे रामकृष्ण मंदिर से हमारे दिलों तक पहुंचेंगे ,…. रामराज्य आने में देर नहीं है…..भारतवासी देशद्रोही नहीं रामभक्त हैं !……हम हिन्दुस्तान से लुटेरी इंडिया का नामोनिशान मिटा देंगे ! बहुत खूब जय भारत मित्र जय भारत वन्दे मातरम

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

देहरी के अँधेरे को स्वामी रामदेवजी ने अपने पुरुषार्थ और अथक परिश्रम से दूर कर दिया है ,..उनके भागीरथ प्रयास में अब हमें कदमताल करनी हैं ,…. गुलाम पूंजीवादी अर्थतंत्र और काले राजतंत्र को सामजिक एकजुटता से हम दफ़न कर देंगे ,…हम मूरख लोगों को सदमार्ग बताने की जरूरत नहीं है ,…उसको सब जानते हैं ,मुसीबत में फंसे देश को टोपीबदल कठपुतले नहीं कट्टर राष्ट्रवादी नेत्रत्व चाहिए..! श्री संतोष जी , मैंने इस लेख को पढ़ा था और अपने विचार भी व्यक्त किये थे किन्तु मुझे अपना नाम नहीं दिखा तो दोबारा लिख रहा हूँ ! आप जो कोशिश कर रहे हैं , शायद कभी चिंगारी से ज्वाला बन जाए ! और जब ये ज्वाला अपना विकराल रूप दिखाएगी तब शायद इन लोगों को जगह भी न मिल पाए छुपने के लिए ! हमेशा की तरह जाग्रति देता लेख

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

नेहरू गांधी खानदान पक्का देशद्रोही और अव्वल दर्जे का शातिर है ,..अभिनय में इनके आगे नसीर साहब फेल हैं,…इनकी शातिरता देख लोमड़ियाँ बगलें झांकती है ,.अनेकों दंगे इन्होने करवाए ,….सफेदपोश देशभक्त बने रहकर देश लूटना इनका धंधा है ,…सोनिया गांधी का मजबूर त्याग भी यही था ,…लूट का माल अपना – फंसे तो मोहना !…. बहुत दिनों के बाद दर्शन हो रहे हैं श्री संतोष जी ! आप जब इस मंच पर आते हैं तो भूचाल सा आ जाता है ! सही कह रहा हूँ अगर नेहरु खानदान के किसी चमचे ने आपकी शिकायत कर दी तो गड़बड़ हो जाएगी क्यूंकि आजकल सच को सच कहना भरी भूल है और सीधा .......! लेकिन मित्रवर संतोष जी , लोग मुझे लगता है पागल हैं ! सब जानते हैं , सब पहिचानते हैं फिर भी सोनिया ममा को चाटुकार बने रहते हैं ! कौन समझेगा , किसे समझाने चले हैं आप ? जहां की कौम म्रत्प्राय हो चली हो , उसे कौन जगा सकता है !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश ) डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश )

प्रिय संतोष जी, सस्नेह …देश सब समझता है …..मोदी ही भारत को उबारेंगे !…देश के नौजवान केवल मोदी चाहते हैं !!…….मोदी जैसा देशभक्त ,विकासपुरुष,.समतावादी और दूरदर्शी दृढनिश्चयी राजनेता ही देश को सही दिशा देगा !……….गद्दार रंगीलों के लूटराज का खात्मा कर मोदी जैसा जितेन्द्रिय फकीर देश की बागडोर संभालेगा तभी हमारी मुसीबतें मिटेंगी !….भ्रष्टतंत्र के राजा गद्दार गांधियों के कुनबे से वसूली होगी !…..देश असली तरक्की देखेगा !….धर्मनिरपेक्षता के नाम पर देश तोड़ते और लूटते देशद्रोहियों का खात्मा होगा !……. देश में जनहितैषी स्वदेशी व्यवस्था लगेगी !….दलालतंत्र की लूट से जान बचेगी और सच्चा लोकतंत्र आएगा ,…..हम विदेशिओं के दलाल गद्दारों का हिन्दुस्तान से नामोनिशान मिटा देंगे !…….मोदीराज से ही रामराज आएगा ,.युवाभारत के आदर्श नेता मोदी हैं !……वही भारत चलाएंगे !….देश पूर्ण परिवर्तन लाकर रहेगा !… विशवास है. जय भारत, जय भारत मित्र

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

.फिरौ गुलाम लोग सीधा परधान बनाने का जतन लगाये हैं ,…कहते हैं कि नेहरू खानदान के बच्चे परधानमंत्री वाला कच्छा पहन कर पैदा होते हैं ,…जैसे देश में इंसान नहीं भेड़-बकरी वोट डालेंगे !!……”मुर्दा कौमें हिसाब लेने खड़ी हो गयी हैं ,..देशभक्त जवान किसान तुमको पांच साल क्या अब पांच दिन भी नहीं देंगे ,….तुम्हारे आगे एकै रास्ता है ….सब गद्दी से नीचे उतरो ! ….. फ़ौरन सिंहासन खाली करो !…..नही तो अंजाम बहुत अमानुषी होगा ! सही कहा आपने , संतोष जी ! ऊपर वाला तो नहीं पता , लेकिन नीचे वाले चमचे जरुर उसे प्रधानमंत्री का कच्छा पहनने को आतुर दीखते हैं की तुझे कुछ आता जाता हो या न हो , लेकिन तू इस देश का मालिक बनेगा ! तेरी योग्यता नहीं देखि जाएगी , बस तू इस खानदान में पैदा हुआ है यही तेरी खासियत है ! गज़ब का लिखते हैं आप !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

आदरणीय संतोष जी, सादर ! "".गद्दार लुटेरों तुम्हारे पाप का घड़ा फूट चुका है ,…तुम्हारे घोटाले गिनै खातिर उंगली कम हैं ,…नेहरू से शुरू करो तो सबकी मिलाकर कम पड़ेंगी ! …रकम गिनै खातिर कम्पूटर छोटा पड़ेगा ,….तुम्हारे झूठ सफ़ेद नहीं पारदर्शी हैं ,.सब आरपार दिखता है !..इंसान के भेष में शैतान हो तुम !…. तुम देशभक्तों के खूनी हो !….. लाखों क्रांतिकारियों के गुनाहगार हो !… तुम्हारी असलियत सामने हैं,…….तुम देशद्रोही राक्षस हो ,..विदेशिओं और पूंजीपतियों के दलाल हो तुम !….हमारी सब तकलीफ तुमसे पैदा है !""""" इसी आक्रोश की अग्नि में इनकी चिताये जलेंगी ! लूट का धन जो इनकी रगों में लहू बनकर दौड़ रहा है, वह काला लहू भी इनका साथ नहीं देगा ! वन्दे मातरम् !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

….कर्तव्यविमुख लोगों को कर्तव्य का भान हुआ ,…खंडित लोकतंत्र मजबूती से खड़ा हुआ ,…गद्दार जयचंदों ने गाँव से माफ़ी मांगी और सब धन देकर अपनी सजा भुगती ,...नशों की महामारी बंद हुई और योग का प्रसार हुआ ,……भारतगाँव में नयी व्यवस्था का उदय हुआ ,….वंचित जनता को समान अधिकार और सम्मान मिला , ……..बाहर गाँव के लोग हैरान थे,.. उन्होंने भारतपुर को नमन किया ,….धन आने से धर्म की स्थापना सरल थी ,..अधर्म और भ्रष्टाचार का नाश् हुआ ,..रामराज्य फिर साकार हुआ …ज्ञान ,शक्ति और भक्ति की त्रिवेणी फिर बहने लगी …..मात पिता का सम्मान होने लगा ,….गाय गंगा और धरती लहलहाने लगी …सबके घरों में सदाचार सुख समृद्धि की अखंड ज्योति जलने लगी !….वन्देमातरम ! आदरणीय संतोष जी, नमस्कार! आपकी सकारात्मक सोच को नमन! काश वो दिन जल्द आए और हम सभी अमन चैन से रह सकें! आभार सहित!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

इन हारों की असली जिम्मेदार मूरख जनता ही थी ,…वो मूरख जनता जो अपना इतिहास गौरव सब भूल चुकी थी ,…महान ऋषिओं तपस्विओं के ज्ञान और अनेकों महान बलिदानों को मानते हुए भी उनके पीछे एकजुट नहीं थी ,…अपनी भाषा ,सभ्यता से प्रेम के बावजूद उसको पराधीन मानती थी ,…. मंदिरों में चढावा चढाकर भीख मांगती थी … लेकिन अपनी औलादों की कुशलता के लिए एकजुट होकर लुटेरों से संघर्ष करने में कतराती थी ,….. अपने खंड की चिंता तो करती है लेकिन पूरे गाँव की चिंता नहीं करती थी ,..मूरख भूल गए थे कि गाँव जलेगा तो सबको स्वाहा होना है ,…………इसी दौर में कुछ पक्के मूरखों ने एक दल बनाया ,…कुछ दिन जनजागरण के बाद वो खुद भ्रमित हो गए ,… भक्ति में अहंकार पनप गया ….लेकिन अहंकार तो टूटता ही है , आपसे पूर्णतः सहमत हूँ ! गोरों ने अपने पालतू कुत्तों को सरकार चलाने का ठेका दे दिया और जनता उनके वंशजों को अपना रहनुमा समझती रही ! प्रभावी लेखन ! श्री जसपाल भट्टी जैसे कलाकार सदियों में जन्म लेते हैं , उन्हें भावभीनी श्रधांजलि

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

संतोष साहब ,प्रणाम ,सच लिखा है आपने ,,,,,,,,,,,,,,“..गद्दार लुटेरों तुम्हारे पाप का घड़ा फूट चुका है ,…तुम्हारे घोटाले गिनै खातिर उंगली कम हैं ,…नेहरू से शुरू करो तो सबकी मिलाकर कम पड़ेंगी !…रकम गिनै खातिर कम्पूटर छोटा पड़ेगा ,….तुम्हारे झूठ सफ़ेद नहीं पारदर्शी हैं ,.सब आरपार दिखता है !..इंसान के भेष में शैतान हो तुम !….तुम देशभक्तों के खूनी हो !….. लाखों क्रांतिकारियों के गुनाहगार हो !… तुम्हारी असलियत सामने हैं,…….तुम देशद्रोही राक्षस हो ,..विदेशिओं और पूंजीपतियों के दलाल हो तुम !….हमारी सब तकलीफ तुमसे पैदा है !….तुमने हिन्दुस्तान लूटकर हमको कंगाल किया है,… विदेशी हमारे धन से मौज कर रहे हैं !…. तुम मंहगाई , भूख ,गरीबी ,बेकारी,बीमारी के जिम्मेदार हो,…तुम पूरे देश के अपराधी हो !………………. तुरंत सत्ता छोड़ दो नहीं तो हम तुम्हारे महलों को रौंदकर मिटटी में मिला देंगे ,

के द्वारा: डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश ) डॉo हिमांशु शर्मा (आगोश )

सादर प्रणाम! “..गद्दार लुटेरों तुम्हारे पाप का घड़ा फूट चुका है ,…तुम्हारे घोटाले गिनै खातिर उंगली कम हैं ,…नेहरू से शुरू करो तो सबकी मिलाकर कम पड़ेंगी !…रकम गिनै खातिर कम्पूटर छोटा पड़ेगा ,….तुम्हारे झूठ सफ़ेद नहीं पारदर्शी हैं ,.सब आरपार दिखता है !..इंसान के भेष में शैतान हो तुम !….तुम देशभक्तों के खूनी हो !….. लाखों क्रांतिकारियों के गुनाहगार हो !… तुम्हारी असलियत सामने हैं,…….तुम देशद्रोही राक्षस हो ,..विदेशिओं और पूंजीपतियों के दलाल हो तुम !….हमारी सब तकलीफ तुमसे पैदा है !….तुमने हिन्दुस्तान लूटकर हमको कंगाल किया है,… विदेशी हमारे धन से मौज कर रहे हैं !…. तुम मंहगाई , भूख ,गरीबी ,बेकारी,बीमारी के जिम्मेदार हो,…तुम पूरे देश के अपराधी हो !………………. तुरंत सत्ता छोड़ दो नहीं तो हम तुम्हारे महलों को रौंदकर मिटटी में मिला देंगे ,……फिर रहम की कौनो गुंजाइश नहीं होगी !……सौ सौ बार मारेंगे !!………………………….देशद्रोही सत्ता से चिपके गद्दारों को हमारी चेतावनी है ,…मगरमच्छों के दांत साफ़ करने वाले परजीवियों !…तुम्हारे दांत भी हमारे खून से रंगे हैं ,….....................गन्दी राजनीती व्यवस्था के प्रति आम आदमी के आक्रोश और दर्द को उजागर करता हुआ अआलेख......जनमानस में क्रान्ति की बिज फूंक रहा है.............वन्देमातरम........................इन्कलाब...................

के द्वारा: अनिल कुमार ‘अलीन’ अनिल कुमार ‘अलीन’

यदि भक्ति भाव से समर्पण और कर्मों में सत्यता लाने का दृढसंकल्प हो …अलौकिक धार्मिक ग्रंथों में लिखी स्तुतियाँ यही सन्देश देती हैं ,..लेकिन ये स्तुतियाँ अक्सर निष्प्रभावी होती हैं ,…क्योंकि हम स्तुति तो करते हैं लेकिन उन रास्तों पर नहीं चलते ! …वास्तव में हम ढोंग को ज्यादा मान्यता देते हैं ,….ईश्वर सर्वत्र और अंतर्यामी है ,.क्योंकि उनका अंश हमारे अंदर ही है ,..हमारे भाव और कर्म उनसे छुप नही सकते हैं !…सनातन धर्म हमें जड़ नहीं बनाता है लेकिन हमने यही किया है ,…संतोष जी ….प्रभु श्री राम के आदर्शों को आप ने बहुत खूबी से उपदेश दिया ज्ञान दाई आलेख काश लोग कुछ तो अपनाएं, आज मंदिरों में भीड़ तो है लेकिन मंदिर का महात्म्य नहीं दीखता ! मंदिर जाने वाली भीड़ भी संस्कारित हो , ऐसा भी नहीं कहा जा सकता ! आज अलग विषय , लेकिन सुन्दर लेखन !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

आदरणीय गृहस्थ संत सिरोमणि संतोष जी महाराज, सादर वंदन! थोड़ी सी आशीष मुझे भी दीजिये महोदय! ...आपने रामायण का सार इतने कम शब्दों में रख दिया कि अब रामायण पढने की आवश्यकता ही नहीं. वैसे भी आजकल शोर्टकट का जमाना है मोटे मोटे ग्रन्थ पढ़ने की फुर्सत ही कहाँ मिलती है. कहते है रामायण में चारों वेदों और सभी शास्त्रों का सार है और अठारहों पुरानों का सार है - "परहित सरिस धरम नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अघताई." आपने सबकुछ सामने रख दिया. उसका ब्यवहारिक पक्ष भी रख दिया ... सचमुच कमाल के है आप मेरे भाई! राजनीति तो राजनीति, मूरख मंच के प्राण, और अब अध्यात्म ... आपने तृप्त कर दिया शुरू से अंत तक प्रवाहमय .. किसने कहा यह लम्बा है ... यह तो निचोड़ है! जैसे श्रीकृष्ण भगवान ने अर्जुन को युद्धभूमि में ही "गीता ज्ञान" सिखा दिया... आप प्रशंशनीय और अतुलनीय हैं! आपका लेखन जारी रहे ... आभार सहित!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

संतोष भाई जी नमस्कार .. पहले तो ये बात की आपने ये बहुत अच्छा किया की अंतिम में लिख दिया लेख बहुत लंबा हो गया ,.अंत तक पढ़ने के लिए कोटिशः आभार :)) वाकई में शुरू हुए तो ख़तम होने का नाम ही नहीं ले रहे थे :)) मजाक कर रही हूँ वैसे इतनी उर्जा समाहित होता है आपके आलेख में की इसके ताप से कोई भी वंचित नहीं रह सकता ... आध्यात्मिकता से शुरुआत कर आपने कर्म की श्रेष्ठता की और ध्यान दिलाते हुए आपने आलेख समाप्त किया .. कंही -२ तो गजब आपने लिखा है ... हमें वेद दिए ,..जिनसे सब ज्ञान उपजा ,..लेकिन ज्ञान किसके लिए है !…..क्या ज्ञान ने अपना लक्ष्य पूरा किया !…शायद नहीं !………यदि ज्ञान अपना लक्ष्य पूरा करता तो दुनिया में इतनी मारकाट लूट-खसोट,अत्याचार न होता ,….ज्ञान का लक्ष्य है प्रेम,.. प्रेम का चरम है भक्ति ! और आपने प्रभु राम के जीवन के जिन प्रमुख बिन्दुओ को रखा ... और फिर से सबको स्मरण कराया . उसके लिए बहुत -२ बधाई .. नवरात्र और दशहरा के शुभ अवसर पर .. बहुत ही सुंदर सन्देश ले कर आये .. पुनह बधाई

के द्वारा: MAHIMA SHREE MAHIMA SHREE

मुसलमानों को भड़काने खातिर गद्दारों की फ़ौज तैनात है,…हम हिन्दुस्तान पर कब्ज़ा नही होने देंगे ! ..हिन्दुस्तान में सब हिन्दू हैं ,…पूजा नमाज के फर्क से कौनो फर्क नहीं है ,…राम रहीम के दिखाए रास्ते पर चलकर इंसानियत को ऊंचाई देना ही धरम है ,…प्रकृति ,गाय ,गंगा की रक्षा और पूजा सबके लिए जरूरी है ,…..हमारे पूर्वज एक हैं ,…हम सब एक हैं ,…लुटेरों ने हमको काटकर लूटा है ,…अब समय है एक होने का !…राष्ट्रभक्त हिन्दू मुसलमान सगे भाई से बढ़कर हैं ,..विदेशिओं की चालों को तोड़कर हम विश्वगुरु भारत बनायेंगे ,…हम तो पाकिस्तानी अवाम से भी विनती करेंगे कि जाहिलों के साये से दूर रहें ,….ये अमेरिका के खिलौने हैं ,.जब चाहे तोड़ देंगे ,..हमारी दुश्मनी गोरों की साजिश लगती है ,. हमारे लुटेरे हुक्मरान उनके गुलाम हैं !…बिल्ली की लड़ाई करवाकर बन्दर रोटी खाता है ,..हमको सबकी इज्ज़त करनी चाहिए तभी आगे बढ़ेंगे ,….सच्चा हिंदुत्व हिन्दुस्तान की नहीं पूरी दुनिया की जरूरत है ,वही जोश , वही जूनून ! संतोष जी एक न एक दिन बात बनेगी और उम्मीद है की देश सुधरेगा ! लोग जाग रहे हैं , थोड़े थोड़े जाग रहे हैं , उबाल आना बाकी है ! बेहतरीन लेखन हर बार की तरह

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

सुराज खातिर हमको अपने सद्गुण बढाने होंगे ,…सब मतभेद छोड़कर पक्का राष्ट्रवादी नेतृत्व बनाना होगा ,..एक सरकार नहीं पूरा राज तंत्र बदलना होगा ,…देश उसके हाथ हो ,.जो हमारा प्रकृति का करीबी विकास करे ,..देश विदेश में उसका सम्मान हो ,.. ऊ विदेशी गुलाम नहीं देश का सेवादार हो !…दुश्मनों से देश की रक्षा करे ,….भ्रष्टाचार मिटाए ,…हमारा लूटा धन वापस लाये ,.ठोस स्वदेशी विकास करे ,…सबके लिए बराबर स्वदेशी शिक्षा लागू हो ,.विज्ञान के साथ वेदों शास्त्रों का ज्ञान मिले …सबको बराबर इलाज मिले ,..हमारे संस्कार और परम्परा ज्ञान को बचाए बढाए ,..स्वदेशी दवाई और कानून लाये ,…नशे और अश्लीलता को रोककर जवानी को सही रास्ता दिखाए ,… खेती किसानी में अच्छे रोजगार पैदा करे ,..करों के जाल से देश को बचाए ,..मंहगाई खुदै तल्ली में आ जायेगी ,…बोझ सरकारी मशीन को काम पर लगाये !….”. हाँ सुराज ऐसा ही होता होगा. जरूर लायेंगे. बधाई प्रिय संतोष जी, सस्नेह

के द्वारा: PRADEEP KUSHWAHA PRADEEP KUSHWAHA

किसान की आमदनी पक्की हो ,..स्कूली मास्टरों को प्रशिक्षण देकर उनकी योग्यता और कर्मठता बढाई जाय ,.. नशेड़ियो को घर बैठाया जाय !..स्कूलों में अच्छी पढ़ाई के साथ योग और खेल सिखाये जांय ,…सबके घर में इतना अन्न और धन दौलत हो कि स्कूल में खाने की जरूरत न पड़े !…जिनके पास जमीन नहीं है उनको जमीन मिले ,…जंगल पर जनता सरकार की साझेदारी हो ,..मिलकर सँवारे और लाभ ले ,… बरसाती पानी बचाकर सिंचाई करें और धरती को भरें !…..हर गाँव में प्राकृतिक खाद और ऊर्जा का इंतजाम हो !……ताकत मिलने पर आदमी कूदता है ईलिए सरकारी नौकरों की लगाम जनता के हाथ हो ,…उनकी तरक्की का रजिस्टर खुला होना चाहिए ,…जनता चाहे तो लाल कलम चलाये चाहे तो हरा !….. पढ़ाई लिखाई ,दवा मुफत हो ,… नशों पर पाबंदी लगे ,……एक नशेड़ी दस जिन्दगिओं की खुशी लीलता है ,….हर गाँव में एक सेंटर बने जहाँ सब सुविधा एक साथ मिले ,…भजन सत्संग का इंतजाम हो ,..जब अच्छी शिक्षा के साथ योग खेल भजन सत्संग का आनंद मिलेगा तो अनैतिक बातें दिमाग में नहीं घुसेगी !. श्री संतोष कुमार जी , लेखनी और लेखन शैली की तारीफ करने का कोई फायदा नहीं क्यूंकि वो हमेशा ही अच्छी होती है ! विषय पर बात करते हैं ! गुलामी झेलते हुए ९० +65 साल हो गए हैं , गुलामी के निशाँ इतनी जल्दी नहीं जाते , तब तो और भी नहीं जाते जब गुलामी के प्रतीकों से मोह हो जाये या वो प्रतिष्ठा का सवाल बन जायें ! देश का भ्रष्ट कानून मंत्री जब प्रेस को बुलाता है तब शुरू में ही ठसक से कहता है मैं ऑक्सफ़ोर्ड से पढ़ा हूँ ! गुलामी के निशाँ , गुलामी का असर जब हमारे उच्च वर्ग तक दीखता है तो आप हम जैसे कीड़े मकोड़ों से क्या उम्मीद कर सकते हैं !

के द्वारा: yogi sarswat yogi sarswat

मान्यवर संतोष जी, सादर ! जवाहर भाई ने ठीक कहा है, वैकल्पिक व्यवस्था बहुत आवश्यक हो गया है देश के लिए ! पर राष्ट्र के विस्तार को देखते हुए अभी लग नहीं रहा है की कोई उचित विकल्प मिल पायेगा ! केजरीवाल जी जो कर रहे हैं, उसकी देश को बहुत आवश्यकता है, पर जो हो रहा है, वह भ्रष्टाचार के इस विकराल दानव के लिए कुछ भी नहीं है ! उसपर तो कोई भयंकर आक्रमण ही कारगर होगा ! खेद है की वैसे भयंकर आक्रमण लायक वातावरण नहीं बन पा रहा है ! शंका ! शंका ! और शंका ! हमारी ये शंका करने की आदत ही इसमें सबसे बड़ा रोड़ा है ! हम ये नहीं सोचते की एक विस्तृत परिवर्तन हो तो सही ! व्यवस्था बदले तो सही ! जहर के लिए जो दवा बनती है, उसमें भी जहर होता है, यह सोचकर हम दवा का तिरस्कार करें, यह उचित तो नहीं ? और किसी बिमारी को ठीक करने के लिए केवल एक ही दवा खाई जाय, ऐसा भी उचित नहीं ! बाबा, अन्ना, केजरीवाल ये सब एक ही बिमारी के इलाज की दवा हैं ! इनको एक साथ मिलाया नहीं जा सकता ! सभी का अलग-अलग असर है, अलग-अलग कार्य है ! हमें सबको स्वीकार करना होगा ! तभी व्यापक असर होगा ! सादर !

के द्वारा: shashibhushan1959 shashibhushan1959

के द्वारा:

संतोष भाई, नमस्कार! कल मैंने टेलीविजन पर अरविन्द केजरीवाल की जीवनी के कुछ पहलू देखे - वह बचपन से जुझारू, मिहनती और ईमानदार है. उनका साथ, मनीष सिसोदिया, कुमार बिस्वास, योगेन्द्र यादव, संजय सिंह आदि तथा अनेको आर टी आइ कार्यकर्त्ता दे रहे हैं तो हमें भी उनका समर्थन करना ही चाहिए. एक विकल्प देने की कोशिश अगर वे कर रहे हैं और हम विकल्प की ही तलाश में हैं ..... हम फिर वही बात कहेंगे - जब तक अच्छे लोग राजनीति में नहीं आएंगे, यह राजनीति लुटेरों का ही अड्डा बना रहेगा. इसलिए अच्छे लोग अगर राजनीति में आ रहे हैं तो हमें उनका समर्थन करना चाहिए. जनता का आक्रोश चरम पर है जूते चप्पल के बाद अब अण्डों की बारी आई है. आपने देखा होगा शीला दीक्षित की सभा में शीला जी पर और वहां के पार्षद पर अंडे गिरे .... निशाना पक्का था!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

.सुराज अपनी मानसिकता बदलने से मिलेगा ,..हमको धरम अपनाना होगा ,..अपने कार्य कलाप सुधारने होंगे ,…दिमाग में जमा काला धुंवा निकालना होगा ,…………हम ताकतवर और समर्थ हैं ,…हमारे बीच कोई मनमुटाव नहीं है ,..हम एक हैं ,..हमारे राम एक हैं !…. भगवान, अल्ला, God एक हैं ,…सब अच्छाई सिखाते हैं ,….हमारी आत्माएं जाग रही हैं ,…….सच्ची नजर से देखो तो हर जगह अच्छाई हैं ,.. सबको सच्चा और एक होना है ,.. हम अपनी ताकत भूलकर दूसरों की गुलामी करते हैं ,….झूठे मक्कारों का मायाजाल सत्य के बाण से टूटेगा ,..रामनाम ही सत्य है ,…हमको भक्ति भाव से सेवा और साहस से लड़ाई करनी है ,….हम लालच में मरी आत्माओं वाले राक्षसों को मार भगाएंगे ,..लुटेरों से अपना हक लेकर रहेंगे ,….देश का स्वाभिमान जागा है ,.हम ही जीतेंगे !…भारत विश्वगुरु जरूर बनेगा …” बहुत ही अच्छा सन्देश दिया है भीखू चाचा ने! संतोष जी को वन्दे मातरम!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय संतोष भाई की जय हो, बड़ी ही विचित्र सरकार है ........और उससे भी विचित्र हो चले हैं हम लोग ...... वास्तव में कांग्रेस में एक गजब का लोकतंत्र है ....जिसने उन्हें दो अभूतपूर्व पावर दे रखें है पहला ---'राईट टू बकवास" दुसरा ---'राईट टू करप्सन"...............वास्तव में इनके काले कारनामो से ज्यादा तो खून इनके बचनों से खौलता है...........पता नहीं इनके माँ बहनों ने क्या खा इन्हें पैदा किया होगा......और इनके माँ बहन और बीवियों को शर्म भी आती है या नहीं......अभी आज के हरियाणा सरकार के कांग्रेस प्रवक्ता का ही बयान ले लीजिये ..........शर्म को भी शर्म आ जायेगी............खैर आप अपनी धार बरकरार रखिये ........हम आपके साथ हैं........जय हिंद......जय भारत

के द्वारा: ANAND PRAVIN ANAND PRAVIN